निपाह वायरस आखिर क्यों इतना ज्यादा खतरनाक है? क्योंकि इसकी मौत की दर काफी ऊंची होती है। डॉक्टर ने बताया है कि ये वायरस फ्रूट बैट्स (चमगादड़) से आता है और इंसानों में फैल सकता है। हाल ही में वेस्ट बेंगाल में दो नर्सों में निपाह वायरस मिला है, जिससे फिर से सबकी चिंता बढ़ गई है।
केरल में सामने आया था पहला केस
भारत में पहली बड़ी डरावनी घटना 2018 में केरल के कोझिकोड में हुई थी। तब कुछ केस आए थे और पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। लोग डर गए क्योंकि शुरुआत में ये बिल्कुल सामान्य वायरल बुखार जैसा लगता है, लेकिन जल्दी ही हालत गंभीर हो जाती है। अस्पतालों को मरीजों को अलग रखना पड़ा, संपर्क में आए लोगों की लिस्ट बनानी पड़ी, क्वारंटाइन सख्त कर दिया गया। यात्रा पर भी रोक लगी। काफी कन्फ्यूजन था क्योंकि इतने कम समय में सबको समझ नहीं आया कि क्या हो रहा है।
निपाह भारत में बहुत कम होता है, इसलिए लोग रोज-रोज इसकी बात नहीं करते। इसी वजह से शुरुआत में पहचान मुश्किल हो जाती है। लक्षण पहले हल्के होते हैं – हल्का बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द – और लोग सोचते हैं कि बस सर्दी-जुकाम है। लेकिन जब दिमाग में सूजन (एन्सेफलाइटिस) या सांस लेने में दिक्कत शुरू होती है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है।
निपाह क्यों है डेडली वायरस?
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, निपाह वायरस की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये तेजी से बढ़ता है और मौत की दर बहुत ज्यादा होती है। ये ब्रेन में गंभीर सूजन पैदा कर सकता है। ज्यादातर वायरल बीमारियों से अलग, ये संक्रमित इंसान या जानवर के बहुत करीब आने से फैलता है, न कि सिर्फ छुए हुए सामान से। अभी तक कोई खास एंटीवायरल दवा नहीं है। लक्षण एक बार गंभीर होने लगें तो इलाज के लिए बहुत कम समय बचता है।
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वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) के मुताबिक, निपाह में मौत की दर 40% से 75% तक हो सकती है। भले ही एशिया में इसके बहुत कम आउटब्रेक हुए हों, लेकिन ये कई जानवरों को संक्रमित करता है और इंसानों में गंभीर बीमारी व मौत का कारण बनता है। इसलिए ये पब्लिक हेल्थ के लिए बड़ा खतरा है। शुरुआती लक्षण अक्सर नजरअंदाज हो जाते हैं। डॉ. संतोष ने कहा कि पहले हल्का बुखार, सिरदर्द या बदन दर्द होता है, जो आम वायरल फीवर जैसा लगता है। लोग घर पर ही दवा खा लेते हैं, ओवर-द-काउंटर दवाओं से ठीक करने की कोशिश करते हैं। इससे वायरस की पहचान में देरी हो जाती है और तब तक न्यूरोलॉजिकल लक्षण आ जाते हैं।
एक्सपोजर से लेकर लक्षण गंभीर होने तक का समय 5 से 14 दिन का होता है। शुरू में बुखार, सिरदर्द, थकान। कुछ दिनों बाद कन्फ्यूजन, दौरा पड़ना, सांस लेने में तकलीफ शुरू हो सकती है। डॉक्टर का कहना है कि शुरुआती बुखार के समय ही तेजी से अलग-थलग करना, टेस्टिंग और सपोर्टिव केयर बहुत जरूरी है। इससे फैलने की रफ्तार कम होती है और मरीज की हालत सुधारने की संभावना बढ़ जाती है।
















