चमोली: जिले में सिखों के तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब तीर्थ यात्रा भारत की सबसे कठिन यात्राओं में से एक मानी जाती है। यह पावन गुरुद्वारा समुद्र तल से लगभग 15,000 फुट की ऊँचाई पर स्थित है और केवल पैदल यात्रा के माध्यम से ही पहुँचा जा सकता है। कठिन रास्तों और बर्फीले पहाड़ों के बावजूद श्रद्धालु पूरी निष्ठा और भक्ति के साथ इस पवित्र स्थल के दर्शन करते हैं।
हेमकुंड का है विशेष महत्व
सिख धर्म में श्रीहेमकुंड साहिब का विशेष महत्व है क्योंकि श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने यहाँ अपनी पिछले जन्म में कठिन तपस्या की थी। हिंदू धर्म में भी इसका महत्व कम नहीं है, कहा जाता है कि रामायण काल में लक्ष्मण जी ने इसी स्थान पर ध्यान किया था और उनका एक मंदिर भी यहाँ स्थित है। श्री हेमकुंड साहिब दो सदियों तक दुनिया की नजरों से दूर रहा। इसकी खोज और पहचान श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की आत्मकथा ‘बिचित्र नाटक’ के माध्यम से हुई। पंडित तारा सिंह नरोत्तम को इसे भौगोलिक रूप से पहचानने वाला पहला सिख माना जाता है। हेमकुंड शब्द संस्कृत का है, जहाँ ‘हेम’ का अर्थ बर्फ और ‘कुंड’ का अर्थ कटोरा है। यहाँ की झील बर्फ से घिरे कटोरे जैसी है और इसे लोकपाल (लोगों का पालनहार) कहा जाता है।यही पास में लोकपाल लक्ष्मण मंदिर भी है।
प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुद संगम
श्री हेमकुंड साहिब केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि साहस, भक्ति और प्राकृतिक सौंदर्य का अद्भुत संगम है। कठिन यात्रा के बाद यहाँ पहुँचने वाले श्रद्धालु आध्यात्मिक शांति और ऊर्जा का अनुभव करते हैं। यह स्थान न केवल इतिहास और धर्म का प्रतीक है, बल्कि हर भक्त के जीवन में आध्यात्मिक अनुभव और विश्वास को मजबूत करने वाला अनुभव भी प्रदान करता है। पास में ही दुनिया के प्राकृतिक अजूबों में से एक फूलों की घाटी भी यहीं पास में है।
पीएम मोदी बनवा रहे हैं रोपवे
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गोविंद घाट से श्री हेमकुंड साहिब तक रोपवे बनाए जाने के प्रोजेक्ट को स्वयं मंजूरी दी है। उनका मानना है कि उक्त प्रोजेक्ट के बन जाने से हजारों नहीं लाखों श्रद्धालुओं के पवित्र गुरु द्वारे तक पहुंच आसान हो जाएगी। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी कहते हैं कि श्री हेमकुंड साहिब उत्तराखंड का पांचवां धाम है, जहां हर साल देश दुनिया से हजारों श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं। रोपवे बनाने की प्रकिया शुरू हो चुकी है। केंद्रीय राष्ट्रीय राज मार्ग अथार्टी इस पर वर्क आउट कर रही है और राज्य सरकार भी इसमें सहयोग कर रही है।

















