बीते कुछ वर्षों से झारखंड में लगातार ऐसी खबरें सामने आती रही हैं कि कभी सरस्वती पूजा मनाने से रोका जा रहा है, तो कभी रामनवमी के जुलूस पर हमले की घटनाएं हो रही हैं। लेकिन अब हालात इस कदर बिगड़ चुके हैं कि राजनीति के धुरंधर, भारत रत्न और देश के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मनाने के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ रहा है। ऐसी ही एक गंभीर और चौंकाने वाली घटना बगोदर से सामने आई है, जहां प्रशासन ने अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती के दिन लोगों को अटल चौक पर श्रद्धांजलि कार्यक्रम मनाने से रोक दिया।
देशभर में अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती सुशासन दिवस के रूप में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही थी। इसी क्रम में बगोदर विधानसभा क्षेत्र के सरिया प्रखंड अंतर्गत केशवारी गांव स्थित अटल चौक पर स्थानीय लोग जयंती कार्यक्रम के लिए एकत्र हुए थे। आरोप है कि कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण था, इसके बावजूद प्रशासन ने अनुमति का हवाला देते हुए आयोजन को रोक दिया और वहां मौजूद लोगों के साथ कथित तौर पर अभद्र व्यवहार किया गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस चौक को पिछले लगभग दस वर्ष से अटल चौक के नाम से जाना जाता रहा है, वहीं हर वर्ष अटल जी की जयंती मनाई जाती रही है। बावजूद इसके, इस वर्ष प्रशासन ने अचानक सख्ती दिखाते हुए कार्यक्रम पर रोक लगा दी।
इस पूरे प्रकरण में बगोदर के विधायक नागेंद्र महतो और प्रशासन के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। विधायक नागेंद्र महतो ने झारखंड सरकार और प्रशासन पर सीधा राजनीतिक दुर्भावना का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यह अत्यंत शर्मनाक है कि झारखंड राज्य के निर्माता और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती मनाने से लोगों को रोका जा रहा है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सिर्फ जयंती कार्यक्रम को रोकना ही नहीं, बल्कि जिस अटल चौक पर पिछले दस वर्ष से आयोजन होता रहा है, वहां बने अर्धनिर्मित गोलंबर को भी प्रशासन ने तोड़कर धूल-धूसरित कर दिया। विधायक ने इसे जनभावनाओं, लोकतंत्र और राष्ट्रनायकों के सम्मान का खुला अपमान बताया।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन यहीं नहीं रुका, बल्कि रात के अंधेरे में अटल चौक स्थित गोलंबर को हटाने की कार्रवाई की गई।
इस पूरे मामले पर झारखंड के वरिष्ठ नेता और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा – “अटल बिहारी वाजपेयी जी झारखंड राज्य के निर्माता होने के साथ-साथ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री भी रहे हैं। आज पूरे देश में उनकी 101वीं जयंती श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई जा रही है। बगोदर के जिस चौक पर पिछले दस वर्ष से अटल जी की जयंती मनाई जाती रही है, वहां इस वर्ष न केवल आयोजन से रोका गया, बल्कि रात के अंधेरे में उस चौक को ही हटा दिया गया। यह कृत्य लोकतांत्रिक मूल्यों के विरुद्ध है और एक महान राष्ट्रनायक के सम्मान के साथ अन्याय है। झारखंड सरकार को चाहिए कि इस कुकृत्य में शामिल अधिकारियों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे।”
वहीं इस मामले पर अनुमंडल पदाधिकारी संतोष गुप्ता ने प्रशासन का पक्ष रखते हुए कहा कि स्थानीय लोग बिना पूर्व अनुमति के मौके पर एकत्र होकर जयंती मना रहे थे। उन्होंने बताया कि वहां पहले से किसी भी प्रकार की मूर्ति स्थापित नहीं थी। उनके अनुसार, संबंधित स्थल सड़क के ठीक बीचो-बीच स्थित था, जिससे दुर्घटना की आशंका बनी रहती थी, इसी कारण सुरक्षा और यातायात को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की गई।
हालांकि प्रशासन अपने निर्णय को सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, लेकिन जिस तरह से धार्मिक, सांस्कृतिक और अब राष्ट्रनायकों से जुड़े कार्यक्रमों पर बार-बार रोक लगाई जा रही है, उसने झारखंड सरकार की मंशा और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह है कि क्या झारखंड में अब श्रद्धा, आस्था और राष्ट्रनायकों के सम्मान के लिए भी सरकारी अनुमति अनिवार्य हो गई है?

















