देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने उत्तराखंड में जनसंख्या असंतुलन पर बड़ी कार्रवाई की है। शनिवार को बड़ा फैसला लेते हुए परिवार रजिस्टर की नियमावली में संशोधन करने के निर्देश जारी किए हैं। इसका प्रस्ताव जल्द ही कैबिनेट बैठक में लाने के लिए शासन को कहा गया है।
उल्लेखनीय है कि देवभूमि उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज के मामलों के अध्ययन करने के दौरान ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें कई गांव जोकि कभी हिन्दू बाहुल्य थे आज वो मुस्लिम बाहुल्य हो गए हैं। इन गांवों के परिवार रजिस्टरों को जब देखा गया तो उनमें कई तरह की खामियां और हेर-फेर दिखा।
परिवार रजिस्टर की नियमावली यूपी के समय से 1970 से चली आ रही है। इसकी वजह के मौजूदा परिस्थितियों में ग्राम समाज की भूमि को खुर्दबुर्द करने और सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के मामले भी गृह विभाग की एक जांच रिपोर्ट में सामने आए हैं।
सीएम पुष्कर सिंह धामी ने एक उच्च स्तरीय बैठक करके शासन को निर्देशित किया है कि 2003 से बाद के सभी परिवार रजिस्टरों की जांच डीएम एक टीम बना कर करवाएं। उससे पूर्व उक्त सभी रजिस्टर जिलाधिकारी द्वारा अपनी कस्टडी में ले लिए जाएं।
ढाई लाख परिवार अचानक बढ़े
सीएम धामी ने ये भी निर्देश दिए कि यूपी की नियमावली की बजाय उत्तराखंड की अपनी नियमावली बनाकर शीघ्र कैबिनेट में लाई जाए। ग्राम पंचायत विभाग द्वारा सीएम धामी के समक्ष यह आंकड़ा भी रखा गया कि पिछले अप्रैल से अब तक करीब ढाई लाख परिवार उत्तराखंड में बढ़ गए , ये कैसे और क्यों बढ़ गए ? इस बारे में गहनता से जांच किए जाने के निर्देश मुख्यमंत्री धामी ने दिए हैं।
सख्त कार्रवाई होगी
उन्होंने कहा कि ग्राम पंचायत स्तर से ये देखा जाए कि परिवार रजिस्टर में जो नाम दर्ज किए गए उनके दस्तावेज क्या क्या थे ?सीएम ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी ने अथवा पूर्व में ग्राम प्रधानों ने इस मामली लापरवाही बरती है तो उनके खिलाफ भी सख्त कारवाई की जाए।
बैठक में गृह सचिव शैलेश बगौली, डीजीपी दीपम सेठ, एडीजी अभिसूचना अभिनव कुमार, ग्राम पंचायत के विशेष सचिव डॉ पराग मधुकर धकाते, निदेशक निधि यादव, डीएम देहरादून सविन बंसल आदि मौजूद रहे।
कैसे आया ये मामला पकड़ में ?
उत्तराखंड में डेमोग्राफी चेंज के विषय सामने आने के बाद देहरादून जिले के विकास नगर परगना में 28 गांव जोकि राज्य बनने से पूर्व हिंदू बाहुल्य थे वो अब मुस्लिम बाहुल्य हो गए। इन गांवों के जब परिवार रजिस्टर जांचे गए, तब उनमें ऐसी खामियां मिलीं कि जिस लड़की का निकाह यहां से अन्य प्रदेश में हो गया उसका नाम यहां नहीं कटा बल्कि उसके पति और ससुराल के लोगों के नाम भी यहां के गांव के परिवार रजिस्टर में दर्ज पाए गए।
ये परिवार यूपी में भी सरकारी सुविधाओं का फायदा उठा रहे थे और उत्तराखंड में भी लाभ ले रहे थे। ऐसे भी ग्राम प्रधान मिले जोकि यूपी के मूल निवासी थे और वे उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर जन प्रतिनिधि बन गए। ऐसे मामले परगना अधिकारी से लेकर डीएम की अदालतों में चलते रहे और वे यहां प्रधान बने रहे।

















