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ट्रंप का बोर्ड ऑफ पीस क्या है, भारत को क्यों मिला निमंत्रण?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पीएम मोदी को गाजा में शांति और पुनर्निर्माण के लिए 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया है। 18 जनवरी 2026 को US राजदूत सर्जियो गोर ने पत्र शेयर किया। जानें बोर्ड की शर्तें, 1 बिलियन डॉलर योगदान और वैश्विक संघर्ष समाधान की योजना।

Written byकुलदीप सिंहकुलदीप सिंह
Jan 19, 2026, 08:23 am IST
inविश्व
PM Modi and Donald Trump

PM Modi and Donald Trump

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में गाजा में शांति बहाल करने के लिए एक नया अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म बनाया है, जिसे बोर्ड ऑफ पीस कहा जा रहा है। यह बोर्ड मुख्य रूप से गाजा के पोस्ट-कॉन्फ्लिक्ट दौर में काम करेगा, जहां युद्ध खत्म होने के बाद वहां की सरकार, पुनर्निर्माण, स्थिरता और मानवीय मदद जैसी चीजों को संभालने की जिम्मेदारी होगी। ट्रंप खुद इस बोर्ड की अध्यक्षता करेंगे। अब इसमें शामिल होने के लिए भारत को भी न्योता दिया गया है।

यह पहल अक्टूबर 2025 में इजरायल और हमास के बीच हुए सीजफायर समझौते के दूसरे चरण का हिस्सा है। बोर्ड का काम एक ट्रांजिशनल (अस्थायी) फिलिस्तीनी प्रशासन को सपोर्ट करना है, जो विशेषज्ञों से बनेगा। साथ ही फंडिंग, सुरक्षा और लंबे समय तक शांति बनाए रखने की योजना पर काम होगा। ट्रंप इसे शुरुआत में गाजा के लिए बना रहे हैं, लेकिन बाद में दुनिया के दूसरे संघर्षों में भी इस्तेमाल करने की बात कही गई है। इसे कुछ रिपोर्ट्स में “ग्लोबल कॉन्फ्लिक्ट रिजॉल्यूशन” का नया तरीका बताया जा रहा है।

निमंत्रण कैसे और कब मिला?

18 जनवरी 2026 को अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने सोशल मीडिया पर ट्रंप का पीएम नरेंद्र मोदी को लिखा पत्र शेयर किया। इसमें ट्रंप ने भारत को बोर्ड में शामिल होने का औपचारिक न्योता दिया। पत्र में लिखा है कि यह मध्य पूर्व में शांति मजबूत करने और ग्लोबल कॉन्फ्लिक्ट सॉल्व करने का नया अप्रोच है। भारत के अलावा पाकिस्तान, जॉर्डन, ग्रीस, साइप्रस, हंगरी जैसे कई देशों को भी निमंत्रण मिला है। कुछ देशों ने इसे स्वीकार भी कर लिया है, जैसे हंगरी और वियतनाम।

इसे भी पढ़ें: ट्रंप के टैरिफ के बाद यूरोपीय देशों ने काउंटर टैरिफ का किया एलान

भारत सरकार की तरफ से अभी कोई आधिकारिक जवाब नहीं आया है। सूत्रों के मुताबिक न्योता हाथ में है, लेकिन फैसला नहीं हुआ। भारत को इसलिए चुना गया क्योंकि उसके इजरायल और फिलिस्तीन दोनों से पुराने और अच्छे रिश्ते हैं, जो दोनों पक्षों के लिए स्वीकार्य हो सकता है।

बोर्ड में शामिल होने की शर्तें

रिपोर्ट्स के अनुसार, बोर्ड में स्थायी सदस्य बनने के लिए हर देश को 1 बिलियन डॉलर (करीब 8,300 करोड़ रुपये) का योगदान देना पड़ सकता है। यह पैसा गाजा के रिकंस्ट्रक्शन और अन्य कामों में इस्तेमाल होगा। शुरुआती सदस्यता तीन साल के लिए हो सकती है, लेकिन लंबे समय तक बने रहने के लिए यह फीस देनी होगी। ट्रंप बोर्ड के पहले चेयरमैन होंगे और सदस्य चुनने का अधिकार भी उन्हीं के पास है।

यह बोर्ड UN से अलग एक नया मैकेनिज्म है, जिसमें अमेरिका की अगुवाई में देश मिलकर काम करेंगे। कुछ जगहों पर इसे ट्रंप की बड़ी कूटनीतिक पहल बताया जा रहा है, जो गाजा के अलावा भविष्य में दूसरे इलाकों में भी शांति के लिए इस्तेमाल हो सकता है। भारत जैसे बड़े देश की मौजूदगी से बोर्ड को ज्यादा वैश्विक वैधता मिल सकती है।

Topics: गाजा शांति पहल 2026Board of Peace GazaTrump invites India GazaGaza post-conflict reconstructionUS Gaza peace boardSergio Gor tweetट्रंप बोर्ड ऑफ पीसगाजा बोर्ड ऑफ पीसभारत को ट्रंप न्योतापीएम मोदी ट्रंप पत्र
कुलदीप सिंह
कुलदीप सिंह
नागपुर स्थित राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज विद्यापीठ (नागपुर यूनिवर्सिटी) से मॉस कम्युनिकेशन में पोस्ट ग्रेजुएट। बीते एक दशक से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हूं। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर विशेष रुचि। पत्रकारिता की इस यात्रा की शुरुआत नागपुर नवभारत में इंटर्नशिप से शुरू होती है, तदोपरांत GTPL न्यूज चैनल, लोकमत समाचार, ग्रामसभा मेल, मोबाइल न्यूज 24 और Way2News हैदराबाद के बाद अब पाञ्चजन्य के साथ सफर जारी है। [Read more]
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