बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों पर बढ़ते हमलों के बाद अब आगामी चुनाव में उनकी आवाज दबाने की कोशिश हो रही है। पड़ोसी देश से खबर आई है कि वहां के एक हिंदू बहुल इलाके ‘गोपालगंज-3’ से एक प्रमुख हिंदू नेता, गोबिंददेव प्रमाणिक का नामांकन रद्द कर दिया गया है। उन्होंने इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पर्चा भरा था। इस घटना ने बांग्लादेश के आगामी चुनावों (12 फरवरी) की निष्पक्षता और वहां के हिंदुओं की राजनीतिक भागीदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
शेख हसीना की सीट से किया था नामांकन
दरअसल, बांग्लादेश के गोपालगंज-3 निर्वाचन क्षेत्र में हिंदू मतदाताओं की संख्या 50 प्रतिशत से भी अधिक है। यह वही सीट है जहां से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना चुनाव जीतती रही हैं। यहां से ‘बांग्लादेश जातीय हिंदू महाजोत’ के महासचिव गोबिंददेव प्रमाणिक ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया था।
शनिवार को चुनाव अधिकारी (रिटर्निंग ऑफिसर) ने उनके नामांकन को खारिज कर दिया। इसके पीछे उन्होंने चुनावी कानून की एक धारा का हवाला दिया जिसके तहत किसी भी निर्दलीय उम्मीदवार को अपने क्षेत्र के 1 फीसदी मतदाताओं के हस्ताक्षर समर्थन के तौर पर जमा करने होते हैं। चुनाव अधिकारी का कहना है कि प्रमाणिक ने जो हलफनामे दिए हैं उन पर किए गए हस्ताक्षर अमान्य हैं।
बीएनपी के कार्यकर्ताओं पर डराने का आरोप
गोबिंददेव प्रमाणिक ने इस फैसले के पीछे एक गहरी साजिश का आरोप लगाया है। उन्होंने बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के कार्यकर्ताओं पर उंगली उठाई। गोबिंददेव ने कहा कि नामांकन भरने के बाद बीएनपी के कार्यकर्ताओं ने उन लोगों को धमकाना शुरू कर दिया जिन्होंने उनका समर्थन किया था। उन मतदाताओं को डराया गया कि वो चुनाव अधिकारी के सामने जाकर यह झूठ बोलें कि उन्होंने हस्ताक्षर नहीं किए हैं या उनके हस्ताक्षर गलत तरीके से लिए गए हैं।
डरे लोगों ने ऐसा ही किया और इसके आधार पर चुनाव अधिकारी ने नामांकन को अमान्य करार दे दिया। गोबिंददेव का कहना है कि गोपालगंज-3 के 3 लाख मतदाताओं में से 51 प्रतिशत हिंदू हैं, इसलिए बीएनपी को डर है कि अगर कोई मजबूत हिंदू नेता मैदान में उतरा, तो वह जीत सकता है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हालांकि, मेरे 1 फीसदी मतदाताओं के हस्ताक्षर सही थे, लेकिन जिला रिटर्निंग ऑफिसर ने हलफनामे को स्वीकार नहीं किया। अधिकारी ने फैसला सुनाया कि हस्ताक्षर मान्य नहीं हैं। मैं चुनाव आयोग में अपील करूंगा और उसके बाद हाईकोर्ट भी जा सकता हूं।”
एक और हिंदू उम्मीदवार का नामांकन अटका
सिर्फ गोबिंददेव प्रमाणिक ही नहीं, एक और हिंदू उम्मीदवार दुलाल विश्वास का नामांकन भी फिलहाल रुका हुआ है। हालांकि, दुलाल विश्वास ‘गनो फोरम’ नामक पंजीकृत पार्टी से उम्मीदवार हैं, इसलिए उन पर 1 प्रतिशत हस्ताक्षर वाला नियम लागू नहीं होता। उनके कागजात में कुछ कमियों के चलते उन्हें दोबारा पेपर्स जमा करने को कहा गया है। इसके अलावा गोपालगंज-2 से एक और निर्दलीय हिंदू उम्मीदवार उत्पल विश्वास भी मैदान में है। इस सीट से कभी शेख हसीना के चचेरे भाई शेख सलीम जीते थे।
बता दें कि, गोबिंददेव प्रमाणिक की संस्था, ‘जातीय हिंदू महाजोत’, बांग्लादेश में 23 संगठनों का एक गठबंधन है और इसे वहां हिंदुओं की आवाज उठाने वाला सबसे बड़ा गैर-राजनीतिक संगठन माना जाता है। ऐसे में उनके नामांकन का रद्द होना बांग्लादेशी हिंदुओं के लिए एक बड़ा झटका है। ऐसा लगता है कि वहां अल्पसंख्यकों के लिए चुनावों में हिस्सा लेने पर अड़ंगे लगाए जा रहे हैं।

















