दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट के मामले की जांच मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच आगे बढ़ा दी है। एजेंसी ने जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ दायर चार्जशीट में कहा है कि रेड फोर्ट सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर नबी उसके दो साथी, डॉ. मुज़म्मिल और डॉ. शाहीन, मेडिकल कॉलेज के कई फैकल्टी और स्टाफ में शामिल थे, जिन्हें यूनिवर्सिटी के चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी की सीधी मंजूरी से बिना किसी पुलिस वेरिफिकेशन या जांच के नियुक्त किया गया था।
क्या है पूरा मामला
मामला कुछ यूं है कि 10 नवंबर 2025 को दिल्ली में लाल किले के पास एक सुसाइड कार ब्लास्ट हुआ था, जिसमें डॉ. उमर नबी ने खुद को उड़ा लिया था। यह ब्लास्ट काफी बड़ा था और कई लोगों की जान गई। जांच में पता चला कि उमर नबी अल-फलाह यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर (जनरल मेडिसिन) था। वह मई 2024 से वहां काम कर रहा था।
उसके दो साथी डॉक्टर भी इसी यूनिवर्सिटी से जुड़े थे, जिनकी पहचान डॉ. मुजम्मिल: जनरल मेडिसिन में जूनियर रेजिडेंट, अक्टूबर 2021 से काम कर रहा था और डॉ. शाहीन शाहिद के तौर पर हुई थी। इन तीनों की भर्ती यूनिवर्सिटी के चांसलर जावेद अहमद सिद्दीकी की सीधी मंजूरी से हुई। ED का कहना है कि इनकी कोई पुलिस वेरिफिकेशन नहीं हुई, ना ही किसी तरह की जांच कि उनका कोई गलत बैकग्राउंड तो नहीं।
भर्ती में गड़बड़ियां
ED ने चार्जशीट में लिखा है कि अल-फलाह के मेडिकल कॉलेज में कई गलत तरीके चलते थे। जैसे:
- “डॉक्टर्स ऑन पेपर” – मतलब कागजों पर डॉक्टर दिखाए जाते थे, लेकिन असल में काम नहीं करते।
- “22-डे पंच डॉक्टर्स” – नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की इंस्पेक्शन से ठीक पहले डॉक्टर, स्टाफ और यहां तक कि मरीजों को जमा कर लिया जाता था, ताकि दिखावा हो कि सब ठीक है।
कुछ फैकल्टी मेंबर्स, खासकर कश्मीर से आए, उनकी कोई जांच नहीं हुई कि कहीं वे किसी आतंकी संगठन से जुड़े तो नहीं।
ED की बड़ी कार्रवाई
ED ने यूनिवर्सिटी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग का केस चलाया। 18 जनवरी 2026 को अपडेट हुई खबर के मुताबिक, ED ने यूनिवर्सिटी की 54 एकड़ जमीन और उस पर बने सभी बिल्डिंग्स अटैच कर दिए हैं। इसमें मेडिकल कॉलेज, हॉस्टल, स्कूल और दूसरे विभाग शामिल हैं। ED का अनुमान है कि इसकी वैल्यू करीब 140 करोड़ रुपये है। यूनिवर्सिटी से पिछले सालों में जो 450 करोड़ रुपये की इनकम हुई, उसे ED ने “प्रोसीड्स ऑफ क्राइम” बताया है। यानी यह पैसा गलत तरीके से कमाया गया माना जा रहा है।
कौन है मुख्य आरोपी
केंद्रीय एजेंसी ने मामले में अल फलाह विश्वविद्यालय के चांसलर और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के प्रमुख जावेद अहमद सिद्दीकी को मुख्य आरोपी बनाया है। उसे ब्लास्ट के एक हफ्ते बाद 18 नवंबर 2025 को गिरफ्तार किया गया था। वह अभी ज्यूडिशियल कस्टडी में हैं। ED का आरोप है कि उसने यूनिवर्सिटी और ट्रस्ट पर पूरा कंट्रोल रखा और गलत तरीके से पैसे का फायदा उठाया।















