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UK पुलिस की नई यूनिफॉर्म: मुस्लिम महिलाओं के लिए मैग्नेटिक हिजाब

लेस्टरशायर पुलिस और डी मॉन्टफोर्ट यूनिवर्सिटी के सहयोग से विकसित 'मैग्नेटिक हिजाब' अब उत्पादन में है। यह हिजाब खींचे जाने पर अलग हो जाता है, जिससे स्ट्रैंगुलेशन का खतरा कम होता है और मुस्लिम महिलाओं की भर्ती बढ़ाने का लक्ष्य है।

Written byसोनाली मिश्रासोनाली मिश्रा — edited by कुलदीप सिंह
Dec 23, 2025, 02:00 pm IST
in विश्व
UK Police Magnetic Hijab

प्रतीकात्मक तस्वीर

क्या किसी देश की पुलिस में किसी मजहब विशेष के अनुसार यूनिफ़ॉर्म को संशोधित किया जा सकता है? क्या ऐसा हो सकता है कि पुलिस में नियुक्ति का आधार मजहबी पोशाक हो? निष्पक्ष मानी जाने वाली पुलिस को लेकर आम लोग भी ऐसी किसी भी संभावना से इनकार करेंगे, क्योंकि जब व्यक्ति पुलिस जैसी सेवाओं में जाता है तो वह उस देश के मूल्यों के अनुसार बनी यूनिफ़ॉर्म को ही पहनता है और यही स्वीकार्य माना जाता है।

परंतु एक वर्ग ऐसा भी है, जिसे अपनी गरिमा को बनाए रखने के लिए अपनी पोशाक अलग चाहिए या फिर संशोधन चाहिए। मजे की बात यह है कि यूरोप में कथित मल्टीकल्चरिज्म के नाम पर मजहबी लोगों को विशेषाधिकार भी दिए जा रहे हैं और वह भी वहाँ के अपने लोगों की कीमत पर और इसे लेकर वहाँ के लोगों के दिल में गुस्सा भी बहुत है। अब जो निर्णय पुलिस को लेकर लिया जा रहा है, उसने एक बार फिर से यही बहस आरंभ कर दी है। दरअसल पुलिस में मुस्लिम महिलाओं की संख्या में वृद्धि करने के लिए ऐसा हो सकता है कि पुलिस की यूनिफ़ॉर्म के साथ हिजाब को ऐसा बनाया जाए कि वह आसानी से बांधा जा सके। अर्थात उसे पहनने में आसानी हो।

मुस्लिम महिला पुलिस के लिए मैग्नेटिक हिजाब

डेली मेल के अनुसार पुलिस बलों में “मैग्नेटिक हिजाब” को लाया जा सकता है और यह इसलिए कि जिससे ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं पुलिस की नौकरी से जुड़ सकें। ये नई पोशाक इसलिए बनाई गई हैं कि जिससे महिलाओं का गला भी न घुटे और साथ ही उनकी गरिमा भी कायम रह सके।

गरिमा की रक्षा, परंतु किससे?

जब यह बात होती है कि मुस्लिम महिलाओं की गरिमा की रक्षा हो सके, तो एक बहुत बड़ा प्रश्न खड़ा होता है कि गरिमा की रक्षा किससे? क्या पुलिस बलों में हिजाब की बात करने वाले ये मानते हैं कि मुस्लिम लड़कियों पर श्वेत पुरुष गलत दृष्टि रखते हैं, इसलिए उन्हें पुलिस में रहते हुए भी अतिरिक्त सुरक्षा की आवश्यकता है? ब्रिटेन में लगातार ही यह बहस चल रही है कि पुलिस बल जैसी सेवाओं में अतिरिक्त मजहबी पोशाक की आवश्यकता क्या है?

और उसके बाद उस हिजाब को और भी अधिक सुविधाजनक बनाया जा रहा है? लोग प्रश्न कर रहे हैं कि आखिर इतना विशेषाधिकार क्यों? जो लोग अपनी पोशाक को लेकर इतने आग्रही हैं, क्या वे लोग निष्पक्ष रूप से कार्य कर सकेंगे?

क्या हैं ये मैग्नेटिक हिजाब?

अब प्रश्न यह उठता है कि ये मैग्नेटिक हिजाब हैं क्या? इन हिजाबो में ऐसी व्यवस्था है कि यदि किसी संदिग्ध के साथ किसी हिजाब पहनी हुई महिला अधिकारी की मुठभेड़ होती है और उसका हिजाब खींचा जाता है तो हिजाब का निचला हिस्सा इस तरह खुले कि अधिकारी के बाल न दिख सकें। और इस प्रकार मुस्लिम महिला अधिकारियों की गरिमा भी बनी रहेगी।

तीन साल के शोध और प्रयास के बाद यह हिजाब बना है

ब्रिटेन में हिजाब कई पुलिस बलों में काफी समय से यूनिफ़ॉर्म का हिस्सा बना हुआ है। सबसे पहले नॉर्थ यॉर्कशायर पुलिस ने एक दो पीस वाली डिजाइन का हिजाब अपनी मुस्लिम महिला पुलिस अधिकारियों को दिया था। न्यूजीलैंड पुलिस ने भी वर्ष 2021 में एक आपरैशनल हिजाब को प्रयोगात्मक रूप से आरंभ किया था। और मैग्नेटिक हिजाब को भी लीसेस्टरशायर पुलिस में पहले ही सभी योग्य अधिकारियों को दिया जा चुका है।

ये हिजाब लीसेस्टरशायर पुलिस ने डी मोंटफोर्ट यूनिवर्सिटी के साथ मिलकर बनाए और डिज़ाइन किए हैं। डेलीमेल के अनुसार फाइनल प्रोडक्ट अप्रूव होने से पहले डिज़ाइन टीम ने सेवारत मुस्लिम अधिकारियों के साथ काम किया था।

मुस्लिम महिला अधिकारियों के साथ प्रयोग

बीबीसी के अनुसार इस हिजाब को अनुमोदित करने से पहले कई बार मुस्लिम महिला अधिकारियों पर प्रयोग भी किया गया था। लेस्टरशायर पुलिस के एसोसिएशन ऑफ़ मुस्लिम पुलिस के फाउंडर डिटेक्टिव सार्जेंट यासीन देसाई ने कहा कि इस डिज़ाइन को बनाने में तीन साल लगे। तीन साल की कड़ी मशक्कत के बाद यह नया उत्पाद बना, जिसे “ब्लू लाइट हिजाब” कहा जाता है और यासीन के अनुसार हिजाब का “निचला हिस्सा अलग होने में सक्षम है और अधिकारी की अपनी गरिमा भी सुरक्षित रहेगी।“ यासीन के अनुसार तीन साल के शोध और विकास के बाद इस मैग्नेटिक हिजाब का आना शानदार है और इस डिजाइन को और आगे लेकर जाना है।

यह भी कहा जा रहा है कि अन्य पुलिस बल भी इस हिजाब को खरीदने और शामिल करने के इच्छुक हैं, जिससे कि मुस्लिम महिलाएं बिना किसी रुकावट के पुलिस बल में शामिल हो सकें। इन हिजाब को अन्य आवश्यक सेवाओं में कार्य करने वाली मुस्लिम महिलाओं के लिए भी प्रयोग किया जाएगा। यासीन देसाई का कहना है कि इस हिजाब के आने से ज्यादा से ज्यादा मुस्लिम महिलाएं पुलिस बल में शामिल होंगी।

ब्रिटेन में मजहबी एजेंडे का विरोध करने वाले लोग इस “मैग्नेटिक हिजाब” को लेकर आलोचना कर रहे हैं। उनका कहना है कि इससे और भी अधिक कट्टरता फैलेगी। basil the great नामक यूजर ने अपने एक्स प्रोफ़ाइल पर लिखा कि The UK is a mess। और उन्होंने यह भी लिखा कि इस मैग्नेटिक हिजाब की डिजाइन बनाने में जो “शोध” हुआ है, उसमें £500,000 तक की लागत आई है।

 

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