भारतीय जनता पार्टी नीत एनडीए ने केरल स्थानीय निकाय चुनाव में शानदार प्रदर्शन करके आगामी विधानसभा चुनाव के लिए बड़ा आग़ाज़ किया हैं. भाजपा इस स्थानीय निकाय चुनाव के मार्फत राज्य में 1982 से केरल में स्थापित माकपा नीत लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और कांग्रेस पार्टी नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के द्विपक्षीय राजनीती को तोड़कर एक नया आग़ाज़ कर दिया हैं. भाजपा ने केरल की द्विपक्षीय राजनीती में अपनी धमक का एहसास 2024 के लोकसभा चुनाव में ही दे दिया था जब भाजपा ने त्रिस्सूर लोकसभा सीट जितने के साथ ही तिरुवनंतपुरम लोकसभा की सीट महज 16 हज़ार मतो से हारी थी.
एलडीएफ और यूडीएफ में बढ़ी बेचैनी, भाजपा के उभार से दोनों गठबंधन परेशान
भाजपा के इस उभार से दोनों गठबंधन काफी पेशोपेश में हैं. एलडीएफ नीत वाम दलों को डर हैं की त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल की तर्ज़ पर भाजपा उनको राजनितिक हासिए पर लाकर खड़ी करने की और बढ़ती दिख रही हैं. वही कांग्रेस पार्टी अपने पुरे देश में विलुप्त होते जनाधार से काफी चिंतित हैं और उसे डर हैं कि पूरे देश की तरह भाजपा इस राज्य में भी उनका जनाधार समाप्त कर देगी.
स्थानीय निकाय चुनाव परिणाम : पलक्कड़ नगर पालिका में भाजपा की हैट्रिक
आज घोषित हुए केरल स्थानीय निकायों के चुनाव में भाजपा नीत एनडीए का प्रदर्शन बहुत ही उम्दा रहा हैं. पलक्कड़ नगर पालिका में भारतीय जनता पार्टी ने नगर परिषद की 53 सीटों में से 25 सीटें जीतकर लगातार तीसरी बार इस पालिका पर अपनी पकड़ बनाये रखा हैं. 2020 में पलक्कड़ नगर पालिका में भाजपा के पास 28 सीटें थीं, जबकि 2015 में जब वह पहली बार सत्ता में आई थी तब उसे 24 सीटें मिली थीं.
तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एलडीएफ की 45 साल की सत्ता समाप्त
वही भाजपा ने तिरुवनंतपुरम नगर निगम पर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की 45 साल की सत्ता को पूरी तरह नेस्तनाबूत कर दिया हैं. 101 सदस्यों वाले तिरुवनंतपुरम नगर निगम में एनडीए ने 50 वार्ड जीतने के साथ ही सत्ताधारी एलडीएफ को 29 सीटों पर सिमटा दिया हैं. एनडीए ने पहली बार एर्नाकुलम जिले की त्रिप्पुनितुरा नगर पालिका में भी उम्दा प्रदर्शन करते हुए एलडीएफ और यूडीएफ को पीछे छोड़ते हुए सबसे बड़ा गठबंधन बना हैं.
लोकसभा चुनाव से ही दिखने लगी थी तिरुवनंतपुरम में भाजपा की ताकत
तिरुवनन्तपुरम नगर निगम चुनाव में भाजपा ने का ऐसा शानदार प्रदर्शन की बानगी लोकसभा के चुनाव में ही दिख गई थी. तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट पर विगत तीन लोकसभा चुनावों से भाजपा और कांग्रेस पार्टी में सीधी टक्कर देखी जा रही हैं वही विधानसभा चुनाव में एलडीएफ, यूडीएफ और भाजपा में टक्कर देखा जा रहा हैं.
तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस कमजोर, शशि थरूर बनाम पार्टी की सियासत
कांग्रेस पार्टी तिरुवनंतपुरम में काफी कमजोर हो चुकी हैं. केरल में पूर्व के राजनीतिक परिणामों से यह स्पष्ट हो चुका हैं की तिरुवनंतपुरम की जनता शशि थरूर को मतदान करती हैं ना की कांग्रेस पार्टी को. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत आने वाली सात विधानसभा की सीटों में महज एक सीट कोवलम कांग्रेस पार्टी के पाले में हैं.
लोकसभा और विधानसभा आंकड़े भाजपा की बढ़ती सेंधमारी की गवाही देते हैं
छह विधानसभा की सीटों पर लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट के विधायक होने के बावजूद भी शशि थरूर का 2024 में चुनाव जितना यह बताता हैं की यहाँ के मतदाता सिर्फ थरूर को मत करते हैं ना की कांग्रेस या यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को. विधानसभा और लोकसभा चुनाव में यूडीएफ और एलडीएफ के जीत के बावजूद भी बीजेपी का नगर निगम में शानदार प्रदर्शन यह सब्भित करता हैं की भाजपा अब इन दोनों गठबंधन के मतो में बड़े पैमाने पर सेंधमारी कर रही हैं.
2020 के मुकाबले भाजपा की बड़ी छलांग, कांग्रेस का और पतन
विगत स्थानीय निकाय चुनाव 2020 में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में भाजपा सत्ता में आने से चूक गई थी. 2020 में तिरुवनंतपुरम नगर निगम में वाम नीत एलडीएफ की 52 सीट थी वही भाजपा की 35 सीट थी. कांग्रेस पार्टी महज 10 सीटों पर सिमट गई थी. कांग्रेस पार्टी का तिरुवनंतपुरम नगर निगम में गिरता जनाधार भाजपा के लिए नए अवसर लेकर आ रहा हैं.
शशि थरूर को नजरअंदाज करना कांग्रेस को पड़ा भारी
तिरुवनंतपुरम में कांग्रेस पार्टी के बुरे प्रदर्शन का एक बड़ा कारण पार्टी नेतृतव के द्वारा चार बार के सांसद शशि थरूर को कांग्रेस पार्टी द्वारा नज़रअंदाज करना इस क्षेत्र की जनता को नागवार गुजर रही हैं. तिरुवनंतपुरम लोकसभा की क्षेत्र की जनता ने इस उम्मीद के साथ शशि थरूर को मतदान किया था की कांग्रेस पार्टी उनको लोकसभा में पार्टी का नेता या उपनेता अवश्य बनाएगी.
तिरुवनंतपुरम भाजपा का पुराना गढ़, मामूली अंतर से हारती रही
भाजपा का तिरुवनंतपुरम नगर निगम में काबिज होना कोई अनोखा राजनितिक परिवर्तन नहीं हैं बल्कि तिरुवनंतपुरम लम्बे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ रहा हैं. भाजपा तिरुवनंतपुरम लोकसभा सीट से 2014 और 2024 का लोकसभा चुनाव महज 15 हज़ार और 16 हज़ार मतो से हारी हैं.
अब अगला लक्ष्य विधानसभा चुनाव, त्रिकोणीय मुकाबले की ओर केरल
स्थानीय चुनाव परिणामों के बाद अब बीजेपी का अगला निशाना केरल विधानसभा चुनाव पर हैं. राज्य की जनता एलडीएफ और यूडीएफ के सरकारों से परेशान हैं. 1982 के बाद लगातार सात बार 2016 तक चुनाव दर चुनाव केरल में सत्ता एलडीएफ और यूडीएफ के बीच हस्तांतरण होने की परम्परा थी मगर 2021 में पहली बार एलडीएफ ने यूडीएफ को करारी शिकस्त देकर दोबारा सत्ता में वापसी किया था.
भाजपा लगाएगी विजयन–गांधी कथित गुप्त समझौते का मुद्दा
आने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन और कांग्रेस पार्टी की सुप्रीमो सोनिया गांधी के बीच हुई गुप्त राजनीतिक समझौते को बेनकाब करने की कोशिश करेगी। इन दोनों के बीच हुए गुप्त समझौते के तहत कांग्रेस पार्टी राज्य में पी विजयन के नेतृत्व वाले एलडीएफ को सत्ता में रहने में मदद करेगी, जबकि बदले में पी. विजयन गांधी परिवार को वायनाड सीट के साथ ही कांग्रेस पार्टी को राज्य से अधिकतम लोकसभा सीटें जिताने में मदद करेंगे.
लोकसभा और विधानसभा आंकड़े गुप्त समझौते की ओर इशारा करते हैं
2021 के विधानसभा चुनाव में में एलडीएफ के द्वारा जीती गई 60 विधानसभा सीटों पर लोकसभा के चुनाव में यूडीएफ ने बढ़त बनाई थी. यह राज्य विधानसभा की सीटों का 43 प्रतिशत है. इस तरह की राजनीतिक उथल-पुथल सिर्फ़ किसी गुप्त समझौते के तहत ही होती है.

















