भुवनेश्वर: ओडिशा में लाल आतंक के खिलाफ जारी अभियान के बीच मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने विधानसभा में जानकारी दी कि पिछले 18 महीनों में 12 माओवादियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि 21 माओवादी पुलिस मुठभेड़ों में मारे गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार माओवाद प्रभावित इलाकों में इसे जड़ से खत्म करने के लिए समन्वित सुरक्षा कार्रवाइयों और विकासात्मक पहल दोनों पर समान रूप से जोर दे रही है।
21 में से 17 माओवादी ओडिशा–छत्तीसगढ़ सीमा पर मारे गए
कांग्रेस विधायक ताराप्रसाद बहिनिपति के प्रश्न के लिखित उत्तर में मुख्यमंत्री ने बताया कि 1 जून 2024 से 30 नवंबर 2025 के बीच 12 माओवादियों ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया। इसी अवधि में सुरक्षा बलों के साथ हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में 21 माओवादी ढेर हुए। मुख्यमंत्री ने बताया कि इन 21 में से 17 माओवादी ओडिशा–छत्तीसगढ़ सीमा पर मारे गए, जहां दोनों राज्यों की संयुक्त सुरक्षा एजेंसियों द्वारा अभियान तेज किए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार लगातार माओवादी नेटवर्क को कमजोर करने के लिए पुलिसिंग को मजबूत कर रही है और प्रभावित इलाकों में विकास कार्यों को गति दे रही है।
माझी ने आगे बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में माओवादियों के लिए प्रोत्साहन आधारित आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास योजना में संशोधन कर उसे और आकर्षक बनाया है। नई नीति 27 नवंबर 2025 से लागू हो गई है और इसमें आत्मसमर्पण करने वालों के लिए अधिक वित्तीय सहायता और पुनर्वास लाभ शामिल किए गए हैं।
माओवाद के उन्मूलन के लक्ष्य के तहत नई आत्मसमर्पण नीति जारी
मुख्यमंत्री ने विधानसभा को बताया कि वर्तमान में कंधमाल जिला पूर्ण रूप से LWE-प्रभावित श्रेणी में आता है, जबकि कालाहांडी, कोरापुट, मलकानगिरी, नबरंगपुर, नुआपड़ा और रायगढ़ा को लिगेसी एंड थ्रस्ट (L&T) श्रेणी में रखा गया है। इन छह जिलों के साथ दो अन्य अधिसूचित क्षेत्रों को मिलाकर कुल नौ जिले सुरक्षा संबंधी व्यय (SRE) योजना के अंतर्गत आते हैं। यह योजना नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा अभियानों को मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित है।
उन्होंने कहा कि उग्रवाद उन्मूलन के लिए सुरक्षा अभियान के साथ-साथ पुनर्वास पर विशेष जोर दिया जा रहा है, ताकि अधिक से अधिक माओवादी हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट सकें। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार ने माओवाद के उन्मूलन के लक्ष्य के तहत नई आत्मसमर्पण नीति जारी की है, जिसमें आत्मसमर्पण करने वालों को अधिकतम 1.20 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता देने का प्रावधान है। इसी के साथ हथियार जमा कराने पर प्रोत्साहन राशि बढ़ाई गई है।
आत्मसमर्पित माओवादियों को ए और बी—दो श्रेणियों में जाएगा बांटा
सरकार की अधिसूचना के अनुसार, आत्मसमर्पित माओवादियों को ए और बी—दो श्रेणियों में बांटा जाएगा। कैटेगरी ए में केंद्रीय समिति सचिव, केंद्रीय सैन्य आयोग प्रमुख, पोलित ब्यूरो सदस्य, केंद्रीय समिति सदस्य, राज्य समिति सदस्य, स्पेशल ज़ोनल कमिटी सदस्य और रीजनल कमिटी सदस्य जैसे उच्च रैंकिंग कैडर शामिल होंगे। जिन सक्रिय माओवादियों पर 5 लाख रुपये या उससे अधिक का इनाम है, उन्हें अतिरिक्त 10 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। यह राशि संबंधित जिले के एसपी द्वारा आत्म समर्पण करने वाले माओवादी के नाम से बैंक में फिक्स्ड डिपॉजिट के रूप में जमा की जाएगी। इस पर मिलने वाला ब्याज आत्मसमर्पित माओवादी को समय-समय पर दिया जाएगा।
तीन वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद, यह पूरी राशि एकमुश्त दी जाएगी, बशर्ते आत्मसमर्पित माओवादी का व्यवहार संतोषजनक हो। इसका मूल्यांकन जिला एसपी की अनुशंसा पर गठित समिति करेगी। नई नीति में अंत्योदय गृह योजना के तहत आवास, 25,000 रुपये का विवाह प्रोत्साहन, तथा केंद्र और राज्य सरकार द्वारा संचालित निःशुल्क कौशल विकास कार्यक्रमों में नामांकन जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं। इनका उद्देश्य आत्मसमर्पित माओवादियों को समाज में सम्मानजनक जीवन अपनाने और पुनः हिंसात्मक गतिविधियों में न लौटने के लिए सक्षम बनाना है।

















