मुस्लिम—बहुल किशनगंज जिले में सरकार सैनिक कैंप बनवाना चाहती है, लेकिन स्थानीय जन प्रतिनिधि इसे रोकने के लिए पटना से लेकर दिल्ली तक लगा रहे हैं दौड़। वहीं विश्व हिंदू परिषद ने कहा है कि सुरक्षा को देखते हुए यह कैंप बनना ही चाहिए।
बिहार का सीमावर्ती जिला किशनगंज सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र है। यह जिला पश्चिम में नेपाल, उत्तर-पूर्व में बांग्लादेश तथा पश्चिम बंगाल के चिकननेक कॉरिडोर के बिल्कुल समीप स्थित है, जिसे देश की सामरिक सुरक्षा की ‘लाइफलाइन’ माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसी क्षेत्र को निशाना बनाकर भारत को रणनीतिक रूप से अलग-थलग करने की साजिशें रची जाती रही हैं।
वर्तमान परिदृश्य में बांग्लादेश में भारत-विरोधी प्रदर्शनों तथा चिकननेक कॉरिडोर को काटने जैसी धमकियों ने सुरक्षा चिंताओं को और गंभीर बना दिया है। इन परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए विश्व हिन्दू परिषद किशनगंज के जिला मंत्री संजय सिंह ने कहा कि किशनगंज की सुरक्षा अब केवल स्थानीय मुद्दा नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा विषय बन चुका है।
उन्होंने कहा कि कोचाधामन और बहादुरगंज अंचल में चयनित भूमि पर प्रस्तावित सैनिक कैंप का निर्माण राष्ट्रहित में एक सराहनीय और आवश्यक कदम है। जानकारी के अनुसार, बहादुरगंज अंचल की नटुआपारा पंचायत तथा कोचाधामन अंचल की बड़ीजान पंचायत में लगभग 260 एकड़ भूमि पर सैनिक कैंप प्रस्तावित है। हालांकि, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर अब राष्ट्रविरोधी तत्व सक्रिय हो गए हैं और किसानों की आड़ लेकर इस महत्वपूर्ण परियोजना में बाधा डालने का प्रयास किया जा रहा है।
संजय सिंह ने बताया कि प्रस्तावित भूमि थाना संख्या 380 एवं 381 (मौजा सकोर, नटुआपारा) तथा थाना संख्या 386 (मौजा सतभिटा) के अंतर्गत आती है। उन्होंने आरोप लगाया कि किशनगंज सांसद डॉ जावेद आजाद केन्द्रीय रक्षा मंत्री एवं एआईएमआईएम के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरूल ईमान ने बिहार के गृह मंत्री सह उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर उक्त भूमि अधिग्रहण को रोकने का प्रयास कर रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। जनप्रतिनिधियों ने दलील दी है कि इस भूमि अधिग्रहण से हजारों किसान परिवार और गरीब खेतिहर मजदूर सीधे तौर पर प्रभावित होंगे, जिनके लिए यही जमीन आजीविका का एकमात्र साधन है।
विहिप जिला मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि संगठन की सरकार से मांग है कि इसी प्रस्तावित भूमि पर सैनिक कैंप का निर्माण हर हाल में किया जाए, क्योंकि यह स्थान नेपाल जाने वाले मुख्य मार्ग का प्रमुख द्वार है। यहां सैनिक कैंप बनने से नेपाल सीमा से होने वाली तस्करी, घुसपैठ, मानव तस्करी और पशु तस्करी जैसी गतिविधियों पर प्रभावी अंकुश लगेगा, साथ ही पूरे जिले का सुरक्षा घेरा मजबूत होगा।
उन्होंने यह भी कहा कि किशनगंज जिला जनसंख्या के दृष्टिकोण से अल्पसंख्यक बहुल क्षेत्र है, ऐसे में यहां की हिन्दू आबादी और हिन्दू आस्था स्थलों की सुरक्षा एक गंभीर विषय बन चुकी है। बीते वर्ष में कई घटनाएं सामने आई हैं—कभी कलश शोभा यात्राओं को रोका गया, तो कभी मंदिरों में भगवान की मूर्तियों को खंडित किया गया। ऐसी अनेक घटनाएं जिले के इतिहास में दर्ज हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
अंत में संजय सिंह ने कहा कि यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में यह क्षेत्र और अधिक संवेदनशील बन सकता है। इसलिए केंद्र और राज्य सरकार को राजनीतिक दबाव से ऊपर उठकर राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए सैनिक कैंप निर्माण की प्रक्रिया शीघ्र पूरी करनी चाहिए।

















