जम्मू-कश्मीर में अब नार्को-टेररिज्म (ड्रग्स आतंकवाद) का खेल और भी खतरनाक हो गया है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई अब महिलाओं को आगे करके नशीले पदार्थों और हथियारों की तस्करी कराई जा रही है। ये महिलाएं दिखने में बिल्कुल आम लगती हैं, लेकिन इनके इरादे बहुत खतरनाक हैं। पहले जहां ज्यादातर पुरुष ही इस काम में लगे थे, अब आईएसआई महिलाओं को ‘मोहरा’ बनाकर पूरे नेटवर्क को चला रही है।
महिलाओं की बढ़ती भूमिका
पिछले दो सालों में सुरक्षा एजेंसियों ने देखा है कि नार्को-टेरर मॉड्यूल में महिलाओं की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ रही है। कई बार तो एक महिला ने दूसरी महिलाओं को जोड़ा और पूरा नेटवर्क खड़ा कर दिया। ये महिलाएं न सिर्फ नशीले पदार्थों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाती हैं, बल्कि कई मामलों में खुद ही नेटवर्क को संभाल रही हैं। ये सीधे सीमा पार अपने हैंडलरों से संपर्क में रहती हैं। सुरक्षा वाले बताते हैं कि तस्कर और आईएसआई वाले लगातार अपने तरीके बदलते रहते हैं। अब महिलाओं को आगे करके नशे का धंधा चलाया जा रहा है, ताकि जांच में कम शक हो।
कुछ ताजा उदाहरण
श्रीनगर में हाल ही में पुलिस ने तमन्ना अशरफ नाम की एक युवती को पकड़ा। ये कूरियर के जरिए देश के कई शहरों में नशीले पदार्थ भेजने का पूरा नेटवर्क चला रही थी। इससे पहले कुपवाड़ा जिले में, जो नियंत्रण रेखा से सटा हुआ है, सुरक्षाबलों ने मुनीबा बेगम (बांडीपोरा की रहने वाली) को उसके एक साथी के साथ गिरफ्तार किया। इनके पास से बड़ी मात्रा में हेरोइन बरामद हुई, जो गुलाम कश्मीर से आई थी। अक्टूबर 2025 में ही शोपियां में दो महिला तस्करों को चरस और गांजे की बड़ी खेप के साथ पकड़ा गया था। जम्मू, सांबा और कठुआ जिलों में भी रोजाना ऐसी महिलाएं पकड़ी जा रही हैं, जिन पर सुरक्षा एजेंसियां पहले से नजर रख रही हैं।
आंकड़े क्या कहते हैं
साल 2025 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट (नशीले पदार्थों से जुड़ा कानून) के तहत करीब 1100 मामले दर्ज किए। इनमें लगभग 1400 लोगों की गिरफ्तारी हुई। सिर्फ जम्मू जिले में ही 204 एफआईआर दर्ज हुईं, जिसमें कुल 311 आरोपियों में से 35 महिलाएं थीं। यानी महिलाओं की संख्या अब पहले से काफी ज्यादा हो गई है।
इसे भी पढ़ें: उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड: दिल्ली में सीजन का सबसे कम 4.2°C तापमान, पंजाब-हरियाणा में पारा 1 डिग्री के करीब
सुरक्षा एजेंसियों की तैयारी
जम्मू-कश्मीर पुलिस की एंटी-नारकोटिक्स फोर्स, बीएसएफ, सीआरपीएफ और असम राइफल्स जैसी तमाम एजेंसियां अब खास तौर पर संवेदनशील इलाकों में अपनी महिला जवान तैनात कर रही हैं। इससे तस्करों पर नजर रखना और चेकिंग करना आसान हो रहा है। रक्षा मामलों के जानकार और जम्मू-कश्मीर पुलिस के पूर्व आईजी अशकूर वानी कहते हैं कि महिलाओं का इस्तेमाल कोई नई बात नहीं है, लेकिन ये बहुत खतरनाक है।
ये महिलाएं आसानी से युवाओं को अपने नेटवर्क में शामिल कर लेती हैं। इसलिए इस पूरी साजिश पर कड़ी नजर रखनी होगी और तुरंत कार्रवाई करनी होगी। ये नई रणनीति आईएसआई की तरफ से एक बड़ा बदलाव दिखाती है, जो सुरक्षा बलों के लिए चुनौती बढ़ा रही है।













