बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ जो भी हो रहा है, वह किसी से छिपा नहीं है। और इसे लेकर अब कुछ फिल्मी सितारे भी सामने आए हैं। वे भी मुखर होकर लिख रहे हैं कि बांग्लादेश में हिंदुओं की हत्याओं पर चुप नहीं रहना चाहिए। अभी तक गाजा आदि के मामलों पर अपना मुंह खोलने वाला बॉलीवुड अब जिहादियों के चंगुल से मुक्त हो रहा है और वह वास्तविक मामलों पर अपना स्टैंड लेने लगा है।
पिछले कुछ वर्षों से जिस प्रकार से वामपंथी और इस्लामी एजेंडे से हटकर फिल्में न केवल बनना आरंभ हुई हैं, बल्कि वे क्राफ्ट के स्तर पर भी श्रेष्ठता के मानकों को गढ़ रही हैं, और जनता उन्हें पसंद कर रही है, तो उसे देखकर एजेंडाकारी लोग भड़के हुए हैं। अभी तक वे ऐसी फिल्मों और कलाकारों का बहिष्कार करते आए थे, जो हिंदुओं के पक्ष में आवाज उठाते थे। मगर अब समय बदल गया है। अब लोग बात करने लगे हैं। जैसे अभी बांग्लादेश में हो रही हिंसा पर कई कलाकारों ने अपना विरोध दर्ज कराया।
जाह्नवी कपूर के वीडियो से बिलबिलाए प्रोपागैंडिस्ट
ऐसी ही एक अभिनेत्री हैं जाह्नवी कपूर। श्रीदेवी और बोनी कपूर के बेटी जाह्नवी कपूर ने भी बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही हिंसा और विशेषकर हिन्दू व्यक्ति दीपू चंद्र दास की जिहादी भीड़ द्वारा की गई हत्या को लेकर अपने इंस्टाग्राम पर स्टोरी पोस्ट की थी। उन्होनें 25 दिसंबर की रात अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में बांग्लादेश में हुई इस हत्या को बर्बर ठहराते हुए लिखा कि “बांग्लादेश में जो हो रहा है, वह बर्बर है। यह जिबह किया जाना है और यह कोई अकेली घटना नहीं है। अगर आपको इस अमानवीय पब्लिक लिंचिंग के बारे में नहीं पता है, तो इसके बारे में पढ़ें, वीडियो देखें, सवाल पूछें। और अगर इन सबके बावजूद आपको गुस्सा नहीं आता तो यही पाखंड हमें तबाह कर देगा, इससे पहले कि हम कुछ समझ पाएं।”
उन्होनें आगे लिखा था कि “जब हमारे भाई और बहन जलाकर मारे डाले जा रहे हों, तो हमें पूरी दुनिया के सामने आवाज उठानी चाहिए और उन्होनें यह भी कहा कि हमें इन मामलों पर अपना स्टैंड लेना चाहिए।“
ध्रुव राठी ने बनाया प्रोपागैंडा वीडियो
जैसे ही यह स्टोरी सामने आई, वैसे ही प्रोपोगैंडा फैलाने वाले ध्रुव राठी ने अपना असली चेहरा दिखाते हुए जाह्नवी कपूर को निशाना बनाते हुए बॉलीवुड की अभिनेत्रियों पर एक वीडियो पोस्ट किया। और उसने “डार्क साइड ऑफ ब्यूटी” के शीर्षक से वीडियो बनाते हुए पोस्ट किया और उसमें थंबनेल के रूप मे उसने जाह्नवी कपूर का चेहरा लिया था।
उसने अपने वीडियो में यह बताने का प्रयास किया कि बॉलीवुड में सभी अभिनेत्रियाँ या अभिनेता गोरे होने के लिए या फिर अन्य सौन्दर्य मानकों के लिए सर्जरी का सहारा लेते हैं, और कुछ भी उनका स्वाभाविक नहीं होता है। उसने दीपिका पादुकोण और प्रियंका चोपड़ा, काजोल, शिल्पा शेट्टी, श्रीदेवी, बिपाशा बासु आदि का नाम लिया और कहा कि ऐसी अभिनेत्रियों की सूची बहुत लंबी है, जिनके कैरियर की शुरुआत में रंग थोड़ा डार्क था, मगर आजकल काफी लाइट हो गया है” मगर उसने इस वीडियो में जो थंबनेल लगाया था, वह जाह्नवी कपूर का था। ऐसे में यह समझा जा सकता है कि उसने जानबूझकर जाह्नवी कपूर का यह चेहरा प्रयोग किया था।
और यदि स्किन लाइटिंग ट्रीटमेंट कोई कराता भी है तो उसमें गलत क्या है? क्या ये गैरकानूनी काम है या फिर लोगों को पता नहीं होता है? लोग अभिनेताओं के अभिनय से प्रेम करते हैं और यह अभिनय ही है जो कलाकारों की पहचान है। यदि अभिनय के साथ अपने रूप को बेहतर करने के लिए कोई किसी प्रकार का ट्रीटमेंट लेता भी है तो उसमें क्या गलत है?
धुरंधर पर भी ध्रुव राठी का षणयंत्र ध्वस्त
दरअसल, अब बॉलीवुड के अभिनेता ध्रुव राठी जैसे एजेंडाधारियों के एजेंडे के प्रभाव में नहीं आते हैं, जैसे कि फिल्म धुरंधर को लेकर ध्रुव राठी अपने हर प्रकार के प्रयास में विफल हो चुका है। वह इस फिल्म को एजेंडा फिल्म और झूठी फिल्म बता चुका है, मगर यह फिल्म सफलता के नए मापदंड रच रही है। इस फिल्म में मुख्य भूमिका जिस रणबीर ने निभाई है वह दीपिका पादुकोण का पति हैं। प्रियंका चोपड़ा भी अपने निजी जीवन में हिन्दू मान्यताओं को मानने वाली अभिनेत्री हैं और अपनी बेटी की पूजा करती हुई फ़ोटो अक्सर साझा करती रहती हैं।
जाह्नवी कपूर धुरंधर की प्रशंसा भी कर चुकी हैं और साथ ही बांग्लादेश में हो रही हिंसा पर भी उन्होंने स्टोरी पोस्ट की थी, तो जाहिर है कि ध्रुव राठी जैसे लोगों को मिर्ची लगेगी ही। हालांकि, लोग अब सोशल मीडिया पर ऐसे एजेंडाधारियों को जबाव देने लगे हैं। ध्रुव राठी के इस वीडियो की भी आलोचना हुई और जब हंगामा हुआ तो उसने अपने वीडियो का थंबनेल बदल दिया और उसने टाइगर श्रॉफ की पहले की और अब की तस्वीर है।
आलोचना की जगह बेहूदगी पर उतरे एजेंडावादी
परंतु फिर वही प्रश्न उठता है कि बॉलीवुड और फैशन इंडस्ट्री के सौन्दर्य और शारीरिक शौष्ठव के अपने मानक और मापदंड होते हैं और यदि व्यक्ति उसे पाने के लिए मेहनत करता है या फिर किसी ट्रीटमेंट का सहारा लेता है तो वह गलत कैसे हुआ? और कैसे ऐसी बातों पर नीचा दिखाने के लिए वीडियो बनाया जा सकता है?
या फिर यह ध्रुव राठी जैसे लोगों द्वारा पूरे बॉलीवुड को एक प्रकार से धमकाने का प्रयास है कि वह व्यक्तिगत चीरहरण पर भी उतरेगा, यदि बॉलीवुड इसी प्रकार हिन्दू हितों पर बोलता रहा और उन विषयों पर फिल्में बनाता रहा, जिनका विरोध ये तमाम एजेंडाधारी करते हैं। हालांकि अब इनका कोई असर होने वाला नहीं है, क्योंकि लोगों को समझ आ रहा है कि एजेंडा क्या है, और सच क्या है?

















