भुवनेश्वर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के स्ययंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के अवसर पर पंच परिवर्तन की अवधारणा के माध्यम से राष्ट्र के पुनर्निर्माण हेतु समाज के साथ व्यापक स्तर पर कार्य करने के प्रयासों में जुटे हैं । यह बात आरएसएस ओडिशा (पूर्व) प्रांत के प्रांत प्रचारक बिपिन प्रसाद नंद ने कही। वे भुवनेश्वर स्थित उत्कल विपन्न सहायता समिति के सभागार में आयोजित सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स के एक विशेष कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।
शताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित इस कार्यक्रम में ओडिशा (पूर्व) एवं ओडिशा (पश्चिम) दोनों प्रांतों के प्रचार प्रमुख सृष्टिधर बिश्वाल सहित अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी भी उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से आए सौ से अधिक सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स ने भाग लिया, जो विभिन्न डिजिटल प्लेटफार्मों पर सक्रिय हैं।
संघ सौ वर्षों से भारत में हिंदू समाज को संगठित करने का कार्य कर रहा है
अपने संबोधन में बिपिन प्रसाद नंद ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले एक सौ वर्षों से भारत में हिंदू समाज को संगठित करने के एकमात्र उद्देश्य के साथ निरंतर कार्य कर रहा है। इस दीर्घ यात्रा में संघ को अनेक प्रतिकूल परिस्थितियों और विरोध का सामना करना पड़ा, लेकिन इन सबके बावजूद संघ का मूल उद्देश्य आज भी यथावत है और उसमें किसी प्रकार का परिवर्तन नहीं आया है ।

आरएसएस के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन और विचारों पर प्रकाश डालते हुए नंद ने कहा कि डॉ. हेडगेवार आजन्म देशभक्त थे। उनका क्रांतिकारी आंदोलनों से भी निकट संबंध रहा और उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में भी कार्य किया। उन्होंने कहा कि, भारत की पराधीनता के कारणों पर गहन चिंतन के बाद डॉ. हेडगेवार इस निष्कर्ष पर पहुंचे कि हिंदू समाज का संगठन ही भारत के पुनरुत्थान की कुंजी है।
नंद ने स्पष्ट किया कि आरएसएस कोई नया या अपरिचित कार्य नहीं कर रहा है। “संघ महान भारतीय चिंतकों और मनीषियों—स्वामी विवेकानंद, महर्षि अरविंद और भगिनी निवेदिता—द्वारा प्रतिपादित विचारों को व्यवहार में उतारने का प्रयास कर रहा है । शताब्दी वर्ष के विशेष फोकस पर बोलते हुए नंद ने बताया कि संघ के स्वयंसेवक समाज के साथ मिलकर पंच परिवर्तन को आगे बढ़ा रहे हैं। इस पहल के अंतर्गत पांच प्रमुख आयाम शामिल हैं— (1) स्वबोध यानी आत्मबोध और स्वदेशी पर बल, (2) नागरिक कर्तव्य, (3) पर्यावरण संरक्षण, (4) सामाजिक समरसता और (5) कुटुंब प्रबोधन।
स्वयंसेवक चला रहे हैं वृक्षारोपण और प्लास्टिक के उपयोग के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान
उन्होंने कहा कि आरएसएस का मानना है कि पंच परिवर्तन कार्यक्रम का प्रभावी और व्यवस्थित क्रियान्वयन समाज में व्यापक और सकारात्मक बदलाव ला सकता है। संघ ‘स्व’ आधारित व्यवस्था का आग्रह करता है। स्वयंसेवक स्वबोध, स्वाभिमान और स्वदेशी भाव के माध्यम से लोगों को अपने व्यक्तिगत और पारिवारिक जीवन में अनुशासन, सार्थकता और उत्कृष्टता अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं । पर्यावरण संरक्षण को पंच परिवर्तन का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताते हुए उन्होंने कहा कि स्वयंसेवक वृक्षारोपण, जल संरक्षण और प्लास्टिक के उपयोग के विरुद्ध जन-जागरूकता अभियान चला रहे हैं।
उन्होंने कहा कि प्रकृति की रक्षा करना सृष्टि की रक्षा के लिए अनिवार्य है । नागरिक कर्तव्यों के महत्व पर प्रकाश डालते हुए नंद ने कहा कि स्वबोध से नागरिक अपने दायित्वों के प्रति अधिक सजग बनते हैं। जब नागरिक कानून का पालन करते हुए अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करते हैं, तब राष्ट्र स्वतः ही समृद्धि और विकास की ओर अग्रसर होता है । सामाजिक समरसता के विषय में नंद ने कहा कि भेदभाव और सामाजिक विभाजन को समाप्त करना सामूहिक दायित्व है।
कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकता है
समानता और सद्भाव से जातिगत भेदभाव समाप्त होगा और आपसी सम्मान की भावना विकसित होगी। इस दिशा में आरएसएस के स्वयंसेवक निरंतर कार्य कर रहे हैं ताकि समाज का कोई भी वर्ग उपेक्षित या भेदभाव का शिकार न हो। उन्होंने परिवार को समाज की मूल इकाई बताते हुए कहा कि बढ़ते पश्चिमी प्रभाव के कारण पारंपरिक भारतीय परिवार व्यवस्था कमजोर हो रही है और पारिवारिक मूल्यों में गिरावट देखी जा रही है। इसी कारण कुटुंब प्रबोधन को पंच परिवर्तन का एक प्रमुख आयाम बनाया गया है। परिवार व्यक्ति और समाज—दोनों का हर प्रकार से पोषण करता है। परिवारों को सुदृढ़ बनाकर बच्चों में संस्कारों का विकास किया जा सकता है।
नंद ने कहा कि कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से एकल परिवारों की बढ़ती प्रवृत्ति पर अंकुश लगाया जा सकता है और भारत की प्राचीन पारिवारिक परंपराओं को पुनर्जीवित किया जा सकता है। आज भारतीय परिवार मूल्यों को सुदृढ़ करने की महती आवश्यकता है । पंच परिवर्तन के अंतर्गत नागरिक कर्तव्य के आयाम को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि किसी भी देश का समग्र विकास तभी संभव है, जब उसके नागरिक अपने कर्तव्यों के प्रति जागरूक और उनके पालन के प्रति प्रतिबद्ध हों। स्वयंसेवक इस दिशा में व्यक्तिगत उदाहरण प्रस्तुत कर रहे हैं और समाज के साथ मिलकर इस प्रयास को आगे बढ़ा रहे हैं ।
अपने संबोधन के समापन पर बिपिन प्रसाद नंद ने कहा कि वास्तविक सामाजिक परिवर्तन समाज की सज्जन और रचनात्मक शक्तियों के सामूहिक प्रयास से ही संभव है। आरएसएस सम्पूर्ण समाज को एकजुट कर व्यापक सामाजिक परिवर्तन की दिशा में आगे बढ़ने के लिए संकल्पित है । कार्यक्रम में राज्य के विभिन्न हिस्सों से आए सोशल मीडिया इनफ्लुएंसर्स ने सक्रिय सहभागिता की और पंच परिवर्तन की अवधारणा को समाज तक पहुंचाने में अपनी भूमिका निभाने की प्रतिबद्धता जताई।

















