आखिर Iran पर CIA Report पढ़कर क्यों नरम पड़े Trump के तीखे तेवर, सत्ता विरोधी प्रदर्शनों में कितनी ताकत!
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आखिर Iran पर CIA Report पढ़कर क्यों नरम पड़े Trump के तीखे तेवर, सत्ता विरोधी प्रदर्शनों में कितनी ताकत!

ईरान के प्रदर्शन हिंसक हो चले हैं। शिराज, कराज में आगजनी हुई है, पुलिस की चौकियों पर हमले हुए हैं। पुलिस फायरिंग से लगभग 350 मौतें हुई हैं, सैकड़ों गिरफ्तार किए गए हैं

Written byAlok GoswamiAlok Goswami
Jan 10, 2026, 12:17 pm IST
in विश्व, विश्लेषण
सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ आक्रोश साफ दिखता है

सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ आक्रोश साफ दिखता है

ईरान में पिछले अनेक दिन से चल रहे सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में अब तक सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई से लगभग 60 लोग मारे जा चुके हैं। कल भी वहां कई शहरों में लोग सड़कों पर उतरे, नारेबाजी की गई और कुछ सरकारी इमारतों को आग लगाई गई। इसके बाद पुलिस की सख्ती और बढ़ गई है। इस पूरे प्रकरण पर अमेरिकी की प्रमुख खुफिया एजेंसी सेंट्रल इंटेलिजेंस एजेंसी या सीआईए पैनी नजर रखे हुए है। अभी उसकी एक रिपोर्ट सामने आई है जिसमें इन प्रदर्शनों की प्रकृति को सामने रखा है। रिपोर्ट कहती है कि ये प्रदर्शन अयातुल्लाह अली खामेनेई की सत्ता को उखाड़ फेंकने की ताकत नहीं रखते हैं। मोटे तौर पर इस आकलन के सामने आने पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ईरान के संदर्भ में रणनीति में बदलाव के संकेत उभरे हैं। यह सही है कि उनके बयान अभी भी कड़ी चेतावनी जैसे बने हुए हैं। सीआईए की यह रिपोर्ट ईरान की आंतरिक अस्थिरता पर एक विहंगम नजर डालती नजर आती है।

पहले ट्रंप प्रदर्शनों को सत्ता बदलाव के अवसर के तौर पर देखते थे, लेकिन इस रिपोर्ट ने उनकी रणनीति बदली है

क्या मुख्य बिन्दु हैं सीआईए रिपोर्ट के
अमेरिकी खुफिया एजेंसी की हाल ही में आई रिपोर्ट साफ बताती है कि शिया बहुल ईरान में महंगाई, बेरोजगारी और सरकारी सख्ती के खिलाफ प्रचंड प्रदर्शन चल रहे हैं, लेकिन इनमें उतनी ताकत नहीं दिखती कि तख्तापलट में बदल जाएं। रिपोर्ट कहती है कि विरोध प्रदर्शन भले ही 100 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक हुए हैं और अब हिंसक हो चुके हैं, लेकिन इनमें ऐसी किसी संगठित ताकत की कमी है जो सुप्रीम लीडर खामेनेई की सरकार को हटा दे। ईरान के 31 राज्यों में लाखों लोग सड़कों पर हैं, कराज शहर में तो सिटी हॉल को जलाया गया है, 60 से अधिक मौतें हो चुकी हैं, फिर भी प्रदर्शनकारियों में एकजुट नेतृत्व या सेना की ओर से किसी समर्थन की कमी दिखाई देती है।

रिपोर्ट ईरान के आर्थिक संकट पर भी विश्लेषण सामने रखती है। इसके अनुसार, महंगाई ने आम जनता को गुस्सा दिलाया हुआ है, लेकिन इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर और सेना का सख्त नियंत्रण प्रदर्शनों को दबाने में सक्षम है। सीआईए ने मोसाद के साथ मिलकर इन प्रदर्शनों की निगरानी की है और ईरान ने 10 से अधिक अमेरिकी-इस्राएली एजेंटों की गिरफ्तारी का दावा किया है। खामेनेई इन प्रदर्शनों को अमेरिका-इस्राएल की साजिश बताता है। कुल मिलाकर, रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि मौज्ूदा अशांति वहां सत्ता में बदल करने की बजाय दबाव बनाने तक सीमित रहने वाली है।

शिराज, कराज में आगजनी हुई है, पुलिस की चौकियों पर हमले हुए हैं

ट्रंप के तेवर बदले
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अभी 8 जनवरी 2026 को रेडियो होस्ट ह्यू हेविट के इंटरव्यू में ईरान को चेतावनी तो दी थी, लेकिन सीआईए रिपोर्ट सामने आने के बाद उनका लहजा अपेक्षाकृत नरम दिख रहा है। उन्होंने कहा, “अगर वे लोगों को मारना शुरू कर देंगे, तो हम उन्हें कड़ी सजा देंगे।” लेकिन उसमें उन्होंने सीधे सैन्य हस्तक्षेप या तख्तापलट समर्थन का जिक्र नहीं किया था। पहले ट्रंप प्रदर्शनों को सत्ता बदलाव के अवसर के तौर पर देखते थे, लेकिन इस रिपोर्ट ने उनकी रणनीति बदली है—अब उनका ध्यान शायद आर्थिक प्रतिबंधों और निगरानी की तरफ मुड़ा है। इस मुद्दे पर वाशिंगटन पोस्ट और न्यूयार्क टाइम्स ने विस्तृत खबर प्रकाशित की है।

ट्रंप ने ईरानी लोगों को एक संदेश दिया, “आप बहादुर हैं, आपके देश के साथ जो हुआ वह शर्मनाक है। ईरान एक महान देश था।” उनका यह बयान ईरान के प्रदर्शनकारियों के समर्थन में दिखता है, लेकिन ईरान की सरकार को “गंभीर परिणाम” की धमकी भी इसमें शामिल है। संभवत: इसी रिपोर्ट के प्रभाव से ट्रंप ने इस्राएल-अमेरिका के संयुक्त हमले की संभावना पर चुप्पी साधी हुई है, जो पहले चर्चा में था। उनकी चेतावनी वेनेजुएला-क्यूबा मॉडल जैसी लगती है यानी प्रतिबंधों से दबाव बनाना, न कि प्रत्यक्ष हस्तक्षेप करना।

क्या है प्रदर्शनों की असल ताकत
उधर ईरान के प्रदर्शन हिंसक हो चले हैं। शिराज, कराज में आगजनी हुई है, पुलिस की चौकियों पर हमले हुए हैं। रजा पहलवी की अपील पर लाखों लोग सड़कों पर उतरे हैं। लेकिन सीआईए के अनुसार, ये सब सत्ता हटाने की ताकत नहीं रखते। पुलिस की फायरिंग से लगभग 350 मौतें हुई हैं, सैकड़ों गिरफ्तार किए गए हैं। प्रदर्शनों के पीछे आर्थिक कारण तो प्रमुख हैं, लेकिन जातीय-क्षेत्रीय अंतर और नेतृत्व की कमी इन्हें कमजोर बनाते हैं।

क्या हैं इसके रणनीतिक निहितार्थ
यह रिपोर्ट ट्रंप प्रशासन के लिए यह राहत तो जरूर देती है कि फिलहाल ईरान पर आक्रमण करने जैसा कोई जोखिम नहीं है। लेकिन मध्य पूर्व में अस्थिरता बने रहने से इंकार नहीं किया जा सकता। बेशक, अब ईरान-अमेरिका के बीच तनाव तो बढ़ेगा, लेकिन अब प्रत्यक्ष युद्ध के बादल छंटते नजर आ रहे हैं।

प्रदर्शनों के पीछे आर्थिक कारण तो प्रमुख हैं, लेकिन जातीय-क्षेत्रीय अंतर और नेतृत्व की कमी इन्हें कमजोर बनाते हैं

सरकार और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के खिलाफ आक्रोश तो साफ दिखता है लेकिन इंटरनेट रोकना, फोन सेवाओं को बंद करना और सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई इसे काबू करने में जुटी है। रक्षा विशेषज्ञ मानते हैं कि अयातुल्ला अली खामेनेईका सत्ता अधिष्ठान, खासकर सुरक्षा व गुप्त सेवाओं का नेटवर्क अभी भी मजबूत है।

कुल मिलाकर सीआईए सीधे तौर पर ‘जल्दी ही सरकार गिरने वाली है’ जैसी बात तो नहीं करती लेकिन यह जरूर मानती है कि भाविष्य में आर्थिक संकट, राजनीतिक असंतोष और बाहरी दबाव मिलकर शासन पर दबाव और बढ़ा सकते हैं।

Topics: अयातुल्ला अली खामेनेईIran protestsईरानअमेरिकाAmericatrumpreportciainflationkhameneiसीआईए
Alok Goswami
Alok Goswami
A Delhi based journalist with over 25 years of experience, have traveled length & breadth  of the country and been on foreign assignments too. Areas of interest include Foreign Relations, Defense, Socio-Economic issues, Diaspora, Indian Social scenarios, besides reading and watching documentaries on travel, history, geopolitics, wildlife etc. [Read more]
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