श्रीजगन्नाथ मंदिर की मेघनाद प्राचीर में फिर जल रिसाव, मंदिर प्रशासन ने ASI से तत्काल हस्तक्षेप का किया अनुरोध 
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श्रीजगन्नाथ मंदिर की मेघनाद प्राचीर में फिर जल रिसाव, मंदिर प्रशासन ने ASI से तत्काल हस्तक्षेप का किया अनुरोध 

यह मामला तब सामने आया, जब मेघनाद प्राचीर के कई हिस्सों विशेषकर इसके पूर्वी भाग  में ताजा जल रिसाव देखा गया।

Written byडॉ. समन्वय नंदडॉ. समन्वय नंद — edited by Lalit Fulara
Dec 15, 2025, 01:28 pm IST
inओडिशा

भुवनेश्वर: श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने पुरी स्थित श्रीमंदिर की मेघनाद प्राचीर (सीमांत दीवार) में दोबारा जल रिसाव पाए जाने पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। प्रशासन ने सदियों पुरानी इस संरचना की सुरक्षा के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से तत्काल मरम्मत और दीर्घकालीन संरक्षणात्मक कदम उठाने का आग्रह किया है।

यह मामला तब सामने आया, जब मेघनाद प्राचीर के कई हिस्सों विशेषकर इसके पूर्वी भाग  में ताजा जल रिसाव देखा गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन  के मुख्य प्रशासक अरविंद कुमार पाढ़ी ने एएसआई, पुरी सर्कल के अधीक्षण पुरातत्वविद् को पत्र लिखकर संरचना को और क्षति से बचाने के लिए तत्काल वैज्ञानिक हस्तक्षेप की मांग की है।

श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन के अनुसार, पिछले वर्ष भी मेघनाद प्राचीर के विभिन्न हिस्सों में इसी तरह का जल रिसाव सामने आया था। उस समय एएसआई के तकनीकी मार्गदर्शन में एसजेटीए के अभियंताओं द्वारा मरम्मत कार्य किए गए थे। इन कार्यों में दीवार पर जमी काई को हटाना तथा दरारों को ग्राउटिंग के माध्यम से सील करना शामिल था। इन उपायों से उस समय रिसाव अस्थायी रूप से रुक गया था, लेकिन अधिकारियों ने तभी यह स्पष्ट कर दिया था कि स्थायी समाधान के लिए व्यापक और वैज्ञानिक संरक्षण योजना आवश्यक है।

हालांकि, इन हस्तक्षेपों के बावजूद अब फिर से जल रिसाव शुरू हो गया है, जिससे मंदिर प्रशासन की चिंताएं बढ़ गई हैं। ताजा रिसाव के साथ दीवार की सतह पर काई का दोबारा उग आना लगातार नमी के प्रवेश का संकेत देता है और पिछले मरम्मत कार्यों की दीर्घकालिक प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करता है।
अपने आधिकारिक पत्र में मुख्य प्रशासक पाढ़ी ने एएसआई से संरचना की विस्तृत वैज्ञानिक जांच कराने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि इसमें संरचनात्मक मूल्यांकन और निर्माण सामग्री की तकनीकी जांच (मटीरियल डायग्नोस्टिक्स) शामिल होनी चाहिए, ताकि बार-बार हो रहे जल रिसाव के मूल कारण की पहचान की जा सके। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि स्थायी संरक्षण उपाय स्थापित संरक्षण मानकों और प्रोटोकॉल के अनुरूप ही किए जाएं, ताकि मंदिर की पवित्रता और संरचनात्मक अखंडता दोनों सुरक्षित रह सकें।

पत्र में पाढ़ी ने लिखा कि मैं श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी की मेघनाद प्राचीर के कुछ हिस्सों में फिर से देखे गए जल रिसाव की ओर आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहता हूं।  उन्होंने याद दिलाया कि पिछले वर्ष भी इसी तरह की समस्या सामने आई थी, जिसे एएसआई के तकनीकी सुझावों के अनुसार संबोधित किया गया था। इसके बावजूद, अब फिर से नए स्थान पर रिसाव का दिखना गंभीर चिंता का विषय है। मुख्य प्रशासक ने यह भी बताया कि रिसाव का संबंध संभवतः प्राचीर की कई जोड़-स्थलों (जॉइंट्स) में आई दरारों से है, जिनके माध्यम से आनंद बाजार नाले का गंदा पानी दीवार के भीतर प्रवेश कर रहा है। दीवार के बड़े हिस्से पर काई का जमाव लंबे समय से नमी के संपर्क में रहने का संकेत देता है, जो समय के साथ चिनाई (मेसनरी) को कमजोर कर सकता है।

श्री जगन्नाथ मंदिर की प्राचीनता और गहरे धार्मिक महत्व को देखते हुए एसजेटीए अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि बार-बार होने वाला जल रिसाव मेघनाद प्राचीर के दीर्घकालिक संरचनात्मक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। पाढ़ी ने एएसआई से आग्रह किया है कि स्थायी संरक्षण योजना के अंतिम रूप लेने तक, अंतरिम उपाय के रूप में एएसआई की तकनीकी निगरानी में तुरंत अस्थायी मरम्मत कार्य शुरू किए जाएं, ताकि किसी भी तात्कालिक क्षति को रोका जा सके। उल्लेखनीय है कि अब दीवार के तीन अलग-अलग स्थानों पर ताजा रिसाव देखा गया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि पिछली मरम्मत दीर्घकालिक सुरक्षा प्रदान करने में असफल रही है। एसजेटीए ने एक बार फिर व्यापक वैज्ञानिक सर्वेक्षण और टिकाऊ पुनर्स्थापन (रेस्टोरेशन) रणनीति की आवश्यकता पर जोर दिया है, ताकि इस ऐतिहासिक सीमांत दीवार के साथ-साथ संपूर्ण मंदिर परिसर की सुरक्षा और संरक्षण सुनिश्चित किया जा सके।

 

Topics: ASIOdishaShri Jagannath Templewater leakagetemple administration
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