दिल्ली के लालकिला क्षेत्र में 10 नवंबर, 2025 को हुए विस्फोट और छत्तीसगढ़ में दुर्दांत नक्सली माड़वी हिडमा की सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मौत के बाद कट्टरपंथी आतंकवाद और माओवादियों के बीच गहरा गठजोड़ उजागर हुआ है। यह गठजोड़ बाहर से भले ही अलग दिखे, लेकिन भारत विरोधी गतिविधियों में ये आपस में जुड़े हुए हैं। इस आंतरिक षड्यंत्र को राजनीतिक संरक्षण कुछ विपक्षी दल, खासकर कांग्रेस के नेता खुलकर दे रहे हैं। हिडमा के समर्थन में जो नारे लगे, वे 2016 के अफजल गुरु समर्थन वाले नारे से मेल खाते हैं। यह सब दर्शाता है कि हिंसा और आतंक के जरिए भारत के सामाजिक-सांस्कृतिक ताने-बाने को बिगाड़ने की पुरानी साजिश है।
हिडमा के समर्थन में गत दिनों एक वीडियो वायरल हुआ, जिसे नक्सल समर्थक सोनी सोढ़ी ने बनाया था। इसमें उसकी मौत को ‘हत्या’ बताया गया। इसे कांग्रेस नेता और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने भी साझा किया और हिडमा के एनकाउंटर पर सवाल उठाए। हिडमा के एनकाउंटर से पहले छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने नक्सल विरोधी अभियान को ‘आदिवासियों’ पर हमला बताया था। इधर, दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण के खिलाफ प्रदर्शन हुए, जिसमें हिडमा के समर्थन में नारे लगे, जैसे- ‘तुम कितने हिडमा मारोगे, हर घर से हिडमा निकलेगा।’ यह नारा 2016 में आतंकवादी अफजल बरसी पर लगे नारे ‘तुम कितने अफजल मारोगे, हर घर से अफजल निकलेगा’ से मेल खाता है। नारे में शब्द और शैली वही है, बस नाम का अंतर है। यानी, मुस्लिम कट्टरपंथी आतंकवाद और माओवाद भले ही अलग-अलग धाराएं हैं, लेकिन दोनों के बीच गहरा गठजोड़ है।
भारत विरोधी शक्तियां एकजुट होकर हिंसा और आतंक के नए तरीके अपना रही हैं। जिसे कांग्रेस सहित कुछ राजनीतिक दलों के नेता समर्थन दे रहे हैं। लालकिला विस्फोट के बाद कांग्रेस के तीन नेताओं के बयान से यह स्पष्ट है। कांग्रेस नेता राशिद अल्वी ने सवाल उठाया ‘‘आखिर किस मजबूरी में ये हिंसा की राह पकड़ रहे हैं। एमबीबीएस और एमडी करने वाला युवा आतंक का रास्ता क्यों अपनाएगा? इस पर मोदीजी विचार करें।’’ वहीं, कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने आतंकी हमले में शामिल लोगों को ‘गुमराह’ बताया। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के मौलाना अरशद मदनी ने गिरफ्तारियों को मुसलमानों से जोड़ा, जिसका समर्थन कांग्रेस नेता उदित राज ने किया और इसे ‘उत्पीड़न’ करार दिया।
दरअसल, दिल्ली में ‘प्रदूषण विरोधी’ प्रदर्शन का आयोजन लेफ्ट-विंग स्टूडेंट संगठन भगत सिंह छात्र एकता मंच और द हिमखंड ने किया था। प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर पेपर स्प्रे से हमला भी किया गया, जिसके बाद 22 लोगों पर केस दर्ज किया गया और 16 गिरफ्तार हुए। वास्तव में यह संगठित प्रदर्शन वायु प्रदूषण के बहाने राजनीतिक और नक्सल समर्थक एजेंडा को आगे बढ़ाने वाला था। इसमें कई रेडिकल स्टूडेंट और लेफ्ट-झुकाव वाले संगठन शामिल थे जैसे-एआईआरएसओ, एआईएसए, एआईएसएफ, एपीसीआर, भीम आर्मी, बीएएसएफ, कलेक्टिव, सीआरपीपी, डीआईएसएससी, डीएसयू, डीटीएफ, फ्रेटरनिटी मूवमेंट, आईएपीएल, नजरिया मैग्जीन, रिहाई मंच, एसएफआई, यूनाइटेड पीस अलायंस, वाई4एस आदि। ये समूह नक्सलवाद का महिमामंडन करते हैं, भारतीय संस्थानों को कमजोर करते हैं और भारत विरोधी सोच फैलाते हैं। पुलिस की एफआईआर में इन संगठनों को आतंकवाद से जोड़कर गंभीर धाराओं में आरोपी बनाया है।

















