मंगलवार रात को दिल्ली का तुर्कमान गेट का इलाका जंग का मैदान सा बन गया। दिल्ली नगर निगम (MCD) जब 30 बुलडोजर के साथ वहां अतिक्रमण हटाने पहुंची, तो मजहबी भीड़ और पुलिस के बीच हिंसक झड़प हो गई। भीड़ की तरफ से हुए पथराव में 5 पुलिसकर्मी घायल हो गए, जिसके जवाब में पुलिस को स्थिति को काबू में करने के लिए आंसू गैस के गोले दागे।
आखिर 30 बुलडोजर वहां क्यों पहुंचे और मामला हिंसक कैसे हुआ.?
चलिए पूरे मामले की टाइमलाइन जानते हैं –
तुर्कमान गेट पर आधी रात को हुआ पथराव
मंगलवार रात एमसीडी की टीम पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट की सैयद फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास पहुंचे। एमसीडी की टीम अतिक्रमण हटाने के लिए अपने साथ 30 बुलडोजर और 50 डंपर ट्रक लेकर आई थी। जिसके बाद वहां मजहबी लोगों की भीड़ इकठ्ठा होना शुरू हो गई। इसके बाद मजहबी समूहों में मस्जिद तोड़ने की बात सर्कुलेट होना शुरू हुई. फिर जैसे ही प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की तो मजहबी भीड़ की तरफ से विरोध तेज हो गया।
देखते ही देखते विरोध हिंसा में बदल गया और भीड़ ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। मजबूरन दिल्ली पुलिस को भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा। इस झड़प में 5 पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने कड़ी कार्रवाई करते हुए मौके से 5 उपद्रवियों को हिरासत में लिया है और इलाके में भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया गया है।
विवाद की असली वजह
एमसीडी का कहना है कि आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, 1940 में केवल 0.195 एकड़ जमीन ही मस्जिद के लिए लीज पर दी गई थी। इसके अतिरिक्त लगभग 39,000 वर्ग फुट जमीन, जिस पर बारात घर, डायग्नोस्टिक सेंटर और डिस्पेंसरी बनी है, वह पूरी तरह अवैध अतिक्रमण है।
मस्जिद कमेटी का दावा
मस्जिद प्रबंधन का दावा है कि यह पूरी जमीन वक्फ बोर्ड की जायदाद है। वे वक्फ बोर्ड को इसका बाकायदा किराया भी देते रहे हैं। कमेटी का तर्क है कि इस जमीन पर कार्रवाई करने का अधिकार केवल वक्फ ट्रिब्यूनल को है, नगर निगम को नहीं।
नवंबर से अब तक क्या-क्या हुआ.?
नवंबर 2025 में दिल्ली हाईकोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए रामलीला मैदान के पास फुटपाथ और सड़कों से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया। इसमें स्पष्ट कहा गया कि सड़क और सार्वजनिक रास्तों पर बनी संरचनाओं को हटाया जाए।
दिसंबर 2025 में एमसीडी ने पैमाइश पूरी की और मस्जिद के दायरे से बाहर के अवैध ढांचों को गिराने का नोटिस लगा दिया। दिल्ली की शाही जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी भी इस सिलसिले में दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मिले और कोर्ट के आदेश आने तक रुकने की अपील की।
7 जनवरी 2026 को पुलिस और निगम की टीम भारी सुरक्षा के साथ पहुंची और कार्रवाई शुरू हुई, जिसके विरोध में मजहबी भीड़ ने पथराव किया तो विरोध हिंसा में बदल गया। पुलिस ने घायल कर्मचारियों के बयान पर FIR दर्ज कर ली है।
अब क्या होगा.?
मस्जिद कमेटी की नई याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार, एमसीडी और दिल्ली वक्फ बोर्ड से 4 हफ्ते में जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 22 अप्रैल 2026 की तारीख तय की है। तब तक इलाके में यथास्थिति बनाए रखना प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।

















