अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के द्वारा गाजा में बनाए गए अंतरराष्ट्रीय ‘Board of Peace’ (शांति बोर्ड) से उसके सहयोगी ही पीछे हट रहे हैं। ट्रंप को झटका देते हुए फ्रांस ने ट्रंप के गाजा ‘शांति बोर्ड’ में शामिल होने से इनकार कर दिया है।
क्या है मामला?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गाजा में युद्ध खत्म होने के बाद की स्थिति संभालने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ‘Board of Peace’ (शांति बोर्ड) बनाने का प्रस्ताव रखा है। ये बोर्ड गाजा में अस्थायी प्रशासन और पुनर्निर्माण की निगरानी करेगा। अमेरिका ने दुनिया के कई देशों के नेताओं को इसमें शामिल होने का न्योता भेजा है। बताया जा रहा है कि सदस्यता तीन साल के लिए होगी, और कुछ देशों को 1 अरब डॉलर देकर स्थायी सीट भी मिल सकती है।
इस बोर्ड का काम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में नवंबर में मंजूर हुए 20 सूत्रीय शांति प्लान को लागू करने में मदद करना है। बोर्ड में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, ट्रंप के मिडिल ईस्ट दूत स्टीव विटकॉफ, और ट्रंप के दामाद जैरेड कुशर जैसी प्रमुख हस्तियां शामिल होंगी। ट्रंप चाहते हैं कि कई देश इस बोर्ड में शामिल होने का ऐलान दावोस इकोनॉमिक फोरम (स्विट्जरलैंड) में गुरुवार को करें।
फ्रांस का रुख
फ्रांस ने साफ कह दिया है कि वो इस वक्त इस बोर्ड में शामिल नहीं होगा। फ्रेंच विदेश मंत्रालय और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के करीबी सूत्रों ने बताया कि बोर्ड का चार्टर (नियमावली) सिर्फ गाजा तक सीमित नहीं है, बल्कि उसका दायरा इससे कहीं ज्यादा है। फ्रांस के विदेश मंत्री जीन-नोएल बैरो ने सोमवार को कहा, “जैसा अभी प्रस्ताव है, वो संयुक्त राष्ट्र द्वारा मंजूर शांति योजना के दायरे से बाहर जाता है। इसलिए ये फ्रांस की अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धताओं के साथ मेल नहीं खाता।” एक सूत्र ने और स्पष्ट किया कि ये प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों और ढांचे का सम्मान करने पर सवाल उठाता है। फ्रांस इसे अभी “अस्वीकार्य” मान रहा है। हालांकि फ्रांस ने दोहराया कि वो गाजा में स्थायी संघर्षविराम और इजरायल-फिलिस्तीन के लिए विश्वसनीय राजनीतिक समाधान के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
बाकी दुनिया की प्रतिक्रिया
ये प्रस्ताव कई देशों में चर्चा और चिंता का विषय बना हुआ है। कुछ यूरोपीय नेता इसे लेकर काफी सशंकित हैं।
इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने सिद्धांत रूप से बोर्ड का समर्थन किया है, लेकिन अमेरिका और इजरायल के बीच कुछ मतभेद भी हैं।
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भी न्योता मिला है और वो इस पर विचार कर रहे हैं।
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बोर्ड को लेकर यूरोपीय संघ में माहौल काफी नर्वस और संशयपूर्ण है।
फिलहाल फ्रांस ने साफ तौर पर कदम पीछे खींच लिया है, जबकि कई अन्य देश अभी प्रस्ताव की बारीकी से जांच कर रहे हैं। ये पूरा मामला गाजा के भविष्य और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को लेकर बड़े सवाल खड़े कर रहा है।
















