Shattila Ekadashi 2026: माघ की पहली एकादशी को षटतिला एकादशी कहा जाता है। यह एकादशी कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को होती है। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है और उन्हें तिल चढ़ाए जाते हैं। पौराणिक मान्यता है कि इस एकादशी के व्रत से जीवन में सुख और समृद्धि आती है। आइए साल 2026 की पहली एकादशी षटतिला एकादशी कब है जानते हैं।
षटतिला एकादशी पर स्नान और पूजा की मुहूर्त
वाराणसी के शास्त्री दीपक जोशी का कहना है कि षटतिला एकादशी 14 जनवरी को है। तिथि का आरंभ दोपहर में 3 बजकर 17 मिनट पर होगा और 14 जनवरी शाम 5 बजकर 52 मिनट तक मान्य रहेगी। उदयातिथि के अनुसार षटतिला एकादशी का व्रत 14 जनवरी को रखा जाएगा। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5:27 से 06:21 बजे के बीच है। इस समय स्नान कर लें और भगवान के पूजा का संकल्प लें। षटतिला एकादशी में पूजा का मुहूर्त सुबह में 7:15 से लेकर 09:53 बजे तक है। इस दौरान आप भगवान विष्णु की पूजा कर सकते हैं। उनका कहना है कि षटतिला एकादशी पर राहुकाल दोपहर में 12:30 बजे से लेकर 1:49 बजे तक है।
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षटतिला एकादशी शुभ योग और पारण
शास्त्री दीपक जोशी का कहना है षटतिला एकादशी पर तीन शुभ योग बन रहे हैं। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और शाम में वृद्धि योग बनेगा। सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग 14 जनवरी सुबह 7:15 बजे से लेकर 15 जनवरी को 3:03 बजे तक है। पूजा के लिए ये समय फलदायी है। इस एकादशी में व्रत का पारण 15 जनवरी गुरुवार सुबह में 7:15 बजे से 9:21 बजे के बीच कर सकते हैं।
क्या है षटतिला एकादशी? इस दिन होता है तिल दान
षटतिला एकादशी के दिन तिल का दान होता है। इस दिन व्रत, विष्णु भगवान के पूजन और तिल दान से दरिद्रता दूर होती है व जीवन में सुख-समृद्धि आती है। इस दिन तिन से स्नान, तिल की उबटन, तिल का हवन, तिल के भोजन और तिल दान का विशेष महत्व बताया गया है। तिल के प्रयोग के कारण ही इसे षटतिला एकादशी कहा जाता है।












