अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप लगातार अपने सहयोगी देशों के साथ पंगे लेते जा रहे हैं। ताजा मामला ट्रंप के द्वारा गाजा को लेकर गठित किए गए “बोर्ड ऑफ पीस” से जुड़ा है। इस पर आपत्ति जताते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि इस मामले में उनसे कोई बात नहीं की गई है और न ही ये योजना इजरायली नीति को अनुसार है।
ट्रंप प्रशासन का ऐलान क्या था?
व्हाइट हाउस ने शुक्रवार को गाजा के लिए एक “बोर्ड ऑफ पीस” के कुछ शुरुआती सदस्यों के नाम बताए। यह बोर्ड ट्रंप की अध्यक्षता में होगा और गाजा की अस्थायी (गवर्नेंस) की निगरानी करेगा। इसमें अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, बिजनेसमैन और ट्रंप के स्पेशल दूत स्टीव विटकॉफ, ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनेर जैसे नाम शामिल हैं। बोर्ड में तुर्की के विदेश मंत्री हकान फिदान का नाम भी है। इसके अलावा यूएन की मिडिल ईस्ट पीस कोऑर्डिनेटर सिग्रिड काग, एक इज़रायली-साइप्रियट अरबपति, और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक मंत्री का भी जिक्र है।
यह ऐलान ट्रंप की उस योजना का दूसरा चरण है, जो सितंबर में घोषित हुई थी। उस योजना का मकसद गाजा युद्ध खत्म करना है। इसमें गाजा में एक ट्रांजिशनल टेक्नोक्रेटिक फिलिस्तीनी प्रशासन बनाने की बात है, जिसकी देखरेख अंतरराष्ट्रीय बोर्ड करेगा।
इज़रायल की प्रतिक्रिया
शनिवार को प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के ऑफिस ने बयान जारी किया कि यह बोर्ड की संरचना इज़रायल के साथ कोऑर्डिनेट नहीं की गई और यह इज़रायल सरकार की पॉलिसी के खिलाफ है। बयान में साफ कहा गया कि यह “सरकार की पॉलिसी के विपरीत” है। इज़रायल ने बार-बार तुर्की की गाजा में किसी भी भूमिका का विरोध किया है, इसलिए संभवतः हकान फिदान का नाम इसमें मुख्य वजह है। हालांकि बयान में ठीक-ठीक क्या आपत्ति है, यह स्पष्ट नहीं किया गया। विदेश मंत्री गिदेओन सा’आर को निर्देश दिया गया है कि वे अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से इस मुद्दे पर बात करें। इज़राइल सरकार के एक प्रवक्ता ने इस पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
क्या चल रहा है पर्दे के पीछे?
अक्टूबर 2023 से चले इज़रायल-हमास युद्ध के बाद गाजा में भारी तबाही हुई है। अब एक नाजुक सीजफायर चल रहा है। ट्रंप की योजना के तहत पहले चरण में सीजफायर हुआ, और अब दूसरे चरण में गाजा का प्रशासन और पुनर्निर्माण शुरू करने की बात है। इस बोर्ड को गाजा की अस्थायी सरकार की देखरेख करनी है, और बाद में भी यह जारी रह सकता है। इज़रायल और हमास दोनों ने ट्रंप की इस योजना पर सहमति जताई थी, लेकिन अब बोर्ड के सदस्यों पर इज़रायल को एतराज है।
यह मामला अमेरिका और इज़रायल के बीच असहमति दिखाता है, जो आमतौर पर करीबी सहयोगी होते हैं। इज़रायल चाहता है कि गाजा का कोई भी भविष्य का सेटअप उसकी सुरक्षा चिंताओं से मेल खाए, खासकर तुर्की जैसे देशों की भागीदारी को लेकर।
















