सरहद पर शारदा विराजमान
June 24, 2026
  • Read Ecopy
  • Circulation
  • Advertise
  • Careers
  • About Us
  • Contact Us
Android appiPhone AppArattai
Panchjanya
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
  • ‌
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • सामाजिक समरसता
      • नागरिक कर्तव्य
      • पर्यावरण
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • अधिक
    • विभाजन-विभीषिका
    • पाञ्चजन्य इवेंट
      • सुशासन संवाद
      • सागर मंथन
      • मुंबई संकल्प
      • अष्टायाम
      • गुरुकुलम
      • साबरमती संवाद
      • आधार इन्फ्रा
    • वेब स्टोरी
    • ऑपरेशन सिंदूर
    • विश्लेषण
    • लव जिहाद
    • खेल
    • मनोरंजन
    • यात्रा
    • स्वास्थ्य
    • धर्म-संस्कृति
    • पर्यावरण
    • बिजनेस
    • साक्षात्कार
    • शिक्षा
    • रक्षा
    • कला-साहित्य
      • पुस्तकें
      • पुस्तक समीक्षा
    • सोशल मीडिया
    • विज्ञान और तकनीक
    • मत अभिमत
    • श्रद्धांजलि
    • संविधान
    • आजादी का अमृत महोत्सव
    • मानस के मोती
    • जनजातीय नायक
    • पॉडकास्ट
    • पत्रिका
    • हमारे लेखक
  • Subscribe
    • Subscribe Print Edition
    • Subscribe Ecopy
    • Read Ecopy
Panchjanya
panchjanya android mobile app
  • होम
  • भारत
  • विश्व
  • संघ @100
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विश्लेषण
  • मत अभिमत
  • रक्षा
  • धर्म-संस्कृति
  • पत्रिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
  • Print Edition
  • Ecopy
होम भारत

सरहद पर शारदा विराजमान

जम्मू-कश्मीर स्थित कुपवाड़ा में शारदा मंदिर सिर्फ एक मंदिर का निर्माण नहीं, बल्कि शारदा संस्कृति को पुनर्जीवित करने की दिशा में अहम पड़ाव है

Written byअश्वनी मिश्रअश्वनी मिश्र
Apr 7, 2023, 10:57 am IST
in भारत, धर्म-संस्कृति, जम्‍मू एवं कश्‍मीर
मंदिर का ई-उद्घाटन करते गृहमंत्री अमित शाह। ( प्रकोष्ठ) में मंदिर में विराजमान माता शारदा

मंदिर का ई-उद्घाटन करते गृहमंत्री अमित शाह। ( प्रकोष्ठ) में मंदिर में विराजमान माता शारदा

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर स्थित कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा से सटे टिटवाल के माता शारदा देवी मंदिर के ई-कपाट खोल रहे थे तो राज्य ही नहीं, देश के हिन्दुओं के मन में एक अलग तरह की खुशी झलक रही थी। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु देवी शारदा की जय-जयकार कर पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में स्थित मूल शारदा पीठ को याद कर रहे थे।

पिछले दिनों जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह जम्मू-कश्मीर स्थित कुपवाड़ा में नियंत्रण रेखा से सटे टिटवाल के माता शारदा देवी मंदिर के ई-कपाट खोल रहे थे तो राज्य ही नहीं, देश के हिन्दुओं के मन में एक अलग तरह की खुशी झलक रही थी। मंदिर में मौजूद श्रद्धालु देवी शारदा की जय-जयकार कर पाकिस्तान अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में स्थित मूल शारदा पीठ को याद कर रहे थे। सबकी नजरों में एक ही चाहत दिखाई दे रही थी कि वह कौन-सा दिन होगा जब भारत में मां शारदा का मूल स्थान वापस सम्मिलित होगा!

इस अवसर पर अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘माता शारदा मंदिर नव वर्ष के शुभ अवसर पर भक्तों के लिए खोला गया है। यह देशभर के भक्तों के लिए शुभ शगुन है। उनकी कृपा सदैव हम सब पर बनी ही रहती है। किसी कारण के चलते मैं शारीरिक रूप से इस स्थान पर उपस्थित नहीं हो सका, लेकिन जब भी जम्मू-कश्मीर का दौरा करूंगा, तो माता शारदा देवी मंदिर में मत्था टेककर अपनी यात्रा शुरू करूंगा।’’ उन्होंने कहा,‘‘यह नई सुबह की शुरुआत मां शारदा देवी के आशीर्वाद और नियंत्रण रेखा के दोनों ओर नागरिक समाज सहित लोगों के संयुक्त प्रयासों से संभव हुई है।

1947 में विभाजन के बाद कबाइलियों ने यहां प्राचीन शारदा पीठ मंदिर, इसके परिसर और गुरुद्वारे को क्षतिग्रस्त कर दिया था। टिटवाल में तभी से यह जमीन वीरान पड़ी थी। 2021 में हमने यहां काम करना शुरू किया और दिसंबर, 2022 में मंदिर के साथ ही एक गुरुद्वारा तैयार कर स्थानीय सिख संगत को सौंपा। वे कहते हैं,‘‘टिटवाल में मंदिर के निर्माण से हमने एक लक्ष्य हासिल किया है लेकिन अभी शारदा पीठ में मुख्य लक्ष्य को हासिल करना बाकी है।’’

– रविंद्र पंडिता 

शारदा पीठ को कभी भारतीय उपमहाद्वीप मे शिक्षा का केंद्र माना जाता था। इसलिए यह कदम सिर्फ एक मंदिर का जीर्णाेद्धार नहीं है, बल्कि शारदा संस्कृति को पुनर्जीवित करने की शुरुआत है। अनुच्छेद 370 को खत्म कर इस केंद्र शासित प्रदेश को उसकी पुरानी परंपराओं, संस्कृति की ओर वापस ले जाया जा रहा है।’’ उल्लेखनीय है कि सेव शारदा समिति द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया है। दिसंबर, 2021 में इसका भूमि पूजन हुआ था। इसके संस्थापक रविंद्र पंडिता मंदिर के बारे में बताते हैं कि 1947 में विभाजन के बाद कबाइलियों ने यहां प्राचीन शारदा पीठ मंदिर, इसके परिसर और गुरुद्वारे को क्षतिग्रस्त कर दिया था। टिटवाल में तभी से यह जमीन वीरान पड़ी थी। 2021 में हमने यहां काम करना शुरू किया और दिसंबर, 2022 में मंदिर के साथ ही एक गुरुद्वारा तैयार कर स्थानीय सिख संगत को सौंपा। वे कहते हैं,‘‘टिटवाल में मंदिर के निर्माण से हमने एक लक्ष्य हासिल किया है लेकिन अभी शारदा पीठ में मुख्य लक्ष्य को हासिल करना बाकी है।’’

 

शारदा पीठ के मार्ग का पड़ाव
जम्मू-कश्मीर के प्रसिद्ध लेखक अग्निशेखर बताते हैं कि कश्मीर से शारदा पीठ (अब का पीओजेके) तक जाने के लिए यह प्रमुख मार्ग तीर्थबल के नाम से प्रसिद्ध था। आज यह बिगड़कर टिटवाल हो गया है। यहां पितरों को तर्पण देने की महत्ता बताई गई है। भाद्रपद की शुक्ल अष्टमी, जिसे शारदा अष्टमी भी कहते हैं, को तीर्थ यात्रा होती थी। कश्मीर घाटी में चार दिन पहले से ही करीब चार स्थानों से तीर्थयात्रा शुरू हो जाती थी। श्रद्धालु बांदीपुर में मधुमती नदी के किनारे कलुषा गांव में प्राचीन शारदा मंदिर के आसपास एकत्र होकर यात्रा शुरू करते थे। फिर यहां से चलकर कुपवाड़ा के गुशी गांव में पहुंचते थे।

यहां भी शारदा जी का स्थान था। इस तरह से चार-पांच स्थानों से चलकर लोग टिक्कर में माता खीर भवानी पहुंचते थे, जो इस यात्रा का एक पड़ाव था। इस रास्ते पर यानी तीर्थबल (टिटवाल) से पहले तुंग द्वार था, जिसे आज के समय टंगदार कहते हैं, से होते हुए यात्री टिटवाल पहुंचते थे। यहां एक मंदिर और छोटा-सा गुरुद्वारा हुआ करता था। दरअसल यह इलाका अपने आप में एक ट्रेडमार्क था। यहां काला जीरा, शहद और घी की मंडी हुआ करती थी। लोग यहीं से अमृतसर और लाहौर आते-जाते थे। इस इलाके का यह एक व्यावसायिक पहलू था। यहां पर पड़ाव के बाद यात्री कृष्ण गंगा नदी में स्नान-तर्पण कर इसे पार करते हुए शारदा पीठ पहुंचते थे।

पीओजेके स्थित शारदा पीठ, जहां तक कॉरिडोर बनाने की हो रही मांग (मूल शारदा पीठ भग्नावशेष का चित्र)

वर्तमान में टिटवाल क्षेत्र नियंत्रण रेखा (एलओसी) पर है तो मूल शारदा पीठ पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर में।’’ वे शारदा पीठ की महत्ता के बारे में प्रकाश डालते हुए कहते हैं,‘‘यह पीठ विश्वप्रसिद्ध विद्यापीठ रही है। महात्मिक आख्यान के अनुसार तक्षशिला और नालंदा से भी प्राचीन पीठ जिसे शांडिल्य ऋषि ने बनाया। शारदा महात्मय के अनुसार इसका अपने समय में परशुराम जी ने भी निर्माण कराया था। मान्यता है कि आचार्यों ने यहीं ब्राह्मी लिपि से शारदा लिपि का निर्माण किया। पाणिनि ने भी यहीं अष्टाह्दय और रामानुजाचार्य ने ब्रह्मसू्त्र पर प्रसिद्ध टीका लिखी। अष्टांगयोग और अष्टांग ह्दय भी शारदापीठ में ही रचे गए हैं, ऐसी मान्यता है। कालांतर में यहां मध्य एशिया और चीन आदि से आकर विद्यार्थी ज्ञानार्जन करते थे, जिसमें प्रमुख नाम फाह्यान का आता है। वह यहां आकर ठहरा और ज्ञानार्जन किया। यह वह स्थान है, जहां हमारे पूर्वजों ने ज्ञानार्जन किया है। यह वही स्थान है जहां आठवीं शताब्दी (736 के निकट) कालड़ी से चलकर शंकराचार्य आए। आपको बता दें कि तब तक वह जगद्गुरु नहीं थे। उस समय वह आद्य शंकराचार्य थे।

यह सोचने वाली बात है कि उन्होंने प्रमुख चार मठ बनाये। जगन्नाथपुरी, द्वारिका, ज्योतिर्मठ और श्रृंगेरी। लेकिन कश्मीर जैसी जगह पर मठ क्यों नहीं बनाया? तो इसका उत्तर मिलता है कि क्योंकि यह पहले से ही सर्वज्ञ पीठ था। यानी सारे ज्ञान का पीठ। इसीलिए यह शारदा पीठ कहलाती है। यानी 64 कलाओं की अधिष्ठात्री देवी का निवास यह स्थान। नमस्ते शारदे देवी काश्मीर पुरवासिनी। शंकराचार्य जब कश्मीर आए तो उनका शास्त्रार्थ हुआ। जब वह विजय हुए तो इसके जो चार द्वार थे, उसमें दक्षिणी द्वार खोला गया। क्योंकि उन्होंने सारी परीक्षाएं उत्तीर्ण कर ली थीं। इसके बाद वह जगद्गुरु कहलाए। इसके बाद कश्मीर के आचार्यों ने शंकराचार्य के सम्मान में श्रीनगर स्थित पहाड़ी का नाम शंकराचार्य पहाड़ी रखा। इससे पहले इस पर्वत का नाम गोपाद्री पहाड़ी हुआ करता था। इसका महत्व इसलिए है, क्योंकि वह इस स्थान पर कुछ दिन ठहरे थे और यहीं सौंदर्य लहरी नाम की प्रसिद्ध
रचना की।’’

आठवीं शताब्दी के बाद 2023 में यानी 1500 साल बाद सनातन नववर्ष के प्रारंभ में, नवरेह के शुभ अवसर पर उसी श्रृंगेरी मठ से माता शारदा फिर से कश्मीर में पुन: लौटी हैं। यह पंच धातु की प्रतिमा है, जिसके लिए टिटवाल में मंदिर बनाया गया। लगभग 1500 वर्ष के बाद इसका एक सांकेतिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भूराजनैतिक अर्थ भी है। हमारा विश्वास है कि यह सब कुछ दैवीय कृपा से प्रेरित कार्य हो रहा है।’’ -अग्निशेखर

चंदन की प्रतिमा को किया विराजित
कश्मीर की सर्वज्ञ पीठ से उपाधि मिलने के बाद जगद्गुरु शंकराचार्य माता शारदा की एक चंदन की प्रतिमा अपने साथ दक्षिण भारत स्थित श्रृंगेरी ले गए। इस दौरान कुछ कश्मीरी आचार्य भी उनके साथ थे। तुंग नदी के किनारे शारदा पीठम् बनाया। इस पीठ में उन्होंने स्वयं श्रीचक्र बनाकर शारदा माता को विराजित किया। इसके बाद चोल राजाओं इसे बनवाया। चंदन की वह मूर्ति आज भी विद्या शंकर मंदिर में विराजित है। श्री अग्निशेखर कहते हैं कि आठवीं शताब्दी के बाद 2023 में यानी 1500 साल बाद सनातन नववर्ष के प्रारंभ में, नवरेह के शुभ अवसर पर उसी श्रृंगेरी मठ से माता शारदा फिर से कश्मीर में पुन: लौटी हैं। यह पंच धातु की प्रतिमा है, जिसके लिए टिटवाल में मंदिर बनाया गया। लगभग 1500 वर्ष के बाद इसका एक सांकेतिक, आध्यात्मिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भूराजनैतिक अर्थ भी है। हमारा विश्वास है कि यह सब कुछ दैवीय कृपा से प्रेरित कार्य हो रहा है।’’

1976 की है प्रस्तावना
आज टिटवाल में जिस शारदा मंदिर ने आकार लिया है, उसकी प्रस्तावना 1976 की है। अग्निशेखर शारदा अभियान के इतिहास के बारे में बताते हैं, ‘‘यह मुख्य तौर पर पंडित स्व. अमरनाथ गंजू जी का प्रयास था। लेकिन आर्यसमाज के प्रचारक नेत्रपाल शास्त्री, पंडित दया किशन बाबू और मैं भी प्रारंभ से इस अभियान में एक कार्यकर्ता के नाते जुड़ा रहा। मुझे याद है कि श्रीनगर में राम चंद्र मंदिर के परिसर में दो दिवसीय सेमिनार हुआ था, जिसमें शारदा पीठ का मार्ग खोलने का प्रस्ताव गुजरात से आए तत्कालीन महामंडलेश्वर की उपस्थिति में सर्वसम्मति से रखा गया था। हमारा प्रयास चल ही रहा था कि 1990 में हिन्दुओं का निर्वासन हो गया। बाद में 28 दिसम्बर, 1993 को दिल्ली के सीरीफोर्ट ऑडिटोरियम में प्रथम कश्मीरी पंडित विश्व सम्मेलन में एक घोषणा पत्र (दिल्ली घोषणा पत्र) जारी हुआ, जिसमें यह मार्ग खोलने के मुद्दे को उठाया गया। साथ ही शारदा लिपि के वैकल्पिक उद्धार के लिए आवाज बुंलद की गई। समय-समय पर इसके बाद कई राष्ट्रपतियों एवं शंकराचार्यों के सामने यह विषय रखा गया।’’

123 स्थानों पर चल रहा काम

मंगलेश्वर मंदिर का भी जीर्णोद्धार चल रहा है

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने उद्घाटन के दौरान कहा कि कि अनुच्छेद 370 निरस्त किए जाने के बाद से कश्मीर में शांति स्थापित हुई है। उसी का परिणाम है कि राज्य ने सामाजिक और आर्थिक बदलाव की दिशा में सभी क्षेत्रों में पहल की है। इसके तहत धार्मिक महत्व के 123 चुनिंदा स्थानों पर जीर्णाेद्धार का काम चल रहा है। जियारत शरीफ रेशिमाला, राम मंदिर, सफाकदल मंदिर, हलौती गोम्पा मंदिर, जगन्नाथ मंदिर सहित कई मंदिरों और पांथिक स्थलों का जीर्णाेद्धार कराया जा रहा है।

गौरतलब है कि इसी कड़ी में श्रीनगर स्थित 700 वर्ष पुराने मंगलेश्वर भैरव मंदिर का जीर्णोद्धार किया जा रहा है। 2004 में इसे कश्मीरी हिन्दुओं के पलायन के बाद पहली बार खोला गया था। श्रीनगर के उपायुक्त मोहम्मद एजाज असद बताते हैं कि सितंबर, 2014 में आई बाढ़ के कारण मंदिर की दीवारों में दरारें आ गई थीं। ऐसे में वास्तुकला की दृष्टि से महत्वपूर्ण इस विरासत के पुनरुद्धार, बचाव, संरक्षण और मरम्मत कार्य की योजना बनाई गई। आंकड़ों की बात करें तो श्रीनगर स्मार्ट सिटी के तहत कश्मीर के प्राचीन और ऐतिहासिक धार्मिक स्थलों के जीर्णोद्धार का काम किया जा रहा है। अब तक करीब 15 ऐतिहासिक मंदिरों का जीर्णोद्धार हुआ है।

तीर्थबल मंदिर की विशेषता
अग्निशेखर बताते हैं कि समूचे राज्य का माहौल अनुच्छेद 370 के बाद बदल रहा है। मंदिर बनने से बहुत अच्छा संदेश गया है। वह कहते हैं,‘‘आज के टिटवाल स्थित शारदा मंदिर (तीर्थबल) की विशेषता यह है कि यह पाक अधिक्रांत जम्मू-कश्मीर की शारदा पीठ की प्रतिकृति है। वहां पीठ के अवशेष आज भी वैसे ही खड़े हैं, जैसे वह सनातन धर्मियों के आने की प्रतीक्षा कर रहे हों। उसी मंदिर की छोटी सी अनुकृति इस मंदिर में दिखाई पड़ती है।

कश्मीर के साहित्य में वर्णन मिलता है कि मूल शारदा पीठ के भी चार द्वार थे और इस नवनिर्मित मंदिर के भी चार द्वार हैं। अब इस मंदिर में पहुंचते ही आपको मूल स्थान की याद आती है। मैं मानता हूं कि यह मंदिर भू-राजनीतिक संदेश देता है कि भारत अपने मूल स्वरुप की ओर बढ़ रहा है। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो शारदा माता अपने मूल स्थान की ओर लौट रही हैं। पर्यटन की दृष्टि से भी इलाके के लिए बहुत अच्छा संदेश गया है। अब विश्वभर के लोग यहां आएंगे, जिसके चलते रोजगार के साधन विकसित होंगे।’’

Topics: अनुच्छेद 370Ram Chandra Temple in SrinagarArticle 370Sharda sitting on the borderशारदा पीठप्राचीन शारदा मंदिरतक्षशिला और नालंदाचंदन की प्रतिमाश्रीनगर में राम चंद्र मंदिरजम्मू-कश्मीरSharda PeethJammu and KashmirAncient Sharda Templeकेंद्रीय गृह मंत्री अमित शाहTaxila and NalandaUnion Home Minister Amit ShahSandalwood statue
अश्वनी मिश्र
अश्वनी मिश्र
@kashmirashwaniअश्वनी मिश्र भारत की सबसे पुरानी और व्यापक रूप से प्रसारित राष्ट्रवादी हिंदी साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य में वरिष्ठ संवाददाता के रूप में कार्यरत हैं. देश के ज्वलंत मुद्दों की ग्राउंड रिपोर्ट करने के साथ ही मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा एवं राजनीतिक मुद्दों के बारे में लिखते हैं. जम्मू—कश्मीर, पश्चिम बंगाल एवं आतंकरोधी घटनाक्रम विशेष रुचि के क्षेत्र हैं. देश की विभिन्न राजनीतिक घटनाओं पर तीक्ष्ण नजर रखते हुए उनका समग्र विश्लेषण पत्रकारिता जगत में एक विशिष्ट स्थान रखता है। भारतीय राजनीति, समाज, खेल, मानवाधिकार क्षेत्र की विशिष्ट विभूतियों से निरंतर साक्षात्कार और चर्चा उनके पत्रकारीय अनुभव को मजबूत बनाती हैं. उनके अनेक आलेखों पर देश के राजनीतिक गलियारों में एक नरैटिव खड़ा हुआ. विभिन्न प्रासंगिक विषयों की रिपोर्ट और आलेखों को संसद के पुस्तकालय में संग्रहणीय तौर पर शामिल किया गया. बंगाल की चुनावी हिंसा की ग्राउंड रिपोर्ट एवं उसके पहले की अनेक हिंसाओं में पीड़ितों के जीवंत साक्षात्कार देशभर में सराहे गए. सोशल मीडिया पर उनकी उपस्थित विशेष दर्जा रखती है. [Read more]
ShareTweetSendShareSend
Subscribe Panchjanya YouTube Channel
Download Panchjanya mobile apps: Google Play Store  / App Store

संबंधित समाचार

अनुच्छेद 370 हटाए जाने से डॉ. मुखर्जी का सपना साकार हुआ: CM मोहन माझी

dr Shyama prasad Mukharjee mystirious death

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का बलिदान : नेहरू की भूमिका, मौत के पीछे की साजिश, मां का पत्र और बेटी का रहस्योद्घाटन

Shyama Prasad Mukherjee की मौत की जांच से Nehru क्यों डरे?

सेना के खिलाफ प्रदर्शन करते पीओजेके के लोग

पीओजेके : दमन से भी नहीं दबा हाैसला

मोदी के 12 साल, POJK का विद्रोह और ब्रिटेन का ग्रूमिंग गैंग सच

(AI-generated image)

जम्मू कश्मीर: LoC के पास उरी में भीषण धमाका, सेना के दो जवान बलिदान

Load More

ताज़ा समाचार

rashtra sevika samiti praveen shiksha varg concludes nagpur shanta kumari

“वैश्विक संघर्षों के बीच हिंदू जीवन-दृष्टि ही दिखाएगी शांति का मार्ग” : प्रमुख संचालिका शांता कुमारी

AAP MLA Chaitar Vasava Bharuch Court Summons Bharuch Police Case Investigation

जेल में बंद AAP विधायक चैतर वसावा की मुश्किलें और बढ़ीं: अब भरूच कोर्ट ने भेजा समन; पुलिस की बदनामी करने का आरोप!

howrah shibpur tmc leader attacks-bjp supporting locality manoj khan

हावड़ा: शिवपुर में TMC नेता की अगुवाई में हुई भारी बमबाजी और फायरिंग, भाजपा नेता थे निशाना, जमकर लगे मजहबी नारे

Moga RSS Shakha Massacre 1989 Punjab Terrorism 25 Swayamsevak Balidan

25 जून 1989 : जब मोगा में 25 स्वयंसेवकों ने बलिदान देकर भी बचाई हिंदू-सिख एकता

आपातकाल का सच

हिटलर गांधी : स्वयंसेवकों का बलिदान, बचा संविधान

Mahrang Baloch Sentenced to Life Imprisonment Pakistan Army Balochistan Protest

पाकिस्तान में तानाशाही हावी: बलूच एक्टिविस्ट डॉ. महरंग बलोच को उम्रकैद, उबाल पर बलूचिस्तान, सड़कों पर उतरा जनसैलाब!

उत्तराखंड पुलिस की फर्जी इंस्टाग्राम ID : सीनियर अफसर का बनाया ‘डीपफेक’ वीडियो, मोहम्मद लुकमान गिरफ्तार

ncient shaligram fossils found in lapthal niti valley chamoli uttarakhand

उत्तराखंड: तिब्बत बॉर्डर पर शालिग्राम की खोज, रहस्यों से उठने लगा पर्दा

संभल में महज 5 मिनट में दबोचा मासूम का दुष्कर्मी: स्निफर डॉग ‘मैरी’ का हैरतअंगेज कारनामा, SP ने दिया ₹10,000 का इनाम

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प

जी 7, पश्चिम एशिया और भारत के सधे कदम

Load More
  • Privacy
  • Terms
  • Cookie Policy
  • Refund and Cancellation
  • Delivery and Shipping

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies

  • Search Panchjanya
  • होम
  • भारत
    • अंडमान और निकोबार द्वीप
    • दादरा और नगर हवेली एवं दमन और दीव
    • अरूणाचल प्रदेश
    • असम
    • आंध्र प्रदेश
    • उत्तराखंड
    • उत्तर प्रदेश
    • ओडिशा
    • कर्नाटक
    • केरल
    • गुजरात
    • गोवा
    • चण्‍डीगढ़
    • छत्तीसगढ़
    • जम्‍मू एवं कश्‍मीर
    • झारखण्‍ड
    • तमिलनाडु
    • तेलंगाना
    • त्रिपुरा
    • दिल्ली
    • नागालैण्‍ड
    • पंजाब
    • पश्चिम बंगाल
    • पुडुचेरी
    • बिहार
    • मणिपुर
    • मध्य प्रदेश
    • महाराष्ट्र
    • मिजोरम
    • मेघालय
    • राजस्थान
    • लक्षद्वीप
    • लद्दाख
    • सिक्किम
    • हरियाणा
    • हिमाचल प्रदेश
  • विश्व
  • संघ @100
    • संघ को जानें
    • पंच परिवर्तन
      • स्वदेशी
      • सामाजिक समरसता
      • कुटुम्ब प्रबोधन
      • पर्यावरण
      • नागरिक कर्तव्य
    • संघ गीत
  • सम्पादकीय
  • काम की खबरें
  • स्वदेशी
  • जीवनशैली
  • विभाजन-विभीषिका
  • पाञ्चजन्य इवेंट
    • सुशासन संवाद
    • सागर मंथन
    • मुंबई संकल्प
    • अष्टायाम
    • गुरुकुलम
    • साबरमती संवाद
    • आधार इन्फ्रा
  • वेब स्टोरी
  • ऑपरेशन सिंदूर
  • विश्लेषण
  • लव जिहाद
  • खेल
  • मनोरंजन
  • यात्रा
  • स्वास्थ्य
  • धर्म-संस्कृति
  • पर्यावरण
  • बिजनेस
  • साक्षात्कार
  • शिक्षा
  • रक्षा
  • कला-साहित्य
    • पुस्तकें
    • पुस्तक समीक्षा
  • सोशल मीडिया
  • विज्ञान और तकनीक
  • मत अभिमत
  • श्रद्धांजलि
  • संविधान
  • आजादी का अमृत महोत्सव
  • पॉडकास्ट
  • पत्रिका
  • हमारे लेखक
  • Read Ecopy
  • प्रसार विभाग – Circulation
  • About Us
  • Contact Us
  • Careers @ BPDL
  • Advertise
  • Privacy Policy

© Bharat Prakashan (Delhi) Limited.
Tech-enabled by Ananthapuri Technologies