बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया का निधन हो गया है। वह 80 साल की थीं। उनकी मौत मंगलवार सुबह करीब 6 बजे ढाका के एवरकेयर अस्पताल में हुई, जहां वे लंबे समय से इलाज करा रही थीं। बीएनपी की मीडिया सेल ने आधिकारिक फेसबुक पेज पर उनकी मौत की पुष्टि की। पार्टी ने लिखा कि फज्र की नमाज के ठीक बाद सुबह 6 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
लंबे वक्त से थीं बीमार
खालिदा जिया काफी समय से कई बीमारियों से जूझ रही थीं। उन्हें लीवर की गंभीर समस्या (सिरोसिस), डायबिटीज, दिल और छाती से जुड़ी परेशानियां, गठिया जैसी कई पुरानी बीमारियां थीं। 23 नवंबर 2025 से वे एवरकेयर अस्पताल में भर्ती थीं। 11 दिसंबर को उनकी हालत और बिगड़ गई, तब उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया ताकि फेफड़ों और दूसरे अंगों को आराम मिल सके। डॉक्टरों ने कई बार बताया कि उनकी स्थिति बेहद नाजुक है और कोई खास सुधार नहीं हो रहा था। अस्पताल के बाहर शनिवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में डॉक्टर ए जेड एम जाहिद ने कहा था कि अभी यह कहना मुश्किल है कि हालत में सुधार हुआ है या नहीं, लेकिन वे बहुत क्रिटिकल हैं।
बीएनपी (बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी) ने कई बार कोशिश की कि उन्हें विदेश में बेहतर इलाज के लिए ले जाया जाए, लेकिन उनकी तबीयत इतनी खराब थी कि यह मुमकिन नहीं हो सका।
राजनीतिक सफर
खालिदा जिया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। वह बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की चेयरपर्सन थीं। उन्होंने 1991-1996 और फिर 2001-2006 तक प्रधानमंत्री के तौर पर काम किया। शेख हसीना की सबसे बड़ी राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी मानी जाती थीं। उनके पति जियाउर रहमान की हत्या के बाद उन्होंने 1980 के दशक में बीएनपी की कमान संभाली और राजनीति में बड़ी भूमिका निभाई।
उनके बेटे तारिक रहमान कुछ दिन पहले ही 17 साल के लंदन प्रवास के बाद बांग्लादेश लौटे थे। ठीक एक दिन पहले ही उनकी तरफ से चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया गया था, जिससे राजनीतिक माहौल में हलचल मची हुई थी। 1 दिसंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी तबीयत को लेकर चिंता जताई थी और कहा था कि भारत हर संभव मदद के लिए तैयार है।

















