गोविंद घाट (चमोली): भारतीय सेना की 418 इंडिपेंडेंट फील्ड कंपनी (9 माउंटेन ब्रिगेड) की टीम और गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन ट्रस्ट के सेवादार आज श्री हेमकुंट साहिब गुरुद्वारा द्वार तक पहुंच गए हैं। संयुक्त टीम ने गुरुद्वारा के द्वार गुरु से अरदास के पश्चात खोल दिए। जिससे अब टीम यहीं पर रहकर कार्य कर सकेगी। इससे पहले उन्हें हर शाम घांघरिया वापस लौटना पड़ता था।
टीम अब हेमकुंट साहिब से अटलकोटी ग्लेशियर प्वाइंट तक नीचे की ओर ट्रैक को चौड़ा करने का कार्य करेगी, ताकि तीर्थयात्रियों के लिए मार्ग और अधिक सुगम व सुरक्षित हो सके। कई दशकों से भारतीय सेना हिमालय की कठिन भौगोलिक स्थिति में इस गौरवपूर्ण और निःस्वार्थ सेवा का कार्य प्रतिवर्ष कर रही है, ताकि हेमकुंट साहिब यात्रा सुरक्षित और सफल हो सके।
गुरुद्वारा श्री हेमकुंड साहिब प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष स. नरेंद्र जीत सिंह बिंद्रा ने भारतीय सेना तथा सभी सेवादारों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया है। श्री हेमकुंट साहिब गढ़वाल हिमालय में लगभग 4,632 मीटर (15,200 फीट) की ऊंचाई पर स्थित एक अत्यंत पवित्र सिख तीर्थस्थल है, जो बर्फ से ढंके पर्वत शिखरों और स्वच्छ झील से घिरा हुआ है। मान्यता ये है कि दशम गुरु गोबिंद सिंह ने पूर्व जन्म में यहां तपस्या की थी और उन्होंने इसका उल्लेख स्वयं रचित पुस्तकों में किया था। जिसकी वजह से हिंदू सिख श्रद्धालु हजारों की संख्या में हर साल आस्था के इस पावन तीर्थ पर अपना शीश झुकाने आते हैं।
इस साल 23 मई को श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारे के द्वार और इसके ठीक बराबर में श्री लक्ष्मण मंदिर के द्वार तीर्थ यात्रियों के लिए खोले जायेंगे। यहां दर्शनों का क्रम करीब चार माह तक चलता है। श्रद्धालुओं को करीब 21 किमी की कठिन चढ़ाई चढ़ कर यहां पहुंचना होता है। गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी दोपहर 1 बजे के आसपास श्रद्धालुओं को कम ऑक्सीजन की वजह से दर्शन उपरांत घांघरिया वापिस भेज देती है। गोविंदघाट से गुरुद्वारे तक इस साल रोपवे प्रोजेक्ट पर भी काम शुरू हो रहा है। जिसकी घोषणा पीएम नरेंद्र मोदी ने की थी, इस प्रोजेक्ट के टेंडर हो चुके हैं।












