कर्नाटक के लक्कुंडी में प्राचीन खजाना मिला, शिवलिंग, किलेबंदी और अनमोल कलाकृतियां भी
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कर्नाटक के लक्कुंडी में प्राचीन खजाना मिला, शिवलिंग, किलेबंदी और अनमोल कलाकृतियां भी

इतिहासकारों का कहना है कि चालुक्य, होयसल और विजयनगर काल में लक्कुंडी एक प्रमुख सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र था।

Written byएजेंसीएजेंसी
Jan 19, 2026, 07:09 pm IST
inकर्नाटक
लक्कुंडी में उत्खनन के दौरान मिला शिवलिंग

लक्कुंडी में उत्खनन के दौरान मिला शिवलिंग

गदग, (हि.स.)। कर्नाटक के गदग जिले के ऐतिहासिक लक्कुंडी गांव में चल रहे उत्खनन कार्य ने इतिहास और संस्कृति के नए रहस्यों से पर्दा उठा दिया है। गांव के एक मकान की नींव खोदते समय निधि मिलने की सूचना पर बीते तीन दिनों से उत्खनन तेज़ी से जारी है। इस दौरान मंदिरों के अवशेष और बहुमूल्य प्राचीन शिल्पकृतियां सामने आई हैं, जिसने राज्यभर में उत्सुकता और कौतूहल बढ़ा दिया है।

पुरातत्व विभाग के अनुसार, कोटे वीरभद्रेश्वर मंदिर के सामने किए जा रहे उत्खनन के दौरान, पास स्थित एक निजी संस्थान के विद्यालय को जेसीबी से हटाते समय प्राचीन काल की विशाल किलेबंदी की दीवार उजागर हुई। इस दीवार के भीतर दबे पुरावशेष और शिल्पकृतियां लक्कुंडी की समृद्ध कलात्मक और सांस्कृतिक विरासत को प्रमाणित करती हैं।

इतिहासकारों का कहना है कि चालुक्य, होयसल और विजयनगर काल में लक्कुंडी एक प्रमुख सांस्कृतिक और आर्थिक केंद्र था। यहां प्राचीन सिक्कों के प्रमाण भी मिले हैं, जिससे क्षेत्र में पहले व्यापक समृद्धि होने का संकेत मिलता है। उत्खनन स्थल का निरीक्षण कर्नाटक पुरातत्व विभाग के आयुक्त ए. देवराजु, निदेशक शेजेश्वर और जिलाधिकारी सी.एन. श्रीधर ने किया।

दरअसल, लक्कुंडी में प्राचीन वस्तुओं की खोज कोई नई बात नहीं है। 91 वर्षीय तोटैया काशैया पत्रिमठ ने वर्षों से पंचनील, इंद्रनील, नीलम, मूंगा, मोती, सोना, हीरा, पन्ना और स्फटिक सिक्कों का संग्रह किया है। वर्षा ऋतु में ऐसे रत्न खोजने को उनका नियमित कार्य बताया गया है।

इसी प्रकार, हालगुंडी बसवन्ना मंदिर के समीप भूमि पर पिछले 40 वर्षों से खोज कार्य कर रहे बसप्पा बडिगेर ने मोती, मूंगा, नीलमणि, स्फटिक, श्वेत मूंगा, करिपुक्का और हरी मणि जैसी कई बहुमूल्य वस्तुएं खोजकर प्रशासन को सौंप दी हैं। हाल में प्राप्त वस्तुओं को भी वे सरकार को सौंपने की तैयारी में हैं।

लक्कुंडी का ऐतिहासिक महत्व

उत्खनन के चौथे दिन प्राचीन काल की कुल्हाड़ी के आकार का अवशेष लगभग तीन फीट की गहराई में मिला, जिसे सैकड़ों वर्ष पुराना बताया जा रहा है। पहले दिन शिवलिंग का पाणिपीठ और अगले दिन नाग आकृति युक्त शिवलिंग के अवशेष मिले। लक्कुंडी गांव चालुक्य और राष्ट्रकूट काल में लगभग 101 मंदिरों और 101 बावड़ियों के लिए प्रसिद्ध रहा है, जो इसके ऐतिहासिक महत्व को और बढ़ाता है।

पुरातत्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि चार से पांच फीट की गहराई में और भी महत्वपूर्ण अवशेष मिलने की संभावना है।

रहस्य और मान्यताएं

उल्लेखनीय है कि उत्खनन के दौरान किले की दीवार के समीप एक विशाल नाग दिखाई देने से श्रमिकों में भय का माहौल बन गया और लगभग आधे घंटे तक कार्य रोकना पड़ा। हालांकि, अमावस्या के दिन नाग के दर्शन होने से गांव में प्रचलित मान्यता को और बल मिला कि जहां निधि होती है, वहां नाग का वास होता है।

पुरातत्वविदों का मानना है कि लक्कुंडी में जारी उत्खनन कार्य कला, संस्कृति और इतिहास की समृद्ध परंपरा को दुनिया के सामने ला रहा है। आने वाले दिनों में और भी प्राचीन रहस्यों के उजागर होने की संभावना है, जो इस क्षेत्र को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से और भी महत्वपूर्ण बना देगा।

 

Topics: पुरातत्व विभागकर्नाटक खजानालक्कुंडी कहां हैगदग जिलालक्कुंडी उत्खनन
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