बांग्लादेश में हिन्दुओं के खिलाफ इस्लामिक कट्टरता चरम पर है। इस कारण से हिंदू अल्पसंख्यकों की हालत इन दिनों बहुत नाजुक बनी हुई है। हाल की कुछ घटनाओं ने उनके मन में डर का माहौल पैदा कर दिया है, और अब वे भारत से मदद की गुहार लगा रहे हैं।
हाल की हिंसक घटनाएं
बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों में हिंदुओं पर हमले बढ़ गए हैं। हाल ही में दीपू चंद्र दास और अमृत मंडल नाम के दो हिंदू युवकों की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। ये लिंचिंग की घटनाएं हिंदू समुदाय के लिए बहुत बड़ा झटका बनीं। लोग कह रहे हैं कि अब सड़क पर चलते वक्त भी धर्म को लेकर ताने सुनने पड़ते हैं, और कहीं ये ताने हिंसा में न बदल जाएं, इसका डर हर वक्त सताता रहता है।
रंगपुर, ढाका, चटगांव और मयमनसिंह जैसे इलाकों में रहने वाले हिंदू परिवार अब रोजाना डर के साथ जी रहे हैं। एक 52 साल के रंगपुर निवासी ने बताया, “हम रोज अपने धर्म के लिए अपमान सहते हैं, लेकिन चुप रहते हैं क्योंकि विरोध करने पर भीड़ हमला कर सकती है। हमें लगता है कि हमारा अंजाम भी दीपू या अमृत जैसा न हो जाए। हम फंसे हुए हैं, भागने की कोई जगह नहीं दिखती।”
तारिक रहमान की वापसी ने बढ़ाई चिंता
25 दिसंबर 2025 को बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेता तारिक रहमान 17 साल के लंदन निर्वासन के बाद वापस ढाका लौट आए। वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे हैं और बीएनपी के कार्यकारी अध्यक्ष हैं। फरवरी 2026 में होने वाले चुनाव में उन्हें प्रधानमंत्री पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है।
हिंदू समुदाय में उनकी वापसी से डर और बढ़ गया है। कई लोग उन्हें कट्टरपंथी रुख वाला मानते हैं। ढाका के एक हिंदू ने कहा, “दीपू दास की हत्या से पहले ही हम डरे हुए थे। अब तारिक रहमान की वापसी ने चिंता दोगुनी कर दी है। अगर बीएनपी सत्ता में आई तो हालात और खराब हो सकते हैं। शेख हसीना की अवामी लीग ही हमारे लिए एकमात्र सुरक्षा की ढाल थी।” विशेषज्ञों का कहना है कि राजनीतिक बदलाव, कट्टर ताकतों का उभार और हाल की हिंसा ने हिंदुओं के भविष्य को और अनिश्चित बना दिया है।
भारत से अपील और सीमा खोलने की मांग
बांग्लादेश के हिंदू अब खुलकर भारत से मदद मांग रहे हैं। वे चाहते हैं कि सीमा खोल दी जाए ताकि जरूरत पड़ने पर जान बचाई जा सके। मयमनसिंह के एक निवासी ने कहा, “सीमा खोलने का मतलब यह नहीं कि सब भाग जाएं। बस इतना भरोसा चाहिए कि अगर हिंसा बढ़ी तो बचाव का रास्ता हो।”
निखिल बंगला समन्वय समिति के अध्यक्ष डॉ. सुभोध बिस्वास ने कहा, “अब सिर्फ बयानबाजी नहीं चलेगी। बांग्लादेश के हिंदू केवल भारत पर भरोसा कर सकते हैं। लोग मारे जा रहे हैं, लेकिन सीमाएं बंद हैं। हम विरोध प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।”
सनातन जागरण मंच के एक कार्यकर्ता ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “बांग्लादेश में करीब 2.5 करोड़ हिंदू रहते हैं। यह कोई छोटी संख्या नहीं है। लेकिन संगठन सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। हम एक बड़े संकट की तरफ बढ़ रहे हैं।”
ढाका के 40 साल के एक व्यक्ति ने कहा, “रोजी-रोटी सबसे जरूरी है। भारत भागना अनिश्चित भविष्य है। यहां अगर हिंदू प्रतीक पहन लें तो लोग भारतीय एजेंट कह देते हैं।”

















