पुरानी दिल्ली के तुर्कमान गेट इलाके में स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक मोड़ पर आ गया है। एमसीडी (MCD) के नोटिस के बाद कभी भी मस्जिद पर बुलडोजर चल सकता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की शाही जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी ने सोमवार को दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की और उन्होंने कोर्ट का आदेश आने तक किसी भी कार्रवाई को रोकने की बात कही है।
अतिक्रमण से जुड़ा है मामला
पहले जानते हैं कि क्या है पूरा मामला। दरअसल, 22 दिसंबर 2025 को दिल्ली नगर निगम ने एक नोटिस जारी किया, जिसमें मस्जिद परिसर की पैमाइश का हवाला दिया गया। एमसीडी के अनुसार, मस्जिद परिसर का कुल क्षेत्रफल 0.195 एकड़ है। प्रशासन का दावा है कि इस तय जमीन से अतिरिक्त जितना भी हिस्सा है, वह अतिक्रमण की श्रेणी में आता है।
इसी कथित अवैध हिस्से में एक बारात घर और एक डायग्नोस्टिक सेंटर चलाया जा रहा है। एमसीडी ने आदेश दिया है कि इन हिस्सों को तुरंत हटाया जाए क्योंकि ये सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बने हैं। इस आदेश के बाद स्थानीय लोगों और मस्जिद प्रबंधन परेशान हैं।
सीलिंग के डर के चलते बंद हुआ शादियों का आयोजन
कार्रवाई की आशंका को देखते हुए मस्जिद के बाहर एक पर्चा चस्पा किया गया है। इसमें लिखा है कि 3 जनवरी से यहां शादियों का आयोजन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। यह बारात घर लंबे समय से स्थानीय लोगों के लिए कम खर्चे में शादी-ब्याह के लिए एक सहारा था, लेकिन अब सीलिंग के खतरे के चलते इसे बंद कर दिया गया है।
इलाके में भारी पुलिस बल तैनात
यह मामला मजहबी और संवेदनशील होने के कारण दिल्ली पुलिस पूरी तरह अलर्ट पर है। पुलिस के आला अधिकारियों ने खुद मौके का मुआयना किया है। कोर्ट के आदेश के बाद विवादित हिस्से की पैमाइश का काम भी पूरा हो चुका है। इलाके में भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में एमसीडी विवादित हिस्से को सील कर सकता है या वहां तोड़फोड़ की कार्रवाई हो सकती है।
दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मिले शाही इमाम
अब इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दिल्ली की शाही जामा मस्जिद के इमाम अहमद बुखारी भी सक्रिय हो गए हैं। उन्होंने रविवार देर रात खुद फैज-ए-इलाही मस्जिद का दौरा किया। सोमवार को उन्होंने दिल्ली पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की और उनसे अपील की।
उन्होंने कहा कि यह मसला अभी कोर्ट में है, मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है, इसलिए पुलिस और प्रशासन को फिलहाल कोई भी दंडात्मक या तोड़फोड़ की कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी ने अपना रुख साफ करते हुए कहा है कि जिस जमीन को अतिक्रमण बताया जा रहा है, वह असल में दिल्ली वक्फ बोर्ड की है।
मस्जिद कमेटी का दावा वक्फ बोर्ड की है जमीन
कमेटी का दावा है कि उनके पास जमीन से जुड़े सभी वैध दस्तावेज मौजूद हैं और वक्फ बोर्ड जल्द ही इन्हें कोर्ट और प्रशासन के सामने पेश करेगा। फिलहाल, तनाव को देखते हुए शाही इमाम और स्थानीय विधायक का वहां जाकर नमाज पढ़ने का कार्यक्रम रद्द कर दिया गया है। अब मस्जिद कमेटी की सारी उम्मीदें कोर्ट के फैसले पर टिकी हुई हैं।

















