भुवनेश्वर: मुख्यमंत्री मोहन माझी ने नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 के तहत ओडिशा में 35 लोगों को नागरिकता प्रमाणपत्र प्रदान किया। नागरिकता प्रमाणपत्र वितरण समारोह में मुख्यमंत्री मोहन माझी ने कहा कि पड़ोसी देशों में धार्मिक उत्पीड़न के शिकार हो रहे अल्पसंख्यकों के लिए नागरिकता (संशोधन) अधिनियम 2019 पाप-नाशिनी और दुख-नाशिनी पवित्र गंगा के समान है। यह कानून वर्षों से अत्याचार झेल रहे अल्पसंख्यकों के लिए आशा और आश्वासन का मार्ग प्रदान करता आया है।
उल्लेखनीय है कि भारत सरकार के गृह मंत्रालय के माध्यम से नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 के अंतर्गत योग्य आवेदकों को भारतीय नागरिकता प्रदान करने की प्रक्रिया शुरू हुई है। 11 मार्च 2024 को अधिसूचित नियमों के अनुसार, बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से 31 दिसंबर 2014 तक भारत में प्रवेश करने वाले अल्पसंख्यक समुदायों के व्यक्तियों को भारतीय नागरिकता के लिए योग्य माना गया है। इसी प्रक्रिया के तहत आवेदन करने वाले आवेदकों में से आज नबरंगपुर जिले के 35 आवेदकों को मुख्यमंत्री ने नागरिकता प्रमाणपत्र प्रदान किए।

आपकी सुरक्षा, सम्मान और उन्नति हमारी जिम्मेदारी और कर्तव्य
भुवनेश्वर के कृषि भवन सभागार में ओडिशा की जनगणना निदेशालय और भारत सरकार के गृह मंत्रालय के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में नागरिकता ग्रहण करने वाले व्यक्तियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा, “आप अब हमारे भविष्य का हिस्सा हैं। आपकी सुरक्षा, सम्मान और उन्नति हमारी जिम्मेदारी और कर्तव्य है।” उन्होंने कहा, “मैं आपको भारत के नागरिक के रूप में स्वागत करता हूँ।” मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि नागरिकता प्रमाणपत्र प्रदान किए जाने से भारत की शाश्वत परंपरागत करुणा, मानवता और शरण देने के मूल्य एक बार फिर उज्जीवित हुए हैं। युग परिवर्तन के सारथी, आदरणीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इस कानून के निर्माण प्रक्रिया के वास्तविक ‘भगीरथ’ हैं। इसके क्रियान्वयन के पीछे केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह का सबसे बड़ा योगदान रहा है।
आज देश में धार्मिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता
इस कानून की आवश्यकता और प्रासंगिकता पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि किसी भी धर्म का व्यक्ति यदि किसी देश में उत्पीड़ित होता है, तो उसके लिए शरण देने वाले अनेक देश विश्व में उपलब्ध हैं। लेकिन यदि किसी अन्य देश में हिंदू उत्पीड़ित होते हैं, तो उन्हें शरण देने वाला भारत के अलावा कोई देश नहीं है। इसलिए उन्होंने सवाल किया कि यदि भारत में भी ऐसा कानून नहीं बनेगा तो फिर कहाँ बनेगा?
इस अवसर पर अपने विचार व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे देश में अल्पसंख्यकों की आवाज़ बनने की क्षमता है, लेकिन पड़ोसी देशों में अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न पर वे अक्सर मौन रह जाते हैं। अब इस मानसिकता में परिवर्तन आ रहा है। सेकुलरिज़्म के नाम पर केवल एक ही धर्म को प्रोत्साहित करने की प्रवृत्ति रुक गई है। आज देश में धार्मिक आधार पर कोई भेदभाव नहीं होता; कानून की दृष्टि में सभी समान हैं। नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) इसका सफल क्रियान्वयन है।
बांग्लादेश और पाकिस्तान में उत्पीड़ित नागरिक मूल रूप से भारत के निवासी
कार्यक्रम में राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री श्री सुरेश पुजारी ने कहा कि बांग्लादेश और पाकिस्तान में उत्पीड़ित नागरिक मूल रूप से भारत के निवासी हैं—संभव है कि उनके पूर्वजों ने भारत की स्वतंत्रता के लिए संघर्ष भी किया हो। इन अल्पसंख्यकों पर हो रहे अत्याचारों को देखते हुए ही आदरणीय प्रधानमंत्री ने CAA संशोधन की परिकल्पना की थी। नव-नागरिकता प्राप्त नबरंगपुर जिले के निवासियों को आश्वस्त करते हुए उन्होंने कहा कि आपको नागरिकता प्रमाणपत्र मिल गया है—अब आप भारत के नागरिक के रूप में सभी सुविधाएँ प्राप्त करेंगे। भूमिहीनों को भूमि प्रदान की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर जाति प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराया जाएगा।
कानून एवं लोक निर्माण मंत्री श्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने कहा कि देश की स्वतंत्रता के बाद अपनी ही धरती पर शरणार्थी बनकर रहना अत्यंत पीड़ादायक है। आज नागरिकता प्रमाणपत्र प्रदान किए जाने से उन्हें इस स्थिति से मुक्ति मिली है। उन्होंने इस दिशा में जागरूकता बढ़ाने की सलाह भी दी। नव-नागरिकता प्राप्त व्यक्तियों में से 1998 में बांग्लादेश से आए बापिन मिर्द्धा ने कहा कि यह नागरिकता प्रमाणपत्र हमें अपनी मातृभूमि के निवासी के रूप में नई पहचान देता है। इसके माध्यम से हमारा कई वर्षों का सपना पूरा हुआ है। आज का यह दिन हमें भारतीय नागरिकता प्रदान कर गर्व से भर देता है। कार्यक्रम में जनगणना निदेशक श्री निखिल पवन कुमार ने सभी का स्वागत किया और संयुक्त निदेशक श्री हेमंत कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया।

















