इस्लामी आतंकवाद : निंदा की रस्म, जिहादी सोच पर चुप्पी
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इस्लामी आतंकवाद : निंदा की रस्म, जिहादी सोच पर चुप्पी

पूरा पश्चिम (ऑस्ट्रेलिया को पश्चिम का ही पुछल्ला मानते हुए) यह समझता, सोचता और खुशफहमी में रहता है कि कैक्टस भी उसके यहां आकर गुलाब के फूल उगलने लगेंगे। ऑस्ट्रेलिया में इस्लामिक स्टेट से प्रभावित ताजा आतंकी हमले के बाद यह सवाल उठ रहा है

Written byमृदुल त्यागीमृदुल त्यागी
Dec 22, 2025, 12:51 pm IST
in विश्व
ऑस्ट्रेलिया में बाॅन्डी तट पर जिहादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते लोग।

ऑस्ट्रेलिया में बाॅन्डी तट पर जिहादी हमले में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देते लोग।

पूरा पश्चिम (ऑस्ट्रेलिया को पश्चिम का ही पुछल्ला मानते हुए) यह समझता, सोचता और खुशफहमी में रहता है कि कैक्टस भी उसके यहां आकर गुलाब के फूल उगलने लगेंगे। ऑस्ट्रेलिया में इस्लामिक स्टेट से प्रभावित ताजा आतंकी हमले के बाद यह सवाल उठ रहा है कि क्या वामपंथियों ने इस कदर पश्चिम और ऑस्ट्रेलिया को अपनी चपेट में ले लिया है कि ये देश अपने नागरिकों की जान-माल की कीमत पर भी जिहादी मुसलमानों के चरणों में लहलोट रहेंगे? समवेत स्वर इस आतंकी हमले की निंदा तक तो पहुंचे, लेकिन इस्लाम की जड़ में गहरे तक बैठी जिहादी सोच पर एक शब्द मुंह से न निकला। क्या दुनिया का एक हिस्सा यह स्वीकार कर चुका है कि मुसलमानों को गले लगाने, शरण देने, नागरिकता देने और सभी सुविधाओं को देने की यह कीमत जायज है! ब्रिटेन में श्वेत समाज की ढाई लाख से अधिक बहन-बेटियों के बलात्कार, फ्रांस की सड़कों पर जिहादी हिंसा और कर्फ्यू, स्वीडन का महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश बन जाना। ऑस्ट्रेलिया में हुआ आतंकी हमला इसी की अगली कड़ी है।

ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर मुस्लिम बाप-बेटों ने हनुक्का का पर्व मना रहे यहूदियों की भीड़ पर स्वचालित हथियारों से ताबड़तोड़ फायरिंग की, जिसमें 15 लोग मारे गए। आस्ट्रेलियाई अधिकारियों ने साजिद अकरम और उसके बेटे नावेद अकरम को इस घटना के लिए जिम्मेदार बताया है। उनका कहना है कि दोनों इस्लामिक स्टेट की विचारधारा से प्रेरित थे। हाल ही में दोनों फिलीपींस से जिहाद की ‘हैवी डोज’ लेकर आए थे। नावेद ऑस्ट्रेलिया में सक्रिय कट्टरपंथी मौलाना विस्सम हद्दाद के भी संपर्क में था। ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज ने इस हमले के बाद कहा कि इस बात के सुबूत हैं कि यह घटना आईएस से प्रेरित थी। आईएस से जुड़े प्रतीक जांच में सामने आए हैं। ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री का हिचकिचाता-सा बयान यह साफ करता है कि दुनिया में काफी कुछ बदलने के बाद भी वामपंथियों के लिए कुछ नहीं बदला।

7 अक्तूबर, 2023 को यहूदियों को दुनिया से मिटा डालने के इरादे से जिहादी सोच वाले मुसलमानों ने इस्राएल पर हमला किया था। अब दो साल बाद फिर दो मुसलमानों को यहूदियों का कत्ल-ए-आम किया है। इस्राएली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस हमले पर कहा कि ऑस्ट्रेलिया की नीतियां यहूदी विरोधी आग में पेट्रोल डालने का काम कर रही हैं। यहूदी विरोधी कैंसर तब फैलता है, जब नेता चुप रहते हैं। नेतन्याहू ने यह बात ऐसे ही नहीं कही है। ऑस्ट्रेलिया में प्रमुख स्थलों पर यहूदी विरोधी प्रदर्शन हुए, खुलेआम यहूदियों को मार डालने के नारे लगे। दीवारों पर यहूदी विरोधी नारे लिखे गए। इस बारे में नेतन्याहू का दावा है कि उन्होंने कुछ महीने पहले ही ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री को पत्र लिखा था। इसमें उन्होंने कहा था कि वहां की सरकार की नीतियां यहूदियों के खिलाफ नफरत को बढ़ावा देने वाली हैं।

इतनी जघन्य घटना पर दुनिया भर से जैसी प्रतिक्रिया आई, वह भी चौंकाने वाला है। यूरोप के सभी देशों ने रस्म अदायगी वाले बयान जारी किए। ठीक वैसे ही, जैसे आप भारत में हुए पहलगाम या पठानकोट आतंकी हमले के समय सुन चुके हैं।

… पर जिहाद का जिक्र नहीं

यूरोप के नेताओं के बयानों पर गौर कीजिए। इनकी निंदा इतनी औपचारिक है कि उसमें कहीं भी इस्लामी कट्टरपंथ और जिहाद का नाम तक नहीं है।
फ्रांस : राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने आतंकी हमले पर गहरा दुख जताते हुए कहा कि फ्रांस घृणा व यहूदी-विरोधी से लड़ता रहेगा। आतंकवाद और नफरत से लड़ता रहेगा।
जर्मनी : जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वेडफुल ने हमले को ‘घृणा-आधारित आतंकवाद’ करार दिया। उन्होंने पीड़ितों और घायलों के प्रति सहानुभूति जताई।
यूनाइटेड किंगडम : ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने हमले को ‘बहुत दुखद’ बताया तथा संवेदना व समर्थन प्रकट किया। उन्होंने नफरत और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया।
पोलैंड : पोलैंड के प्रधानमंत्री डोनाल्ड टस्क ने भी घटना पर गहरा दुख जताया और कहा कि सभ्य समाज में नफरत और आतंकवाद की कोई जगह नहीं है।
स्पेन : स्पेन के विदेश मंत्री जोसे मैनुएल अल्बारेस ने हमले को ‘हिंसक आतंकवादी घटना’ बताया। उन्होंने पीड़ितों के प्रति सहानुभूति दिखाई।
नॉर्वे : नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनेस गार स्टोरे ने ‘भीषण हमले’ को ‘सबसे कड़े शब्दों में’ नकारा और पीड़ितों के प्रति संवेदना जताई।

ऐसे बढ़ता है जिहादी जिन्न

बॉन्डी बीच हमले से जिहादी पैटर्न को आप समझ सकते हैं। यह भी समझ सकते हैं कि जिहादी फितूर न जनसंख्या का मोहताज है और न ही उसे शिक्षा व विकास से कोई फर्क पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया में मुसलमानों की जनसंख्या सिर्फ 3.2 प्रतिशत है। फिर भी ऐसा आतंकवादी हमला आखिर कैसे हुआ?

2014 तक ऑस्ट्रेलिया में आतंकवाद या जिहादी गतिविधियां नहीं थीं। 2014 के बाद से वहां मुस्लिम आबादी बढ़ने लगी। 2021 की जनगणना के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया में 8,13,392 लोगों ने अपनी पहचान मुस्लिम के रूप में दी। 2016 में मुस्लिमों की आबादी 6,04,235 थी। मात्र 5 साल में इनकी आबादी 34.6 प्रतिशत बढ़ गई। यह ऑस्ट्रेलिया के इतिहास में किसी समुदाय की सबसे तेज वृद्धि दर है। इसके लिए मुसलमानों के जाने-पहचाने के दो पैंतरे जिम्मेदार हैं। पहली तो मुस्लिमों की जन्म दर और दूसरी हिजरत (यानी इमिग्रेशन)। अकेले 2023 में ही 29,892 मुसलमानों को स्थायी रिसेटेलमेंट दिया गया है।

अब जरा बढ़ती आबादी की रोशनी में ऑस्ट्रेलिया में होने वाली जिहादी घटनाओं को देखिए। जैसे-जैसे आबादी बढ़ती गई, दुनिया भर में जिहाद के नाम पर होने वाली जंग में ऑस्ट्रेलिया से जाने वालों की तादाद बढ़ती रही। अकेले सीरिया और इराक में 500 से अधिक ऑस्ट्रेलियाई जाकर आईएस में शामिल हुए। 2014 से 2020 के बीच ऑस्ट्रेलिया में इस्लामी जिहाद की नौ घटनाएं हुईं। इनमें गोलीबारी, चाकूबाजी तक शामिल हैं। इस्लामी आतंकवाद का पोस्टरब्वाय था-खालिद शरूफ। 2014 की रक्का की वह तस्वीर याद कीजिए, जिसमें सात साल का बच्चा एक कटा हुआ सिर पकड़े था। वह खालिद शरूफ का बेटा था। यह खालिद ऑस्ट्रेलियाई ही था।

Topics: ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डीऑस्ट्रेलिया में इस्लामिक स्टेटजिहादी मुसलमानऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्रीहिचकिचाता-साजिहादी जिन्नआतंकी हमलामृदुल त्यागी
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