“अखंड दीप अब ज्वाला बनी” : शांतिकुंज में युगचेतना का महोत्सव, कलश यात्राओं के संग उमड़ा जनसैलाब
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“अखंड दीप अब ज्वाला बनी” : शांतिकुंज में युगचेतना का महोत्सव, कलश यात्राओं के संग उमड़ा जनसैलाब

हरिद्वार के शांतिकुंज में गायत्री परिवार के शताब्दी समारोह में श्रद्धेया शैलदीदी और स्वामी हरिचेतनानंद जी का भावपूर्ण संदेश- संघर्ष, सेवा और चेतना से समाज नवनिर्माण का संकल्प।

Written byउत्तराखंड ब्यूरोउत्तराखंड ब्यूरो — edited by Shivam Dixit
Jan 20, 2026, 03:00 pm IST
inउत्तराखंड

हरिद्वार । गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में आयोजित शताब्दी समारोह के अंतर्गत मंगलवार का दिन मानो साधना, सेवा और संकल्प की त्रिवेणी में गान का अवसर बन गया। देश-विदेश से पधारे हजारों साधकों, स्वयंसेवकों और गायत्री परिजनों की उपस्थिति से सम्पूर्ण वातावरण श्रद्धा, उत्साह और दिव्य ऊर्जा से आलोकित हो उठा।

श्रद्धेया शैलदीदी का संदेश: संघर्ष निखारने आते हैं

शांतिकुंज की अधिष्ठात्री, स्नेहसलिला श्रद्धेया शैलदीदी ने कहा कि यह समय मलाई को तैरकर ऊपर आने का पावन अवसर है। जीवन में आने वाले संघर्ष हमें तोड़ने नहीं, बल्कि निखारने आते हैं। यही वे क्षण होते हैं, जब मनुष्य अपने भीतर छिपी श्रेष्ठता को पहचान पाता है।

युगऋषि के सूत्र और समरसता का संदेश

उन्होंने युगऋषि के सूत्र को स्मरण कराते हुए कहा कि अपनी रोटी मिल-बाँटकर खाइए, क्योंकि यही भावना समाज में समरसता, करुणा और अपनत्व का दीप प्रज्वलित करती है। श्रद्धेया दीदी ने कहा कि युगऋषिद्वय के त्याग, तप और संकल्प की परिणति ही आज का विश्वव्यापी गायत्री परिवार है।

गायत्री परिवार : संस्कार और सेवा पर आधारित सजीव परिवार

उन्होंने हजारों स्वयंसेवकों को अपना परिवार का एक अंग मानते हुए कहा कि आज सम्पूर्ण विश्व, आशा और समाधान की दृष्टि से गायत्री परिवार की ओर देख रहा है। उन्होंने कहा कि जिन भवनों की नींव संस्कार, त्याग और सेवा पर रखी जाती है, वे किसी भी तूफान में डगमगाते नहीं। ऐसा ही एक सजीव, संस्कारवान परिवार है गायत्री परिवार।

स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज का आह्वान : दीप से ज्वाला बनने का समय

समारोह में उपस्थित साधकों को संबोधित करते हुए हरि सेवा आश्रम प्रमुख संत स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज ने आह्वान किया कि “अब अखंड दीप को केवल प्रज्वलित रखने का नहीं, बल्कि उसे ज्वाला में परिवर्तित करने का समय है। एक दीप तुम जलाओ और एक दीप हम जलाएँ, ताकि यह प्रकाश घर-घर, जन-जन तक पहुँचे।”

शांतिकुंज : चेतना के नवसृजन का तीर्थ

उन्होंने कहा कि शांतिकुंज कोई साधारण संस्था नहीं, बल्कि चेतना के नवसृजन का तीर्थ है, जहाँ व्यक्ति स्वयं को संस्कारित कर समाज के नव निर्माण का संकल्प लेता है। स्वामी हरिचेतनानंद जी ने इस विराट आयोजन को “गायत्री महाकुंभ” की संज्ञा दी।

गायत्री महाकुंभ और युग-चेतना का जागरण

उन्होंने कहा कि जैसे प्रयागराज का कुंभ जनमानस को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर देता है, वैसे ही यह शताब्दी समारोह जीवन की सुप्त चेतना को जाग्रत कर रहा है। उन्होंने “एक आचार्य, एक संकल्प और एक ज्योति” को जीवन में उतारने का संकल्प दिलाया।

ज्योति कलश यात्राओं का वैदिक पूजन और भावपूर्ण समापन

समारोह के भावपूर्ण समापन अवसर पर श्रद्धेया शैलदीदी, स्वामी हरिचेतनानंद जी महाराज, शताब्दी समारोह के दलनायक डॉ. चिन्मय पण्ड्या, महिला मण्डल की प्रमुख श्रीमती शैफाली पण्ड्या सहित अन्य गणमान्य अतिथियों ने भारत एवं विभिन्न देशों से लौटीं ज्योति कलश यात्राओं का वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजन किया।

ज्योति कलश शोभायात्रा और युग-चेतना का प्रवाह

पुष्पवर्षा के मध्य जब ज्योति कलशों की भव्य शोभायात्रा निकली, तो लगा मानो युग-चेतना स्वयं जनमानस के बीच प्रवाहित हो रही हो।

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