ईरान प्रदर्शन: ईरान में लोग इस्लामिक कट्टरता, हिजाब औऱ बढ़ती महंगाई के कारण आर्थिक बदाली से तंग आ चुके हैं। लोगों का गुस्सा ईरान की सरकार और उसके सर्वोच्च धार्मिक नेता अयातुल्लाह खामनेई के खिलाफ फूट पड़ा है। पिछले तीन दिन से देशभर के लोग सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। इस दौरान खामनेई के खिलाफ तानाशाह मुर्दाबाद, मुल्लाओं मुर्दाबाद के नारे सड़कों और गलियों में गूंज रहे हैं। वहीं ईरानी सरकार इस प्रदर्शन को कुचलने की भरसक कोशिश कर रही है।
खामनेई के खिलाफ नारे
ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल ईरान के कई शहरों और कस्बों में प्रदर्शन जारी हैं। लोग महंगाई, रियाल की गिरती कीमत (42,000+ प्रति डॉलर) और आर्थिक बदहाली से तंग आ चुके हैं। लेकिन अब नारे सिर्फ अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं रहे—ये खामनेई और पूरी व्यवस्था को निशाना बना रहे हैं। फुलादशहर (इस्फहान प्रांत) में मंगलवार रात लोगों ने “तानाशाह मुर्दाबाद” के नारे लगाए। ऐसे ही नारे फरशान (दक्षिण-पश्चिम ईरान) में भी लगे। इसके अलावा कई स्थानों पर “इस साल सैयद अली (खामनेई का उपनाम) को पटक दिया जाएगा” जैसे नारे भी गूंजे।
ये नारे पिछले कुछ सालों में सबसे तेजी से खामनेई पर व्यक्तिगत हमले में बदल गए हैं। पहले ज्यादातर नारे “मुल्लाओं मुर्दाबाद” तक रहते थे, लेकिन अब सीधे सुप्रीम लीडर का नाम लिया जा रहा है।
دانشجویان دانشگاهها در سراسر ایران حقوق اساسی خود را مطالبه میکنند، حتی در حالیکه نیروهای امنیتی مرتباً با ارعاب و خشونت با آنها برخورد میکنند. این دانشجویان نماینده برخی از تحصیلکردهترین و بااستعدادترین افراد کشور هستند، اما به دلیل سیاستهای شکستخورده رژیم جمهوری اسلامی… pic.twitter.com/PzWxRwlB4I
— USAbehFarsi (@USABehFarsi) December 31, 2025
राजशाही समर्थक नारे भी
इसके अलावा कुछ शहरों में, खासकर तेहरान और दूसरे इलाकों में, लोग पुरानी राजशाही की याद में नारे लगा रहे हैं— “रजा शाह की आत्मा को शांति”, “पहलवी वापस आएंगे” औऱ “ये आखिरी जंग है” जैसी नारेबाजी भी हुई। उल्लेखनीय है कि ये नारे 1979 की इस्लामी क्रांति के खिलाफ हैं, जहां खामनेई खुद बाद में सुप्रीम लीडर बने। लोग वर्तमान शासन से तंग हैं और पुरानी व्यवस्था की तरफ देख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं
वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने Newsmax को दिए इंटरव्यू में खामनेई को “मुल्लाओं के सिर पर बैठा आयतुल्लाह” कहा। उन्होंने ईरान के शासन को “धार्मिक गुंडों” वाला बताया। उनका कहना था कि असली बदलाव ईरानी लोगों को खुद लाना होगा। यह बयान प्रदर्शनों के बीच आया, जहां लोग खामनेई के खिलाफ बोल रहे हैं।
इससे पहले अमेरिका के दौरे पर फॉक्स न्यूज से बात करते हुए नेतन्याहू ने ईरान द्वारा इजरायल पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमले के अभ्यास पर भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि खुफिया जानकारी मिली है कि ईरान अपनी फौज के साथ फील्ड एक्सरसाइज़ (यानी सैन्य अभ्यास) कर रहा है, जिसमें वो इज़रायल पर बैलिस्टिक मिसाइल (लंबी दूरी की मिसाइल) छोड़ने की प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने कहा, “अगर ईरान सच में ऐसा करने की हिम्मत करेगा, तो नतीजा बहुत बुरा और तबाही वाला होगा। उम्मीद है वो ये गलती नहीं करेंगे।” नेतन्याहू का कहना था कि जून 2025 में अमेरिका ने ईरान के न्यूक्लियर प्लांट्स (खासकर फोर्डो साइट) पर हमला किया था और उसे पूरी तरह तबाह कर दिया था। अब ईरान अपनी मिसाइल बनाने की ताकत वापस बना रहा है और शायद न्यूक्लियर प्रोग्राम भी दोबारा शुरू करने की सोच रहा है।
वह आगे कहते हैं, “हम किसी बड़े झगड़े की तलाश में नहीं हैं। उम्मीद है ईरान भी ऐसा न करे। लेकिन अगर उन्होंने हम पर हमला किया, तो फिर सब कुछ खुला है – यानी हम जो चाहें, जितना चाहें, कर सकते हैं। कोई रोक-टोक नहीं रहेगी।”











