नई दिल्ली, (हि.स.)। भारत और यूएई जल्द ही रणनीतिक रक्षा साझेदारी करने जा रहे हैं। इस संबंध में आज आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए। यूएई के राष्ट्रपति की आधिकारिक यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच अंतरिक्ष, ऊर्जा, व्यापार और एआई पर समझौते हुए हैं। दोनों देश 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना यानी 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक ले जायेंगे।
प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट पर किया स्वागत
संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान सोमवार को संक्षिप्त यात्रा पर भारत की आधिकारिक यात्रा पर यहां पहुंचे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी स्वयं एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे। एयरपोर्ट से वे दोनों नेता प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग गए। यहां दोनों के बीच वार्ता हुई। इस वार्ता में कई महत्वपूर्ण समझौते हुए।
12 बिन्दुओं पर सहमति बनी
दोनों देशों के बीच कुल 12 बिन्दुओं पर स्पष्ट सहमति बनी है। इसमें रणनीतिक रक्षा सहयोग, अंतरिक्ष उद्योग विकास और वाणिज्यिक सहयोग और गुजरात के धोलेरा में विशेष निवेश क्षेत्र का विकास पर आशय पत्र पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों देशों ने 2032 तक द्विपक्षीय व्यापार को 200 अरब अमेरिकी डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य तय किया है।
ये अहम समझौते हुए
हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) और अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी गैस के बीच बिक्री एवं खरीद समझौता हुआ है। खाद्य सुरक्षा और तकनीकी आवश्यकताओं पर समझौता ज्ञापन हुआ। भारत में एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर की स्थापना की जाएगी। भारत-यूएई के बीच द्विपक्षीय नागरिक परमाणु सहयोग को प्रोत्साहन दिया जाएगा। गुजरात की गिफ्ट सिटी में यूएई की कंपनियों—फर्स्ट अबू धाबी बैंक और डीपी वर्ल्ड—के कार्यालयों और परिचालन की स्थापना होगी।
डिजिटल-डेटा एंबेसी पर विचार
डिजिटल/डेटा एंबेसी (दूतावास) की स्थापना की संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा। अबू धाबी में ‘हाउस ऑफ इंडिया’ की स्थापना की जाएगी। यह भारतीय कला, विरासत और पुरातत्व के संग्रहालय सहित एक सांस्कृतिक केंद्र होगा। वहीं दोनों देश युवा आदान-प्रदान को बढ़ावा देंगे।
जायद की भारत यात्रा अत्यंत्र महत्वपूर्ण
विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान की भारत यात्रा को अत्यंत महत्वपूर्ण और सार्थक बताया। उन्होंने कहा कि यह यात्रा भले ही अवधि में छोटी थी, लेकिन विषयवस्तु की दृष्टि से बेहद ठोस रही। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नहयान के साथ आए प्रतिनिधिमंडल की संरचना इस यात्रा की अहमियत को दर्शाती है।
अंतरिक्ष क्षेत्र में मजबूती
उन्होंने कहा कि इस दौरान भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को लेकर एक फ्रेमवर्क समझौते की दिशा में आगे बढ़ने के लिए आशय पत्र (लेटर ऑफ इंटेंट) पर हस्ताक्षर किए गए। इसके साथ ही अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन एवं प्राधिकरण केंद्र और यूएई स्पेस एजेंसी के बीच अंतरिक्ष अवसंरचना विकास और उसके व्यावसायीकरण से जुड़े संयुक्त पहल हेतु एक और आशय पत्र पर हस्ताक्षर हुए।
प्रतिनिधिमंडल में ये रहे शामिल
विदेश सचिव ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल में अबू धाबी निवेश प्राधिकरण के प्रबंध निदेशक शेख हमद बिन जायद, यूएई के उप प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद, दुबई के क्राउन प्रिंस एवं रक्षा मंत्री शेख हमदान बिन मोहम्मद समेत कई वरिष्ठ मंत्री और अधिकारी शामिल थे।
परमाणु तकनीकी पर संभावनाएं तलाशेंगे
विदेश सचिव ने बताया कि दोनों देशों ने उन्नत परमाणु प्रौद्योगिकियों में साझेदारी की संभावनाएं तलाशने का निर्णय लिया है। इसमें बड़े परमाणु रिएक्टरों और स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टरों का विकास व तैनाती, उन्नत रिएक्टर प्रणालियों, परमाणु संयंत्रों के संचालन, रखरखाव और परमाणु सुरक्षा में सहयोग शामिल है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता को सहयोग का प्रमुख क्षेत्र माना गया है, जिसके तहत भारत में यूएई की साझेदारी से एक सुपरकंप्यूटिंग क्लस्टर स्थापित करने पर सहमति बनी है। साथ ही डेटा सेंटर क्षमता बढ़ाने में यूएई निवेश की संभावनाएं भी तलाशी जाएंगी।
ऊर्जा क्षेत्र में यूएई की भूमिका
ऊर्जा क्षेत्र में यूएई की भूमिका को रेखांकित करते हुए उन्होंने बताया कि प्रतिवर्ष 0.5 मिलियन मीट्रिक टन एलएनजी आपूर्ति के लिए दीर्घकालिक समझौता हुआ है, जिससे यूएई भारत का दूसरा सबसे बड़ा एलएनजी आपूर्तिकर्ता बन गया है। खाद्य सुरक्षा से जुड़े एमओयू से व्यापार, कृषि निर्यात और दोनों देशों की खाद्य सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।












