छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ में घर वापसी: महासमुंद के 104 लोगों ने ईसाई धर्म छोड़ सनातन धर्म अपनाया

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले सरायपाली में 15 जनवरी को 50 से अधिक परिवारों के 104 सदस्यों ने अपनी इच्छा से सनातन धर्म में घर वापसी की। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने वैदिक रीति से उनका स्वागत किया।

Published by
कुलदीप सिंह

छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले सनातन धर्म में घर वापसी का मामला प्रकाश में आया है। जहां, ईसाइयत को त्यागकर 50 परिवारों के 104 लोगों ने सनातन धर्म अपना लिया है। घर वापसी की ये घटना 15 जनवरी 2025 को सरायपाली के स्वामी सुमेधानंद वैदिक गुरुकुल में हुई। इन सभी लोगों को अच्छे भविष्य, शिक्षा और अच्छी जीवन शैली का लालच दिया था।

क्या है पूरा मामला

यह घर वापसी का आयोजन स्वामी सुमेधानंद वैदिक गुरुकुल, सरायपाली (कटंगपाली) में किया गया। यह पांच दिनों तक चलने वाले म्यूजिकल वैदिक श्रीराम कथा और विश्व कल्याण महायज्ञ के दौरान हुआ। आयोजन महर्षि दयानंद मठ धर्मार्थ ट्रस्ट और स्वामी सुमेधानंद वैदिक गुरुकुल के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। जगह मां रूद्रेश्वरी की पावन धरा के रूप में जानी जाती है। इसके तहत 50 से ज्यादा परिवारों के कुल 104 सदस्यों ने हिस्सा लिया। इन सभी लोगों को ईसाई बनाया गया था, लेकिन अब इन सभी अपनी इच्छा से सनातन धर्म में वापस आए।

प्रबल प्रताप जूदेव ने लोगों के पांव पखारे

छत्तीसगढ़ भाजपा के उपाध्यक्ष और अखिल भारतीय घर वापसी प्रमुख प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने इन लोगों का स्वागत किया। उन्होंने पारंपरिक तरीके से इनके पैर धोए और वैदिक मंत्रों के साथ उन्हें सनातन धर्म में शामिल किया। प्रबल प्रताप सिंह जूदेव अपने पिता स्वर्गीय कुमार दिलीप सिंह जूदेव की शुरू की गई घर वापसी मुहिम को आगे बढ़ा रहे हैं।

क्या कहा गया

प्रबल प्रताप सिंह जूदेव ने एक्स (ट्विटर) पर इसकी जानकारी साझा करते हुए लिखा कि छत्तीसगढ़ को कभी बंगाल नहीं बनने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मां रूद्रेश्वरी की पावन धरा पर कई धर्मांतरित परिवारों के 104 लोगों के पैर पखारकर उन्हें सनातन धर्म में घर वापसी कराने का सौभाग्य मिला।

उन्होंने आगे कहा कि धर्मांतरण के षड्यंत्र से पूरे भारत की जनसांख्यिकी बदल रही है। भारत के 800 जिलों में से 200 में हिंदू अल्पसंख्यक हो चुके हैं। यह राष्ट्रीय सुरक्षा का गंभीर मुद्दा है। देश से बड़ा कुछ नहीं, देश सुरक्षित रहना चाहिए। धर्मांतरण राष्ट्र के लिए सबसे बड़ा खतरा है। हिंदुओं की जनसांख्यिकी में बदलाव देश के लिए संकट है।

उन्होंने यह भी कहा कि वे जीवन भर अपने पिता द्वारा शुरू किए गए राष्ट्र-निर्माण के घर वापसी अभियान को जारी रखने के लिए दृढ़ हैं। यह पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ, जहां वैदिक परंपराओं के अनुसार लोगों को फिर से हिंदू धर्म में शामिल किया गया।

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