15 अगस्त 1947 को भारत ब्रिटिश शासन से आजाद हो गया, लेकिन यह आजादी देश के हर हिस्से तक एक साथ नहीं पहुँची। उस समय गोवा भारत का हिस्सा नहीं था, बल्कि पुर्तगाल के अधीन एक उपनिवेश था। यही कारण है कि 1947 में जब पूरा देश स्वतंत्रता का उत्सव मना रहा था, तब गोवा अब भी विदेशी शासन की जंजीरों में जकड़ा हुआ था। गोवा मुक्ति दिवस इसी ऐतिहासिक अन्याय के अंत और गोवा की वास्तविक आजादी का प्रतीक है।
पुर्तगाल का गोवा पर लंबे समय तक कब्जा
पुर्तगाल ने 1510 में गोवा पर कब्जा किया था और लगभग 450 वर्षों तक यहां शासन किया। अंग्रेजों की तरह पुर्तगाली भी औपनिवेशिक शासक थे, लेकिन एक बड़ा अंतर यह था कि पुर्तगाल गोवा को अपना अभिन्न हिस्सा मानता था। इसलिए 1947 में भारत की आजादी के बाद भी पुर्तगाल ने गोवा को छोड़ने से साफ इनकार कर दिया। भारत सरकार की यह अपेक्षा कि गोवा स्वतः भारत में शामिल हो जाएगा, पूरी नहीं हुई।
गोवा में स्वतंत्रता आंदोलन की शुरुआत और संघर्ष
1947 के बाद गोवा में स्वतंत्रता की भावना और तेज हो गई। गोवावासियों ने महसूस किया कि भारत आजाद है, लेकिन वे अब भी गुलामी में जी रहे हैं। इसी दौर में गोवा में आजादी के आंदोलन तेज हुए। डॉ. राम मनोहर लोहिया जैसे राष्ट्रीय नेताओं ने गोवा आकर आंदोलन को दिशा दी। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला। सत्याग्रह, विरोध प्रदर्शन और जनसभाओं के जरिए पुर्तगाली शासन के खिलाफ आवाज उठाई गई। पुर्तगाली सरकार ने इन आंदोलनों को कठोरता से दबाया, कई स्वतंत्रता सेनानियों को जेल में डाला गया और उन पर अत्याचार किए गए।
गोवा की आजादी और राष्ट्रीय एकता
भारत ने शुरुआत में शांतिपूर्ण और कूटनीतिक रास्ता अपनाया। वर्षों तक पुर्तगाल से बातचीत की कोशिश की गई, लेकिन हर बार पुर्तगाल ने गोवा को भारत का हिस्सा मानने से इनकार कर दिया। जब सभी शांतिपूर्ण प्रयास विफल हो गए, तब भारत ने निर्णायक कदम उठाने का फैसला किया। दिसंबर 1961 में भारतीय सेना ने “ऑपरेशन विजय” के तहत गोवा में सैन्य कार्रवाई की। यह अभियान बहुत कम समय का रहा और भारतीय सेना के सामने पुर्तगाली सेना टिक नहीं सकी। 19 दिसंबर 1961 को पुर्तगाली गवर्नर जनरल ने आत्मसमर्पण कर दिया और गोवा भारत का हिस्सा बन गया। इसी दिन को हर वर्ष गोवा मुक्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है। गोवा मुक्ति दिवस हमें याद दिलाता है कि भारत की आजादी की कहानी 1947 में शुरू हुई थी, लेकिन गोवा के लिए यह कहानी 1961 में जाकर पूरी हुई। यह दिन स्वतंत्रता, राष्ट्रीय एकता और लंबे संघर्ष की जीत का प्रतीक है।















