केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 27 दिसंबर 2025 को नई दिल्ली में ‘एंटी-टेररिज्म कॉन्फ्रेंस-2025’ का उद्घाटन किया। ये दो दिवसीय सम्मेलन नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) की तरफ से आयोजित किया गया था। शाह ने देशभर में आतंकवाद-रोधी ढांचे को मजबूत करने की बात की और आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित रखने के लिए एक “अभेद्य एंटी-टेररिज्म ग्रिड” बनाने का आह्वान किया।
इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करने की जरूरत
शाह ने कहा कि आतंकवाद के बदलते खतरों से निपटने के लिए पूरे देश में एक मजबूत और अभेद्य ग्रिड तैयार करना बहुत जरूरी है। इसके साथ ही उन्होंने सभी राज्यों में एक समान एंटी-टेरर स्क्वॉड (ATS) की संरचना लागू करने पर जोर दिया। उन्होंने राज्यों के डीजीपी को निर्देश दिया कि इसे जल्द से जल्द लागू करें। उनका कहना था कि हर राज्य में ऑपरेशनल एकरूपता होनी चाहिए, ताकि खतरों का सही आकलन हो सके।
जांच की तारीफ
शाह ने दिल्ली में हुए ब्लास्ट की जांच की खूब सराहना की। उन्होंने जम्मू-कश्मीर पुलिस और अन्य एजेंसियों की जांच को “वाटरटाइट” बताया और कहा कि ये कोई आम पुलिसिंग नहीं, बल्कि शानदार काम था। एक सतर्क अधिकारी की वजह से कश्मीर में लगे कुछ पोस्टर से शुरू हुई जांच ने “डॉक्टर मॉड्यूल” को पकड़ा और तीन टन विस्फोटक बरामद कर लिए, जो फटने से पहले ही रोक लिए गए। शाह बोले, “एक जागरूक अधिकारी पूरे देश को बड़ी मुसीबत से बचा सकता है।”
पहलगाम आतंकी हमले की जांच की भी उन्होंने तारीफ की। कहा कि पूरी दुनिया की एजेंसियां इसे पढ़ेंगी और ये जांच पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंच पर मुश्किल में डाल देगी।
ऑपरेशन सिंदूर और महादेव
शाह ने बताया कि पहलगाम हमले के बाद भारतीय फोर्सेस ने पहली बार दोहरी रणनीति अपनाई। “ऑपरेशन सिंदूर” में मास्टरमाइंड्स को सजा दी गई, जबकि “ऑपरेशन महादेव” में जमीन पर काम करने वालों को खत्म किया गया।
संगठित अपराध पर 360-डिग्री स्ट्राइक
गृह मंत्री ने संगठित अपराध और आतंकवाद के बीच गहरा रिश्ता बताया। बोले कि एक्सटॉर्शन करने वाले क्रिमिनल सिंडिकेट जब लीडरशिप विदेश चली जाती है, तो वो आतंक को सपोर्ट करने लगते हैं। इसे रोकने के लिए उन्होंने “360-डिग्री स्ट्राइक” प्लान की घोषणा की, जो जल्द लॉन्च होगा। इसके लिए नई डेटाबेस तैयार की गई हैं।
ट्रायल-इन-एब्सेंटिया और डेटा शेयरिंग
शाह ने कहा कि विदेश भागे फरार आतंकियों पर “ट्रायल-इन-एब्सेंटिया” लागू होना चाहिए, ताकि उन्हें वापस आकर न्याय का सामना करना पड़े। साथ ही “नीड टू नो” की जगह “ड्यूटी टू शेयर” का सिद्धांत अपनाना चाहिए। NATGRID और NIDAAN जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल अनिवार्य करना होगा।
तीन नए टूल लॉन्च
उन्होंने तीन डिजिटल टूल लॉन्च किए: एनआईए का अपडेटेड क्राइम मैनुअल, ऑर्गनाइज्ड क्राइम नेटवर्क डेटाबेस, और लॉस्ट-लूटेड हथियारों का पूरा डेटाबेस।
चुनौतियां और भविष्य
शाह ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था दुनिया की चौथी सबसे बड़ी हो गई है, तो आंतरिक सुरक्षा की चुनौतियां भी बढ़ेंगी। आतंक के इकोसिस्टम को पूरी तरह खत्म करने के लिए “रूथलेस अप्रोच” जरूरी है। ये काम आने वाली पीढ़ियों की सुरक्षा तय करेगा।

















