क्या कभी ऐसा हो सकता है कि कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश में काउन्सलर जैसे पद पर हो, वेतन ले रहा हो और अपने निर्वाचन क्षेत्र में हो ही नहीं? और तमाम सुविधाओं का भी वह हकदार हो? यह हैरान करने वाला मामला भी लंदन से ही आया है। लंदन में टावर हेमलेट्स के लिए काउंसलर के लिए चुनी गई सबीना खान पिछले आठ महीने से बांग्लादेश में रह रही हैं। डेली मेल के अनुसार सबीना खान जिन्हें लगभग £20,000 का वेतन वहाँ के करदाताओं के पैसों से मिलता है, वह एक साल के करीब से लंदन में है ही नहीं।
जब यह मामला पहले चर्चा में आया था, तब भी हमने इसके विषय में लिखा था। अब चूंकि बांग्लादेश में चुनाव हैं, तो ऐसा कहा जा रहा है कि सबीना खान शायद बांग्लादेश में सांसद बनना चाहती हैं और इसलिए वह अपने मुल्क में हैं और उन्होनें इस विषय में अपनी पार्टी एस्पायर पार्टी को भी सूचित कर दिया है और काउंसिल के मोनिट्रिंग ऑफिसर को भी कि वह आखिर क्या करना चाह रही हैं। डेली मेल के अनुसार “टावर हैमलेट्स ने पुष्टि की है कि खान एक काउंसलर के तौर पर सालाना £11,898 कमाती हैं और रिसोर्स के लिए स्क्रूटनी लीड के तौर पर अतिरिक्त £8,702 कमाती हैं, इस भूमिका में उन्हें काउंसिल के खर्च की बारीकी से जांच करनी होती है, यानी कुल मिलाकर सालाना £20,600।“
घोटाला बता रहे काउंसलिंग के लोग
काउंसिल के लोग इसे घोटाला बता रहे हैं, क्योंकि मई से सबीना अपनी काउंसिल में उपस्थित हुई ही नहीं हैं और अपनी जगह बैठकों में अपना प्रतिनिधि भेज रही हैं। और डेली मेल के अनुसार टावर हेमलेट्स के सूत्रों ने इसे घोटाला बताया है और इस विषय पर भी हैरानी व्यक्त की है कि अभी तक उनसे इस्तीफा क्यों नहीं मांगा गया? सोशल मीडिया पर लोग इसे एक राष्ट्र के पतन के रूप में व्यक्त कर रहे हैं। जिम चिमिरी नामक एक यूजर ने लिखा कि अगर आपको देखना है कि ब्रिटिश सार्वजनिक जीवन में कितना क्षरण आया है तो टावर हेमलेट्स को देखना चाहिए। सबीना खान, काउंसलर जिसे लंदन के करदाताओं द्वारा पैसा मिलता है, वह बांग्लादेश में चुनाव प्रचार कर रही है। पाँच हजार मील दूर, एकदम अलग चुनावी मैदान में वह है।
सबीना खान दूसरे देश में कर रहीं प्रचार
इस पोस्ट में आगे लिखा है कि वह दूसरे देश में चुनाव प्रचार कर रही है और फिर भी लंदन से वेतन ले रही है। उसके पास वरिष्ठ जांच भूमिका में है और साथ ही उसे काउंसिल द्वारा यह आश्वासन भी दिया जाता है कि वह अपने क्षेत्र के नागरिकों के प्रति प्रतिबद्ध रहेगी। यदि यह बयान आपको स्तब्ध नहीं करता तो कुछ नहीं कर सकता है। यह किसी भी कानूनी लूपहोल की कहानी नहीं है, यह सार्वजनिक कार्यालय के अर्थ की गिरावट है। इस पोस्ट में लिखा है कि जनता के कार्यालय में यह आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप उन लोगों के लिए कार्य करेंगे, जिन्होनें आपको चुना है। मगर वह अपने क्षेत्र के लिए उपस्थित ही नहीं है। सबीना खान मीटिंग्स से गायब है, वह अपनी प्रॉक्सी भेज सकती है और उसके बाद भी 20000 पाउंड्स ले सकती है।
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इस पोस्ट में वे आगे लिखते हैं कि यह किसी महिला या बाहर की यात्रा की बात नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक कल्चर की बात है, जिसे अब निष्ठा, उपस्थिति, या करदाताओं से मूलभूत ध्यान की भी जरूरत नहीं है। हमें सहिष्णुता के नाम पर इसे स्वीकार करने के लिए कहा गया है।
सोशल मीडिया पर लोगों का गुस्सा भड़का
इस समाचार के एक बार फिर से चर्चा में आने के बाद एक बार फिर से लोगों का गुस्सा भड़क गया है। लोग इसे भ्रष्टाचार कह रहे हैं। कुछ लोग प्रश्न उठा रहे हैं कि आखिर सबीना खान की निष्ठा किसके प्रति है? और जब वह लंदन में इतने महीने से है ही नही, तो फिर उसे वेतन क्यों दिया जा रहा है? टेलीग्राफ के अनुसार अब साथी काउन्सलर सबीना खान का इस्तीफा मांग रहे हैं।
टेलीग्राफ के अनुसार टावर हैमलेट्स की एक और लेबर काउन्सलर एमी ली ने नवंबर की कमिटी की मीटिंग में प्रश्न किया था कि क्या मेयर इस बात पर सहमत होंगे कि सबीना खान को फाइनैन्स और रिसोर्सेज के लिए मुख्य जांच सदस्य की भूमिका से इस्तीफा दे देना चाहिए। अब चूंकि सबीना ने बांग्लादेश में चुनावों में भाग लेने की इच्छा जाहिर कर दी है तो टावर हेमलेट्स में काम करने वाले किसी को यह भूमिका देनी चाहिए मिसेज खान अपने क्षेत्र के प्रति समर्पित हैं, और उन्होनें अपनी पार्टी एस्पायर ग्रुप को आश्वस्त किया है कि वह अपने क्षेत्र के निवासियों और काउंसिल के प्रति अपने उत्तरदायित्वों के प्रति समर्पित है।
काउंसिल ने चाहे यह विश्वास कर लिया हो, परंतु लोगों के भीतर गुस्सा है। लोगों को यह बात हजम नहीं हो रही है कि लंदन की एक काउंसलर जो एक बहुत महत्वपूर्ण समितियों में है, वह आठ महीने से बांग्लादेश में चुनाव के लिए है और फिर भी वह यहाँ की काउन्सलर है। लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर ऐसी क्या विवशता है?
















