भुवनेश्वर: ओडिशा में गौवंश तस्करों द्वारा अपनाए जा रहे लगातार बदलते और चालाक तरीकों का पर्दाफाश उस समय हुआ, जब कथित रूप से अवैध रूप से गायों की ढुलाई में प्रयुक्त एक पर्यटक बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। यह घटना कटक जिले के बडम्बा प्रखंड स्थित बड़ बारासिंह चौराहे के पास हुई, जिससे कानून-प्रवर्तन एजेंसियों के साथ-साथ स्थानीय लोगों में भी हड़कंप मच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, पंजीकरण संख्या OD 06 J 7975 वाली बस तेज रफ्तार और लापरवाही से चलाई जा रही थी। चालक के नियंत्रण खो देने के कारण बस व्यस्त चौराहे के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
सूचना मिलते ही बडम्बा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और वाहन को जब्त कर विस्तृत जांच शुरू की। जो मामला शुरुआत में एक सामान्य सड़क दुर्घटना प्रतीत हो रहा था, वह जल्द ही एक बड़े खुलासे में बदल गया। पुलिस द्वारा वाहन की जांच करने पर पाया गया कि बस के भीतर यात्रियों के बैठने के लिए कोई सीट मौजूद नहीं थी। इसके बजाय अंदरूनी हिस्से को विशेष रूप से बदला गया था और उसमें रस्सियां, हुक और बांधने की ऐसी व्यवस्थाएं की गई थीं, जिनका इस्तेमाल आमतौर पर गौवंश को बांधकर ले जाने के लिए किया जाता है। इस असामान्य संरचना ने स्पष्ट कर दिया कि बस को पर्यटकों के बजाय गायों की तस्करी के उद्देश्य से तैयार किया गया था, जो एक सुनियोजित तस्करी नेटवर्क की ओर इशारा करता है।
एक स्थानीय प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “बाहर से बस बिल्कुल सामान्य पर्यटक वाहन जैसी दिख रही थी, लेकिन जैसे ही दरवाजा खोला गया, साफ हो गया कि इसे किसी अवैध गतिविधि के लिए तैयार किया गया था।” जांच के दौरान वाहन के स्वामित्व को लेकर भी गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। बस के पंजीकरण दस्तावेज एक व्यक्ति के नाम पर थे, जबकि प्राथमिक सत्यापन में संकेत मिले कि वास्तविक मालिक कोई और है। बडम्बा पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “वाहन को जब्त कर मामला दर्ज कर लिया गया है। बस कहां से आई थी, गौवंश कहां से लाए गए और उन्हें किस स्थान पर ले जाया जा रहा था—इन सभी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है।” हालांकि इस दुर्घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है, लेकिन इस घटना ने ओडिशा में सक्रिय अंतरराज्यीय गौवंश तस्करी नेटवर्क की व्यापकता और संगठित स्वरूप को लेकर गंभीर चिंता खड़ी कर दी है। गौ सुरक्षा संगठनों ने इस पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
एक गौ सुरक्षा संगठन के कार्यकर्ता ने कहा, “यह घटना एक बार फिर साबित करती है कि गौवंश तस्कर कितने संगठित और नवाचारी हो चुके हैं। पहले दूध वैन, सरकारी वाहनों और यहां तक कि एंबुलेंस की आड़ में तस्करी की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। अब पर्यटक बसों को भी विशेष रूप से संशोधित कर जांच से बचने की कोशिश की जा रही है।” एक अन्य गौ सुरक्षा कार्यकर्ता ने कहा कि तस्कर वाहन जांच में मौजूद खामियों का जानबूझकर फायदा उठा रहे हैं। उन्होंने कहा, “तस्करों को पता है कि पर्यटक बसों की गहन जांच कम ही होती है। इसी कमजोरी का फायदा उठाकर वे जिलों और राज्यों की सीमाएं पार कर गौवंश की तस्करी कर रहे हैं।”
उन्होंने सख्त कार्रवाई और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग की। ओडिशा में इससे पहले भी कई बार गौवंश तस्कर नए-नए भेष और तरीकों का इस्तेमाल करते पकड़े जा चुके हैं। बार-बार की गई बरामदगी के बावजूद, गौ सुरक्षा कार्यकर्ताओं का आरोप है कि नरमी और सतत निगरानी के अभाव में तस्करी गिरोहों के हौसले बढ़े हैं। इस ताजा घटना के बाद वाहन जांच को और सख्त करने, सीमावर्ती इलाकों में निगरानी बढ़ाने तथा पुलिस, परिवहन विभाग और पशु कल्याण संगठनों के बीच बेहतर समन्वय की मांग तेज हो गई है।
















