नई दिल्ली/ कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में कन्वर्टिड मृतक चमरा राम सलाम का शव दफनाने को लेकर हिंसा हुई है। जिसके बाद शव को बाहर निकालने का आदेश जारी किया गया। पंचनामा एवं पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के बाद शव काे जिले से बाहर रायपुर रवाना कर दिया गया है। यहां आदिवासी और मतांतरित समुदाय के बीच हिंसक झड़प हुई है। जिसके बाद जिले में विवाद और तनाव का माहौल बन गया है।
कैसे शुरू हुआ विवाद? क्या है मामला
गांव के सरपंच रजमन सलाम के पिता चमराराम सलाम की रविवार को अस्पताल में मृत्यु हो गई थी। जिसके बाद सरपंच ने अपने पिता को गांव में ही दफन किया। जिससे ग्रामीण नाराज हो गए और शव के दफन को लेकर जमकर विरोध किया। सूचना मिलने पर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया। लेकिन समाधान नहीं निकलने पर जमकर बवाल हुआ और हिंसक झड़प में कई ग्रामीण और पुलिसकर्मी घायल हो गए। यह मामला आमाबेड़ा क्षेत्र के बड़े तेवड़ा गांव का है।
छावनी में तब्दील हुआ पूरा इलाका….इस वजह से विरोध कर रहे थे ग्रामीण
ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा विधिक प्रावधानों के अनुसार शव को बाहर निकालने का आदेश जारी किया गया । शुक्रवार काे पूरे इलाके काे छावनी में तब्दील कर दिया गया। पुलिस महानिरीक्षक बस्तर रेंज, उप पुलिस महानिरीक्षक कांकेर, कलेक्टर कांकेर, पुलिस अधीक्षक कांकेर, पुलिस बल एवं कार्यपालिक दंडाधिकारी गांव में उपस्थित हैं। बताया जा रहा है कि वर्तमान में स्थिति नियंत्रित है और मामले को शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

ग्रामीणों का आरोप- आदिवासी रीति-रिवाजों से नहीं हुआ दफन संस्कार
70 वर्षीय चमरा राम सलाम की मृत्यु 16 दिसंबर को हुई थी। मृतक का पुत्र गांव का सरपंच है। सरपंच एवं मृतक के परिजनों द्वारा मृतक का दफन संस्कार गांव में अपनी निजी भूमि पर कर दिया था। चमरा राम सलाम की मृत्यु को लेकर संदेह व्यक्त करते हुए तथा दफन प्रक्रिया के संबंध में गांव के हजाराे ग्रामीण विरोध करते हुए शव को बाहर निकालने की मांग कर रहे थे। ग्रामीणों द्वारा यह आरोप भी लगाए जा रहे हैं कि दफन संस्कार स्थानीय आदिवासी रीति-रिवाजों के अनुसार नहीं किया गया। इस मुद्दे को लेकर गांव में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। ग्रामीण आपस में आमने-सामने आ गए तथा पत्थरबाजी की घटना हुई। जिसमें एएसपी अंतागढ़ आशीष बंछोर समेत 20 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। इलाके में धारा 144 लागू की गई है।
कन्वर्जन की घटनाओं को लेकर गांव में लगे पादरियों की एंट्री बैन के पोस्टर
इससे पहले कांकेर जिले में धर्म परिवर्तन की घटनाओं के बाद 14 गांवों में पास्टर और पादरियों के प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने का बोर्ड लगा दिया गया। ग्रामीणों का कहना है कि यह कदम उन्होंने अपनी परंपरा और संस्कृति की रक्षा के लिए उठाया है। इसी वजह से आदिवासी समुदाय और धर्म परिवर्तन कर चुके परिवारों के बीच दूरी बढ़ गई है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भी इन ग्राम सभाओं के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया था। कोर्ट ने माना कि जबरन या प्रलोभन देकर कन्वर्जन रोकने के लिए लगाए गए ये बोर्ड असंवैधानिक नहीं हैं, बल्कि स्थानीय संस्कृति की रक्षा के लिए ग्राम सभा का एहतियाती कदम हैं।
(एजेंसी इनपुट के साथ)

















