पंजाब में मुक्तसर साहिब के पास एक ऐसी कब्र है, जिसे आने-जाने वाला हर सिख राहगीर जूते-चप्पल मारता है। बताया जाता है कि इस कब्र में मुगल नूरदीन को दफनाया गया था, जिसने सिखों के दसवें गुरु साहिब श्री गुरु गोबिंद सिंह जी की हत्या का प्रयास किया था, लेकिन गुरु साहिब ने उसे ही मार गिराया। इसी जगह पर नूरदीन को दफन कर दिया गया था। तब से आज तक लोग उसकी कब्र पर जूते-चप्पल मार कर उसे उसके गुनाह की सजा देते आ रहे हैं।
भाजपा नेता तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने रविवार (4 जनवरी) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नूरदीन की कब्र पर लोगों द्वारा जूते-चप्पल मारने का वीडियो साझा किया। इसके साथ ही उन्होंने इसके पीछे का इतिहास भी बताया।
तेजिंदर पाल सिंह बग्गा ने लिखा, “मुगलों को पता था कि युद्ध के मैदान में गुरु गोबिंद सिंह जी को हराना नामुमकिन है। इसलिए उन्होंने नूरदीन को सिख के भेष में गुरु जी की सेना में शामिल करवा दिया। एक दिन जब गुरु गोबिंद सिंह जी दातुन कर रहे थे तो उसने पीछे तलवार से गुरु जी पर हमला कर दिया। गुरु जी के पास लोटा था, जिसे उन्होंने नूरदीन के सर पर दे मारा जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।” भाजपा नेता ने आगे लिखा, “उस स्थान पर अब गुरुद्वारा दातनसर है और गुरुद्वारे से कुछ ही दूरी पर मुगल नूरदीन की कब्र है, जो भी संगत गुरुद्वारे आती है वो नूरदीन की कब्र पर 5-5 बार चप्पल-जूते मारती है।”
मुगलों का जासूस था
नूरदीन के बारे में ऐसा कहा जाता है कि वह मुगलों के बेहद करीब था और उनका जासूस था। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी को मारने के लिए उनके साथ भेष बदल कर रह रहा था। वह गुरु साहिब पर हमला करने में कई बार विफल रहा था, लेकिन एक दिन सुबह जब गुरु गोबिंद सिंह दातुन कर रहे थे, तब नूरदीन ने उन पर तलवार से पीछे से वार किया। गुरु साहिब ने उसके वार को विफल कर नूरदीन को ही मार गिराया। इसके बाद नूरदीन की कब्र को मुक्तसर में ही दफना दिया गया। तब से लेकर आज तक सिख समाज के लोग वहां आकर नूरदीन की कब्र पर जूते-चप्पल बरसाते हैं।
कब्र को हर साल दोबारा बनाया जाता है
माघी मेले के दौरान श्रद्धालु अक्सर कब्र को तोड़ देते हैं। हैरानी की बात यह है कि इसे हर बार फिर से बना दिया जाता है, ताकि अगले साल के मेले में फिर से वही परंपरा निभाई जा सके।
श्रद्धालु इस जगह पर भी जरूर जाते हैं
नूरदीन की कब्र श्री दरबार साहिब से लगभग 2.5 किलोमीटर दूर, गुरुद्वारा दातनसर साहिब के पास स्थित है। माघी मेले में आने वाले श्रद्धालु इस जगह पर भी जरूर जाते हैं। यहां वे गुरु गोबिंद सिंह जी की बहादुरी को याद करते हैं और नूरदीन की कब्र पर जूते फेंकने की प्रथा को जारी रखते हैं।
















