भुवनेश्वर: पुरी स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में प्रस्तावित क्यू (कतार) -आधारित धाडी दर्शन प्रणाली को परीक्षण चरण के दौरान सामने आई कुछ तकनीकी खामियों के कारण फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। ओडिशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 12वीं सदी के इस प्राचीन मंदिर में श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से नई दर्शन व्यवस्था का ट्रायल किया जा रहा था।
इसी दौरान संरचनात्मक और संचालन से जुड़ी कुछ छोटी कमियां सामने आईं, जिसके बाद अधिकारियों ने इसके क्रियान्वयन को तब तक टालने का निर्णय लिया है, जब तक सभी खामियों को पूरी तरह दूर नहीं कर लिया जाता। मीडियाकर्मियों से बातचीत में कानून मंत्री ने स्पष्ट किया कि सामने आई समस्याएं गंभीर नहीं हैं और उन्हें दूर करने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा, “जब हम क्यू (कतार) -आधारित दर्शन प्रणाली लागू करने जा रहे थे, तभी इसके लिए तैयार संरचना में एक छोटी तकनीकी गड़बड़ी सामने आई। उन्नत तकनीक की मदद से इसे जल्द दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।” मंत्री ने आगे बताया कि इस परियोजना को लागू करने वाली एजेंसियों को आवश्यक तकनीकी सुधार तत्काल करने के निर्देश दिए गए हैं।
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उन्होंने आश्वासन दिया कि जब तक यह व्यवस्था पूरी तरह त्रुटिरहित नहीं हो जाती, तब तक इसे लागू नहीं किया जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुगम और सुव्यवस्थित दर्शन का अनुभव मिल सके। क्यू (कतार) आधारित दर्शन प्रणाली के लागू होने के बाद मंदिर परिसर में भीड़ नियंत्रण बेहतर होने की उम्मीद है। इससे विशेषकर अधिक भीड़ वाले दिनों और पर्वों के दौरान मंदिर में प्रवेश और निकास की प्रक्रिया अधिक सहज और सुविधाजनक हो सकेगी। राज्य सरकार वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांग व्यक्तियों और पुरी के स्थानीय निवासियों के लिए विशेष प्रावधानों पर भी विचार कर रही है। मंत्री हरिचंदन ने कहा कि बुजुर्ग और दिव्यांग श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए प्रवेश और निकास व्यवस्था को और अधिक सुचारु बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
साथ ही, स्थानीय निवासियों की लंबे समय से चली आ रही विशेष दर्शन व्यवस्था की मांग की भी समीक्षा की जा रही है। उल्लेखनीय है कि सितंबर 2025 में श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति ने मंदिर के नाटमंडप में धाडी दर्शन प्रणाली के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। यह निर्णय पुरी के नीलाद्रि भक्त निवास स्थित सम्मेलन कक्ष में नवगठित प्रबंध समिति की पहली बैठक में लिया गया था। यह पहल राज्य सरकार और मंदिर प्रशासन द्वारा तीर्थयात्रियों के अनुभव को बेहतर बनाने की व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसमें मंदिर की पवित्रता और पारंपरिक धार्मिक अनुष्ठानों की गरिमा को बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

















