भुवनेश्वर: ओडिशा में एक दिल दहला देने वाला गौ तस्करी का मामला सामने आया है, जहां शालभंगा जंगल मार्ग पर संदिग्ध अवस्था में खड़े एक ट्रक से टपकते खून ने पूरे इलाके को हिला दिया। दशपल्ला थाना क्षेत्र के अंतर्गत बुगुड़ा के पास स्थानीय निवासियों ने जब ट्रक से तेज बदबू आती देखी, तो तुरंत पुलिस को सूचना दी। पुलिस द्वारा जांच करने पर ट्रक के भीतर से 30 मरी हुई गायें और एक जीवित बछड़ी बरामद की गई।
वाहन जंगल में छोड़कर चले गए थे गौ तस्कर
पुलिस के अनुसार, यह घटना खोरधा–बोलांगीर राष्ट्रीय राजमार्ग-57 के उस हिस्से पर हुई, जो शालभंगा जंगल क्षेत्र से होकर गुजरता है। प्रारंभिक जांच में पता चला कि टाटा आइचर ट्रक का उपयोग अवैध रूप से गौ परिवहन के लिए किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि जंगल मार्ग से गुजरते समय ट्रक में किसी प्रकार की यांत्रिक खराबी आ गई, जिसके बाद तस्करों ने पकड़े जाने के डर से वाहन को जंगल में छोड़ दिया और फरार हो गए।
लगभग तीन दिनों तक यह ट्रक जंगल में यूं ही खड़ा रहा, लेकिन किसी को इसकी जानकारी नहीं मिल सकी। ग्रामीणों ने जब ट्रक से खून बहते देखा, तो उन्हें किसी अनहोनी का संदेह हुआ और तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलते ही दशपल्ला पुलिस व बाणिगोछा चौकी के अधिकारी मौके पर पहुंचे। ट्रक पर बंधी तिरपाल हटाने पर अंदर का खौफनाक दृश्य सामने आया — 30 गायों के शव एक-दूसरे के ऊपर ठूंसे हुए पाए गए, जबकि एक बछड़ी किसी तरह जीवित थी।

मृत पशुओं का पोस्टमॉर्टम कर दफनाया गया
पशु चिकित्सक सिधांत शेखर साहू ने पशुओं का परीक्षण किया । उन्होंने पुष्टि की कि सभी गायों की मौत दम घुटने से हुई है। उन्होंने कहा कि मुझे सूचना मिली थी कि ट्रक में एक गाय फंसी हुई है। जब हमने ट्रक खोला, तो एक को छोड़कर सभी मृत थीं। जिंदा मिली बछड़ी का उपचार किया गया है। बाकी मृत पशुओं का पोस्टमॉर्टम कर दफनाया गया है। ट्रक के अंदर कोई वेंटिलेशन नहीं था, जिसके कारण उनका दम घुट गया।” पुलिस ने मौके पर विस्तृत जांच की और ट्रक को जब्त कर लिया। विभागीय पशु चिकित्सकों की सहायता से सभी का पोस्टमॉर्टम कराया गया। जांच अधिकारी अरुण कुमार जेना ने बताया कि यह पता लगाने के लिए जांच जारी है कि गायों को कहां से लाया गया था और इन्हें कहां ले जाया जा रहा था।
उन्होंने कहा कि अवैध गौ परिवहन गिरोह से जुड़े लोगों की पहचान और नेटवर्क का पता लगाने के लिए गहन जांच की जा रही है।
हालांकि, इस घटना ने स्थानीय लोगों में कई सवाल खड़े कर दिए हैं। उनका कहना है कि दशपल्ला और बाणिगोछा थानों के बीच मात्र 30 किलोमीटर की दूरी होने के बावजूद और नियमित पुलिस गश्त के बाद भी तीन दिनों तक यह ट्रक नजर से कैसे बचा रहा? स्थानीय गौ-रक्षा कार्यकर्ताओं ने भी इस घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही और अवैध गौ तस्करी पर रोक लगाने में असफलता के गंभीर आरोप लगाए। कार्यकर्ताओं ने कहा कि बार-बार शिकायतों और मांगों के बावजूद प्रशासन कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा है। इसी कारण ऐसे मामले लगातार सामने आ रहे हैं। मौजूदा कानूनों का सही ढंग से पालन नहीं हो रहा और न ही तस्करों के नेटवर्क को खत्म करने के प्रभावी प्रयास किए जा रहे हैं । पुलिस ने मामले की व्यापक जांच शुरू कर दी है और फरार ड्राइवर व अन्य तस्करों की तलाश जारी है।
















