भारतीय समाज का स्वभाव है सामाजिक सद्भाव : डॉ. मोहन भागवत जी
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भारतीय समाज का स्वभाव है सामाजिक सद्भाव : डॉ. मोहन भागवत जी

भोपाल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा— सामाजिक सद्भाव भारतीय समाज का स्वभाव है। सज्जन शक्ति, पंच परिवर्तन और संवाद से ही राष्ट्र मजबूत होगा।

Written byShivam DixitShivam Dixit — edited by Shivam Dixit
Jan 3, 2026, 07:30 pm IST
inभारत, मध्य प्रदेश

भोपाल । राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत जी ने कहा कि सामाजिक सद्भाव कोई नई अवधारणा नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज का स्वभाव रहा है। समाज में सज्जन शक्ति का जागरण, आचरण में पंच परिवर्तन और निरंतर सद्भावना संवाद आज की अनिवार्य आवश्यकता है।

सरसंघचालक जी शनिवार को अंतिम दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में आयोजित सामाजिक सद्भाव बैठक को संबोधित कर रहे थे। मध्यभारत प्रान्त के 16 शासकीय जिलों के समाज के विभिन्न वर्गों और संगठनों के प्रतिनिधियों की सहभागिता इस बैठक की विशेषता रही।

दरअसल, यह बैठक दो सत्रों में आयोजित की गई थी । प्रथम सत्र का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और भारत माता के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ हुआ। मंच पर सरसंघचालक जी, प्रख्यात कथावाचक पंडित प्रदीप मिश्रा और मध्यभारत के प्रांत संघचालक अशोक पांडेय उपस्थित रहे।

इस अवसर पर सरसंघचालक जी ने स्पष्ट किया कि “समाज शब्द का अर्थ ही समान गंतव्य की ओर बढ़ने वाला समूह है। भारतीय समाज की कल्पना सदैव ऐसी रही है, जिसमें जीवन भौतिक और आध्यात्मिक दोनों दृष्टियों से सुखी हो। हमारे ऋषि-मुनियों ने यह समझा कि अस्तित्व एक है, केवल देखने की दृष्टि अलग-अलग है। उनकी तपस्या और साधना से ही राष्ट्र का निर्माण हुआ और वही हमारी सांस्कृतिक नींव है।”

सरसंघचालक जी ने कहा कि “कानून समाज को नियंत्रित कर सकता है, लेकिन समाज को चलाने और जोड़कर रखने का कार्य सद्भावना ही करती है। विविधता के बावजूद एकता ही हमारी पहचान है। बाहरी रूप से हम अलग दिख सकते हैं, लेकिन राष्ट्र, धर्म और संस्कृति के स्तर पर हम सभी एक हैं। इसी विविधता में एकता को स्वीकार करने वाला समाज हिंदू समाज है।”

उन्होंने कहा कि हिंदू कोई संज्ञा नहीं, बल्कि एक स्वभाव है, जो मत, पूजा पद्धति या जीवनशैली के आधार पर झगड़ा नहीं करता।

उन्होंने यह भी कहा, “समाज में भ्रम फैलाकर जनजातीय और अन्य वर्गों को यह कहकर तोड़ने का प्रयास किया गया कि वे अलग हैं, जबकि सच्चाई यह है कि हजारों वर्षों से अखंड भारत में रहने वाले सभी लोगों का डीएनए एक है। संकट के समय ही नहीं, बल्कि हर समय सद्भावना बनाए रखना आवश्यक है। मिलना, संवाद करना और एक-दूसरे के कार्यों को जानना ही सद्भावना की पहली शर्त है।” उन्होंने कहा कि समर्थ को दुर्बल की सहायता करनी चाहिए।

समाज से राष्ट्र तक का भाव : पंडित प्रदीप मिश्रा

पहले सत्र में पंडित प्रदीप मिश्रा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि सभी समाज अपने-अपने स्तर पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन यह प्रश्न भी आवश्यक है कि हमने राष्ट्र के लिए क्या किया और राष्ट्र को क्या दिया। उन्होंने कहा, “संघ और शिव के भाव में अद्भुत समानता है। जैसे शिव ने समस्त सृष्टि के लिए विष पिया, वैसे ही संघ प्रतिदिन आरोपों का विष पीकर भी संयम और राष्ट्रहित में कार्य करता है।”

उन्होंने कहा कि जन्म चाहे किसी भी जाति में हुआ हो, पहचान अंततः हिंदू, सनातनी और भारतीय की ही है। प्रत्येक भारतीय में राष्ट्रोत्थान और समाजोत्थान की अद्भुत क्षमता है। धर्मांतरण को उन्होंने केवल वर्तमान पीढ़ी ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रभावित करने वाला गंभीर षड्यंत्र बताया और इसके प्रति समाज को सजग रहने का आह्वान किया।

पंडित मिश्रा ने ‘ग्रीन महाशिवरात्रि’ जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि “घर-घर मिट्टी के शिवलिंग की पूजा सामाजिक समरसता का सशक्त उदाहरण है।”

उन्होंने कहा कि सामाजिक सद्भाव बैठक का मूल उद्देश्य यही है कि हम अपने साथ-साथ अपने पड़ोसी और समाज को भी लेकर आगे बढ़ें। जैसे लंगर में जाति नहीं पूछी जाती, वैसे ही राष्ट्र निर्माण के लिए सभी को एकजुट होकर कार्य करना चाहिए।

समाजों के कार्यों का प्रतिवेदन : सद्भाव का जीवंत स्वरूप

कार्यक्रम के प्रारंभ में विभिन्न समाजों के प्रतिनिधियों द्वारा अपने-अपने कार्यों का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया गया। तेली साहू समाज की ओर से मेवा लाल साहू ने बताया कि समाज 1911 से घर वापसी और आर्थिक उन्नयन के लिए कार्य कर रहा है। जैन मिलन के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देवेन्द्र जैन ने पर्यावरण संरक्षण, गौशाला संचालन, स्वास्थ्य सेवा, रक्तदान और शिक्षा के क्षेत्र में चल रहे कार्यों की जानकारी दी।

मीणा समाज सेवा संगठन के रामनिवास रावत ने प्रकृति संरक्षण, पौधारोपण और पर्यावरण जागरूकता के प्रयासों का उल्लेख किया। अखिल भारतीय यादव महासभा के कृष्णा संघर्ष यादव ने शिक्षा, स्वास्थ्य, करियर मार्गदर्शन और पर्यावरण संरक्षण में किए जा रहे प्रयासों को साझा किया। सोंधिया राजपूत समाज के प्रताप सिंह सिसोदिया ने फिजूलखर्ची रोकने, सामूहिक विवाह, शिक्षा, संस्कार और जैविक खेती को बढ़ावा देने की जानकारी दी।

स्पोर्ट्स एवं शास्त्रीय नाट्य के क्षेत्र से जुड़े डॉ. केशव पांडे ने 55 देशों में भारतीय कला संस्कृति के प्रचार और नदी पुनर्जीवन जैसे कार्यों का प्रतिवेदन दिया। रघुवंशी समाज के अमित रघुवंशी ने शिक्षा, आत्मनिर्भरता, पर्यावरण संरक्षण और महिला सशक्तिकरण के प्रयासों की जानकारी दी। अखिल भारतीय कायस्थ महासभा के सुनील श्रीवास्तव ने वैवाहिक परिचय सम्मेलन, रोजगार मेले और मंदिर जोड़ो अभियान का उल्लेख किया।

जाटव समाज के रामावतार मौर्य ने समाज में नवचेतना, धर्मांतरण रोकने और सामाजिक अधिकारों के लिए किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। माहेश्वरी समाज की रंजना बहेती ने ‘बेटी ब्याहो और बहू पढ़ाओ’ जैसे अभियानों और महिला आत्मरक्षा कार्यक्रमों का उल्लेख किया।

राजपूत महापंचायत के अभय परमार ने सामाजिक आयोजनों और शस्त्र लाइसेंस संबंधी शिविरों की जानकारी दी। भार्गव समाज के मयंक भार्गव ने शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक सहायता और गोंडी भाषा संरक्षण के प्रयासों को साझा किया।

एक समाज, एक राष्ट्र की दिशा में सार्थक पहल

सामाजिक सद्भाव बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि समाज अपने क्षेत्र की समस्याओं के समाधान के लिए स्वयं आगे आएगा और सरकार की प्रतीक्षा किए बिना सामूहिक प्रयास करेगा।

वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि यह बैठक किसी एक संगठन की नहीं, बल्कि सम्पूर्ण हिंदू समाज की है। उद्देश्य एक ही है कि पूरा समाज मिलकर पूरे समाज को बलशाली बनाए और एक समाज, एक राष्ट्र के रूप में दृढ़ता से खड़ा रहे।

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Shivam Dixit
Shivam Dixit
अनुभवी भारतीय पत्रकार, मीडिया एवं सोशल मीडिया विशेषज्ञ, राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार विजेता, और डिजिटल रणनीतिकार। वर्ष 2015 में पत्रकारिता की शुरुआत। प्रिंट, TV और डिजिटल मीडिया संस्थानों में विभिन्न भूमिकाओं में कार्य किया। भारत की प्रथम SMS समाचार एजेंसी "न्यूज़ नेटवर्क ऑफ इंडिया" (NNI) में रिपोर्टर कोऑर्डिनेटर के रूप में काम किया, डिजिटल मीडिया के अनोखे प्रोजेक्ट "इंडियाज़ पेपर" का नेतृत्व करते हुए 500 समाचार वेबसाइटों का प्रबंधन किया। भारत के अलग अलग राज्यों के लगभग 1000 स्थानीय पत्रकारों से जुड़ा यह प्रोजेक्ट "लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स" में दर्ज है। वर्ष 2022 से राष्ट्रीय साप्ताहिक पत्रिका पाञ्चजन्य (1948 में स्थापित) में उपसंपादक के रूप में कार्यरत हैं। शिवम् की पत्रकारिता में राष्ट्रीयता, सामाजिक मुद्दों और तथ्यपरक रिपोर्टिंग पर जोर रहा है। उनकी कई रिपोर्ट्स, जैसे- नूंह (मेवात) हिंसा, हल्द्वानी वनभूलपुरा हिंसा, जम्मू-कश्मीर पर "बदलता कश्मीर", "नए भारत का नया कश्मीर", "370 के बाद कश्मीर", "टेररिज्म से टूरिज्म", और अयोध्या राम मंदिर प्राण प्रतिष्ठा से पहले के बदलाव जैसे "कितनी बदली अयोध्या", "अयोध्या का विकास", और "अयोध्या का अर्थ चक्र", कई राष्ट्रीय मंचों पर सराही गई हैं। उपलब्धियों में देवऋषि नारद पत्रकार सम्मान (2023) शामिल है, जिसे उन्होंने जहांगीरपुरी हिंसा के मुख्य आरोपी "अंसार खान" की साजिश को उजागर करने के लिए प्राप्त किया। [Read more]
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