भारत के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर संसद में विशेष चर्चा का आयोजन किया जा रहा है। इस ऐतिहासिक मौके को सरकार स्वतंत्रता संग्राम में इस गीत की भूमिका और इसकी सांस्कृतिक-राष्ट्रीय प्रासंगिकता के रूप में प्रस्तुत करना चाहती है। वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन का प्रमुख मन्त्र रहा है, जिसने करोड़ों लोगों में स्वाधीनता का जज्बा जगाया था। इसी पृष्ठभूमि में संसद में इसे लेकर विस्तृत बहस तय की गई है।
वंदे मातरम् महर्षि बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचित एक ऐसी काव्य रचना है, जो मातृभूमि को देवी रूप में पूजने का संदेश देती है। जब भारत अंग्रेजी शासन की जंजीरों में जकड़ा था, तब यही गीत देशवासियों के भीतर आज़ादी की ज्योति प्रज्वलित करता था। सरकार का उद्देश्य इस बहस के माध्यम से उन ऐतिहासिक तथ्यों को उजागर करना है, जिनमें वंदे मातरम् ने भारतीयों को एक सूत्र में बांधने का काम किया। साथ ही 1937 में कांग्रेस द्वारा हटाई गई कुछ पंक्तियों को लेकर राजनीतिक विमर्श भी देखने को मिल सकता है।
सरकार इन पंक्तियों को हटाने के निर्णय पर मुख्य विपक्षी दल को घेरने की रणनीति अपना सकती है। संसद द्वारा इस चर्चा के लिए कुल 10 घंटे निर्धारित किए गए हैं। लोकसभा में बहस की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। वे दोपहर 12 बजे इस महत्वपूर्ण मुद्दे पर अपना संबोधन देंगे। उनके साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत केंद्र सरकार के कई मंत्री भी चर्चा में सक्रिय रूप से भाग लेंगे। लोकसभा में चर्चा का अंतिम वक्ता भी भाजपा से ही होगा, जिससे सरकार अपनी भावनाओं और तर्कों का समापन सशक्त रूप से कर सकेगी। राज्यसभा में इसकी कमान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संभालेंगे। विपक्ष की ओर से भी कई नेता इस चर्चा में भाग लेंगे। कांग्रेस की तरफ से प्रियंका गांधी वाड्रा, गौरव गोगोई, दीपेंद्र हुड्डा,चमाला रेड्डी विमल अकोइजम, प्रनीति शिंदे, प्रशांत पडोले और ज्योत्सना महंत जैसे नाम सामने आए हैं।

















