पश्चिम बंगाल में चल रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के डर से वहां रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठिए अब बिहार के सीमावर्ती जिले किशनगंज में शरण लेने लगे हैं। यह सुरक्षा के दृष्टिकोण से बड़ा खतरा है। चूंकि बिहार का किशनगंज जिला पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिला की सीमा से बिल्कुल सटा हुआ है। इसलिए घुसपैठिए किशनगंज जिले में आ रहे हैं। यह बात और कोई नहीं, बल्कि ठाकुरगंज के नवनिर्वाचित जदयू विधायक गोपाल कुमार अग्रवाल कह रहे हैं। उनके अनुसार पश्चिम बंगाल से आने वाली बसों, टेम्पो और ट्रेनों के माध्यम से घुसपैठिए ठाकुरगंज प्रखंड में रहने वाले अपने रिश्तेदारों के यहां आ रहे हैं या फिर और कोई सुरक्षित ठिकानों पर शरण लेने आ रहे हैं। यह जांच का विषय है।
वहीं दूसरी ओर किशनगंज के कांग्रेस सांसद डॉ मुहम्मद जावेद आज़ाद ने इसे सिरे से खारिज करते हुए कहा, ”जदयू और भाजपा के लोग घुसपैठ के नाम पर जनता को गुमराह कर रहे हैं और बेवकूफ बना रहे हैं। बिहार चुनाव के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और गृहमंत्री अमित शाह का जब हिंदू-मुस्लिम कार्ड धीमा पड़ गया, तो प्रचार शुरू कर दिया कि बिहार में घुसपैठिए बहुत हैं। पहले झारखंड, फिर बिहार और अब बंगाल में एनडीए के लोगों को घुसपैठिए नजर आ रहे हैं। लेकिन एसआईआर के बाद किशनगंज में एक भी घुसपैठिया चिन्हित नहीं हुआ है।”
डॉ मुहम्मद जावेद आज़ाद वही बात कह रहे हैं, जो हर मुसलमान नेता कहता रहा है। आपको बता दें कि मुसलमान नेता चाहे किसी भी पार्टी को हो वह घुसपैठ को सिरे नकारता रहा है। लेकिन सचाई यह है कि किशनगंज जिले में घुसपैठ खूब हुई है और इसको वही देख सकता है, जो निष्पक्ष राय रख सकता है।
जिलाधिकारी विशाल राज ने कहा कि कुछ मामलों की जानकारी मिली है। इनकी जांच करायी जा रही है। इस मामले में जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। उन्होंने कहा कि संबंधित विभाग के अधिकारियों को भी सतर्क कर दिया गया है। यहां के रेलवे स्टेशन,बस स्टैंड एवं जिले की सीमा पर विशेष निगरानी का निर्देश दिया गया है। जिलाधिकारी ने आम लोगों से अपील करते हुए कहा कि जिस किसी को भी अपने आसपास या अन्य किसी स्थानों पर कोई संदिग्ध दिखाई दे तो तुरंत संबंधित क्षेत्र के थाना या अधिकारियों को सूचित करें।

















