क्या ब्रिटेन इस्लामिस्ट ताकतों के कब्जे में पूरी तरह आ चुका है और पुलिस ने सड़कों पर इस्लामिस्ट तत्वों का विरोध करना बंद कर दिया है? ऐसा वैसे तो आप लोग कहते ही रहते हैं, परंतु अब ब्रिटेन के शैडो जस्टिस सेक्रेटरी रॉबर्ट जेनेरिक ने भी यही कहा है। उन्होंने कहा है कि सड़क पर पुलिस ने इस्लामिस्ट तत्वों से हार मान ली है।
रॉबर्ट जेनेरिक ने एक्स पर अपनी पोस्ट में लिखा है। उन्होंने पोस्ट में लिखा है कि वैश्विक धोखों के समय में सच कहना एक क्रांतिकारी कार्य हो सकता है। उन्होंने यह बात मिडलैंड्स पुलिस द्वारा उठाए गए उस कदम के बाद की है, जिसमें पुलिस ने यहूदी समुदाय के लोगों को बर्मिंघम में एक फुटबॉल मैच में आने से मना कर दिया था, क्योंकि पुलिस को लगता था कि इससे स्थानीय सशस्त्र इस्लामिस्ट गुस्सा हो जाएंगे। और फिर वे लिखते हैं कि पुलिस ने लोगों ने झूठ बोला और यहूदी प्रशंसकों पर आरोप लगाए।
वे अपनी पोस्ट में आगे लिखते हैं कि वेस्ट मिडलैंड्स पुलिस के मुख्य कांस्टेबल क्रैग गिलफोर्ड को होम अफेयर्स की सिलेक्ट कमिटी के सामने प्रस्तुत हुए और सबूतों के आधार पर उनके झूठ को पकड़े हुए एक हफ्ते से ज्यादा हो गया है, मगर अभी तक उसे न ही निकाला गया है और न ही उसने इस्तीफा दिया है। उसके बाद वे लिखते हैं कि क्या यह पुलिस का धोखा नहीं है कि उन्हें ऐसा नहीं लगता कि जनता को सच का पता लग जाएगा? ब्रिटेन में विपक्ष लगातार ही कीर स्टार्मर की सरकार पर इस्लामिस्ट तत्वों के सामने घुटने टेकने की शिकायत करता आ रहा है। हालांकि सूची बहुत लंबी है, परंतु ग्रूमिंग गैंग्स और यहूदियों के साथ हो रही हिंसक घटनाएं इसमें प्रमुख हैं।
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मेयर सादिक खान ने लंदन को बना दिया इस्लामिक
लोग लंदन के मेयर सादिक खान पर भी यह आरोप लगाते हैं कि सादिक खान ने लंदन को पूरी तरह से इस्लामिक बना दिया है और वहाँ पर श्वेत लोगों की आवाज नहीं सुनी जाती है। इन्हीं सब बातों को आगे बढ़ाते हुए रॉबर्ट जेनेरिक लिखते हैं कि सच्चाई तो यह है कि पुलिस ब्रिटेन के कुछ भागों में अपनी उपस्थिति को दर्ज ही नहीं करा सकती है और उसे यह भ्रम बनाए रखने के लिए झूठ बोलना पड़ता है कि उसका अभी भी अधिकार है। रॉबर्ट अपनी पोस्ट में ब्रिटेन की पुलिस के डर को आगे लिखते हैं कि “उन्हें विश्वास है कि यदि वे कानून लागू करने की कोशिश करेंगे तो उन्हें शर्मिंदा होना पड़ेगा। वे ऐसा करने की सोच भी नहीं सकते हैं। या फिर उन्हें ऐसा विश्वास है कि उन्हें ऐसा करना ही नहीं चाहिए, क्योंकि उनकी कमजोरी छिप जाएगी, और उन्हें कानून लागू करने में अपनी विफलता को बताना ही नहीं चाहिए।“
पुलिस ने इस्लामिक ताकतों के सामने टेके घुटने
वे कई उदाहरण देते हैं जिनमें पुलिस ने इस्लामिस्ट ताकतों के सामने घुटने टेक दिए। वे लंदन में 7 अक्टूबर के बाद हुई कई घटनाओं का हवाला देते हैं। वे लिखते हैं कि नफरती जुलूस को रोकने के लिए पुलिस ने कुछ नहीं किया। पुलिस ने सच को स्वीकार नहीं किया और यह छिपाया कि इस्लामिस्ट ताकतों के सामने वे कितने मजबूर हैं। हर बार पुलिस “सामुदायिक संबंधों” को बनाए रखने के नाम पर झुक गई। और वर्ष 2024 में बर्मिंघम में जिस प्रकार से ऐसी घटनाओं के सामने झुककर पुलिस ने कहा कि “समुदाय को अपने आप ही पुलिसिंग करने दी जाए” बहुत शर्मिंदा करने वाला है।
टेलीग्राफ में अपने कॉलम में वे अपना ही एक किस्सा बताते हैं। वे लिखते हैं कि जब वे वर्ष 2023 में होम ऑफिसर मंत्री थे तो एक ऑटिस्टिक बच्चे ने अपने स्कूल के प्ले ग्राउंड में कुरान की एक प्रति के साथ कुछ कर दिया था। तो लड़के की माँ और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को समुदाय के सामने बैठना पड़ा था और उन्हें शांत करवाना पड़ा था, और यह कहना पड़ा था कि बच्चे को कडा सबक सिखा दिया है।
यह इसलिए किया गया था क्योंकि पुलिस को उस बच्चे की रक्षा के लिए यह जरूरी लगा था कि इस्लामिस्ट तत्वों के सामने माफी मांग ली जाए। फिर वे लिखते हैं कि “पुलिस के डर को समझा जा सकता है।” और वे ये भी लिखते हैं कि कट्टर इस्लामिस्ट तत्व चुनावों पर यह भी खुलेआम कहते हैं कि इस्लामिस्ट तत्व ही चुनाव में जीतेंगे। मीडिया समस्या को पहचानती ही नहीं है।
मीडिया की भूमिका संदिग्ध
वे मीडिया की भूमिका पर भी प्रश्न उठाते हैं। वे लिखते हैं कि “और मीडिया? इसमें से ज़्यादातर इस समस्या को मानने से ही इनकार करता है। इस हफ़्ते BBC का सेलेक्ट कमेटी की सुनवाई पर आर्टिकल देखें, जिसमें इस्लामवाद का ज़िक्र करने से पूरी तरह बचा गया और आम पाठक को पता ही नहीं चलेगा कि क्या हो रहा था।“
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सीमित संसाधन हैं
वे लिखते हैं कि ब्रिटेन के पास इस समस्या से निबटने के लिए सीमित संसाधन हैं और यह स्पष्ट होता जा रहा है कि राज्य के पास कोई भी आवरण नहीं है। इस्लामिज़्म नीट चुका है और सदियों से जो उदार, लोकतान्त्रिक मूल्य जो हमारे देश का आधार थे, वे हार चुके हैं।
वे अंत में लिखते हैं कि “इस्लामिस्ट ताकतों के प्रति लड़ाई हमारी आगामी पीढ़ियों के लिए है। यह हमारे देश की आत्मा के लिए युद्ध है!”

















