देहरादून: देवभूमि में क्या एक सोची समझी साजिश के तहत सरकारी भूमि कब्जाई गई और फिर उसे वक्फ में दर्ज करवा दिया गया ?
क्या ये उत्तराखंड की सनातन भूमि पर इस्लामिक गतिविधियों को एक सोची समझी साजिश के तहत क्या फैलाया गया? वक्फ बोर्ड में सूचीबद्ध संपत्तियों को देख कर तो ऐसा ही लग रहा है। पहले सरकारी भूमि पर कब्जे करो फिर उन्हें वक्फ की संपत्ति घोषित करवा कर अपना कब्जा पुख्ता करवा लो सरकार उस पर हाथ डालने से कतराए।
बहरहाल इस विषय पर धामी सरकार ने प्रशासनिक स्तर पर जांच पड़ताल शुरू करवा दी है कि आखिर किस आधार पर सरकारी भूमि कब और कैसे वक्फ बोर्ड की संपत्ति बन गई। जबकि माना ये जाता है कि ये संपति वो होती है जो कि किसी व्यक्ति द्वारा दान में जरूरतमंद को अथवा जनहित के कार्यों के लिए वक्फ को दी जाती है जोकि उसकी देख देख करता है। उत्तराखंड राज्य बनने के दौरान 2 हजार के करीब वक्फ संपत्तियां यूपी के दस्तावेजों से इधर आई जिनकी संख्या अब ढ़ाई गुणी बढ़ चुकी है।
उत्तराखंड में हैं 725 मस्जिदें
13 जिलों के इस छोटे से राज्य में जिसे सनातन की दृष्टि से देवभूमि, आध्यात्म की राजधानी भी कहा जाता है। अब वक्फ की संपत्तियों में मजार, मदरसे, मस्जिदों, इससे ज्यादा कब्रिस्तान है। जी हां ये सच है वक्फ बोर्ड की सूची पर नजर डाले तो यहां 725 मस्जिदें हैं, जबकि 769 कब्रिस्तान है। हालांकि, ये माना जाता है कि इतनी ही मस्जिदें अभी वक्फ बोर्ड ने दर्ज नहीं है। सबसे ज्यादा हैरानी करने की बात मजारों को लेकर सामने आई है। राज्य में 203 मजारें और दरगाहे वक्फ बोर्ड में दर्ज की गई है। इनमें ज्यादातर सरकारी भूमि पर कब्जे करके वक्फ में दर्ज करवाई गई है।
बताया जाता है कि जब राज्य में कांग्रेस की सरकार रही वक्फ में ऐसी संपतियों को दर्ज करवाने के लिए एक अभियान चलाया गया जोकि सरकारी भूमि पर कब्जे कर बनाई गई थी। इनमें ज्यादातर मजारें हैं। उल्लेखनीय है कि उत्तराखंड की धामी सरकार ने अब तक 572 अवैध मजारों को ध्वस्त किया है। अभी वक्फ मजारों का नंबर लगभग नहीं के बराबर लगा है। एक सर्वे के मुताबिक, उत्तराखंड में 1023 मजारें थी जिनमें से ज्यादातर अवैध रूप से या कहे सरकारी भूमि कब्जाने की नियत से बनाई गई।
उत्तराखंड में हैं 5388 वक्फ संपत्तियां
उत्तराखंड में 5388 वक्फ संपत्तियां हैं। जिनमें ईदगाह मदरसे मकान दुकानें कृषि भूमि आदि है। राज्य में 2129 औकाफ़ संपतियों (दान में दी गई) को भी दर्ज किया गया है। दिलचस्प बात मजारों को लेकर सामने आई है। वो ये कि एक ही नाम की दर्जनों मजारें हैं, अब सवाल ये उठता है कि एक व्यक्ति एक ही स्थान पर दफनाया गया होगा या अनेक स्थानों पर उसकी कब्र बना दी गई? ये भी सवाल है कि उन्हें कब्रस्तान पर क्यों नहीं दफनाया गया? सड़क किनारे कहीं-कहीं तो नाली किनारे मजार बना दी गई क्या ये उक्त फकीर के साथ सही आदर किया गया होगा?
देहरादून में हैं सैय्यद नाम की कई मजारें
देहरादून जिले में सैय्यद नाम से एक दर्जन से अधिक मजारे है, भूरे शाह और कालू सैय्यद के नाम से राज्य में कई मजारे है कुछ वक्फ बोर्ड में है कुछ नहीं ? तो क्या ये फ्रेंचाइजी मजारें है जोकि सरकारी जमीन कब्जाने की नियत से फिर उस पर ढोंग का कारोबार करने की नियत से बनाई गई? जानकारी के मुताबिक पिछले दो सालों में धामी सरकार द्वारा सैकड़ों अवैध मजारों को ध्वस्त किए जाने के दौरान भी कई खादिमों ने इन धार्मिक संरचनाओं के वक्फ में दर्ज कराने के लिए प्रयास किए किंतु उनके प्रयास प्रशासनिक तंत्र ने उन्हें नाकाम कर दिया।
ये हाल तब है जब ज्यादा मुस्लिम मजारों में सजदा नहीं करते, ये मजारें सिर्फ हिंदुओं की भावनाओं से आस्था का खिलवाड़ करने, ताबीज, झाड़ा का धंधा करने के लिए बिजनेस कर रही है। जितनी भी धामी सरकार ने अवैध मजारें हटाई है, उनकी किसी भी मिट्टी में कोई मानवीय अथवा किसी भी प्रकार का अवशेष नहीं निकला। अभी भी उत्तराखंड में करीब 3 सौ से अधिक अवैध मजारें हैं, जिन्हें सरकारी अथवा निजी भूमि पर अतिक्रमण करके बनाया गया है। धामी सरकार सबसे पहले इन्हें ही हटा कर अपनी भूमि खाली करवाएगी।
वक्फ की भूमि पर असरदार लोगों के कब्जे
उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड की जमीनों पर असरदार लोगों का और भू माफिया तंत्र का कब्जा चला आ रहा है, वक्फ बोर्ड में सालों से जमे हुए कुछ अधिकारियों ने भी वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे किए हुए है। खबर है कि प्रशासन द्वारा उसकी सूची तैयार करवाई जा रही है।
मुख्यमंत्री धामी का बयान
हमारा अतिक्रमण हटाओ अभियान चल रहा है। 11 हजार एकड़ से अधिक सरकारी भूमि खाली कराई गई है, हरी नीली चादर का धंधा नहीं होने दिया जाएगा। एक नाम से दस-दस, पंद्रह-पंद्रह फ्रेंचाइजी मजारें, सिर्फ ढोंग का कारोबार कर रही है। सवाल ये है कि माना कोई पीर फकीर है वो एक ही जगह तो दफनाया गया होगा या दस जगह? ये खेल देवभूमि में नहीं चलेगा, ये सनातन की भूमि है इसका देव स्वरूप बनाए रखना हमारी सरकार का पहला कर्तव्य है, हमारी सरकार कानूनी रूप से विधि सम्मत तरीके से ये जांच पड़ताल करवा रही है कि सरकारी भूमि पर आखिर कैसे, किसने और क्यों अवैध कब्जे किए और ये भी देख रही है कि ये किस आधार पर पर वक्फ की संपत्ति बन गए।

















