वर्ष 2025 के अंतिम सप्ताह में मणिपुर के तामेंगलोंग जिले में लुगकाउ गांव में एक मंदिर का उद्घाटन हुआ। इस गांव में रोंगमई नागा समाज के लोग रहते हैं। सुबह ही गांव के लोग सज-धज के पुजारी (पाईकी) के घर के समीप एकत्र होने लगे। धीरे-धीरे लगभग 300 लोग वहां एकत्र हुए। प्रातः 5:30 बजे जेलियांग रांग हरक्का (हिंदू) समाज के पारंपरिक गीत गूंजने लगे।
फिर समाज के प्रमुखों के नेतृत्व में सभी लोग हरक्का मंदिर (केलुमकाई) के परिसर में पहुंचे। इसके पश्चात तीन युवक पारंपरिक प्रार्थना-वेश धारण कर पूर्व दिशा की ओर मुख करके खड़े हुए। जैसे ही सामने पहाड़ों के पीछे से सूर्यदेव निकले, सभी एक स्वर में उनकी प्रार्थना करने लगे और तीनों युवक प्रार्थना के साथ नृत्य करने लगे। इसके उपरांत पुजारी द्वारा विधिवत प्रार्थना संपन्न कराई गई।
फिर श्रद्धालुओं ने मंदिर में प्रवेश कर वेदी पर भक्तिभाव से मस्तक टेककर दर्शन किए। उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में हरक्का पंथ के संस्थापक हेपाऊ जादोनांग ने लगभग 100 वर्ष पूर्व जिन प्रथम चार मंदिरों की स्थापना की थी, उनमें से एक मंदिर लुगकाउ गांव में भी था। रानी गाइदिन्ल्यू का जन्म इसी गांव में 1915 में हुआ था।
वे 1928 से मात्र 13 वर्ष की आयु में हेपाऊ जादोनांग के साथ हरक्का पंथ के भक्ति आंदोलन एवं भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में कंधे से कंधा मिलाकर सक्रिय रहीं। उसी दौरान ब्रिटिश सैनिकों द्वारा इस मंदिर को नष्ट कर दिया गया था। समय-समय पर इसका पुनर्निर्माण होता रहा, किंतु इस बार गांववासियों ने इसे भव्य स्वरूप देने का संकल्प लिया। मंदिर के पुनर्निर्माण में लगभग 40 लाख रुपए की लागत आई।
आश्चर्यजनक तथ्य यह है कि मात्र 55 परिवार वाले इस गांव ने स्वयं 28 लाख रुपए की राशि जुटाई। प्रत्येक परिवार ने लगभग 50 हजार रुपए का योगदान दिया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व केंद्रीय राज्यमंत्री सुदर्शन भगत, विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री अरुण नेटके, कल्याण आश्रम के अखिल भारतीय संगठन मंत्री अतुल जोग तथा हरक्का संगठन के प्रमुख हेगाऊकाम्बे पामे की गरिमामयी उपस्थिति रही।















