भारत का पड़ोसी देश पाकिस्तान 16 हिस्सों में बंटना चाहिए। उसकी आर्थिक हालत एकदम पतली हो चुकी है औऱ सियासी संकट गहराता जा रहा है। लोग महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी से परेशान हैं। ऐसे में एक नई बहस तेज हो गई है – देश को मौजूदा चार बड़े प्रांतों की बजाय छोटे-छोटे प्रांतों में बांटने की। ये मांग जिन्ना के ही देश के एक केंद्रीय मंत्री अब्दुल अलीम खान ने की है।
क्या है पूरा मामला
दरअसल, पाकिस्तान के केंद्रीय मंत्री और IPP अध्यक्ष अब्दुल अलीम खान ने हाल ही में खुलकर कहा है कि पाकिस्तान को चार प्रांतों में नहीं, बल्कि 16 प्रांतों में बांट देना चाहिए। उनकी पार्टी इस्तेहकाम पाकिस्तान पार्टी (IPP) ने इसके लिए एक आंदोलन भी शुरू कर दिया है। उनका कहना है कि यह काम सिर्फ उनकी पार्टी अकेले नहीं कर सकती, बल्कि सभी राजनीतिक दल मिलकर इसे आगे बढ़ाएं।
क्यों मांग हो रही है छोटे प्रांतों की?
अब्दुल अलीम खान का मानना है कि बड़े प्रांत होने की वजह से दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले लोगों तक सरकार की सेवाएं ठीक से नहीं पहुंच पातीं। लोग अपनी छोटी-मोटी समस्याओं के लिए भी लंबी दूरी तय करके प्रांतीय राजधानी जाते हैं, जिसमें समय और पैसा दोनों बर्बाद होता है। छोटे प्रांत बनने से हर इलाके में अपना अलग प्रशासन होगा, जिससे समस्याओं का समाधान जल्दी और नजदीक से हो सकेगा। उन्होंने कहा, “लोगों का समय और ऊर्जा बचेगी, और उनकी परेशानियां उनके घर के पास ही हल होंगी।” साथ ही आर्थिक फायदे भी होंगे – छोटे प्रांतों को अपना बजट का हिस्सा बेहतर तरीके से मिलेगा, और विकास के कार्यों में तेजी आएगी।
कैसे बांटने का प्रस्ताव है?
अलीम खान का कहना है कि प्रांतों के नाम नहीं बदलेंगे, लेकिन मौजूदा चारों प्रांतों को बांटा जाएगा। पंजाब को चार हिस्सों में: उत्तर पंजाब, दक्षिण पंजाब, पूर्व पंजाब और पश्चिम पंजाब। इसके अलावा सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा को भी इसी तरह चार-चार हिस्सों में बांटा जाए वो भी नए नामों के साथ। इस तरह कुल मिलाकर 16 प्रांत बन जाएंगे। उन्होंने MQM जैसे दलों के समर्थन की सराहना भी की, जो पहले से कराची को अलग प्रांत बनाने की बात करते आए हैं।
लंबे समय से उठती रही हैं ये मांगे
गौरतलब है कि इस तरह की मांगें कोई नई बात नहीं हैं। 2023 में सीनेट के उपसभापति मिर्जा मोहम्मद अफरीदी ने भी कहा था कि बलूचिस्तान इतना विशाल है कि इसमें तीन प्रांत बनने चाहिए। पंजाब में भी तीन, कराची अलग, FATA अलग और हजारा इलाके के लिए अलग प्रांत की मांग की थी। कुल मिलाकर नौ प्रांतों का विचार था। लेकिन अब अलीम खान ने इसे और बढ़ाकर 16 तक पहुंचा दिया है।
मौजूदा हालात में क्यों जरूरी है ये मांग?
पाकिस्तान आर्थिक रूप से मुश्किल दौर से गुजर रहा है। देश दिवालिया होने की कगार पर पहुंच चुका है। बलूचिस्तान, सिंध और खैबर पख्तूनख्वा में लगातार विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। बलूचिस्तान में तो अलगाववाद की मांग दशकों से चली आ रही है, जहां लोग पाकिस्तान से अलग होने की बात करते हैं। राजनीतिक अस्थिरता भी कम नहीं है। ऐसे में छोटे प्रांत बनाने से बेहतर प्रशासन, संसाधनों का सही बंटवारा और लोगों की शिकायतों का जल्दी निपटारा हो सकता है – ये उनका मुख्य तर्क है। अभी तक ये सिर्फ मांग और बहस का स्तर पर है। कई दल समर्थन दे रहे हैं, लेकिन बड़े बदलाव के लिए संवैधानिक संशोधन और सभी प्रांतों की सहमति चाहिए।

















