भुवनेश्वर: ओडिशा भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा के हालिया आरोपों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। मोइत्रा ने आरोप लगाया था कि नयागढ़ पुलिस ने चार बंगाली भाषी व्यक्तियों को गैरकानूनी तरीके से जिले से बाहर निकाल दिया। उनका यह दावा ऐसे समय में सामने आया है जब राज्यभर में बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों की पहचान के लिए व्यापक सत्यापन अभियान चल रहा है।
टीएमसी ने ऐतिहासिक रूप से अवैध घुसपैठियों का बचाव किया है
बीजेपी प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने मोइत्रा के आरोपों को आधारहीन बताते हुए टीएमसी पर गैरकानूनी घुसपैठियों को संरक्षण देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, यह स्पष्ट नहीं है कि महुआ मोइत्रा को बांग्लादेशी घुसपैठियों से इतनी हमदर्दी क्यों है। ओडिशा की जनता को किसी भी राष्ट्रविरोधी तत्व से सलाह लेने की आवश्यकता नहीं है। बिस्वाल ने यह भी कहा कि टीएमसी ने ऐतिहासिक रूप से अवैध घुसपैठियों का बचाव किया है, जिससे देश की आंतरिक सुरक्षा खतरे में पड़ी है।
बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाने के लिए ओडिशा सरकार प्रतिबद्ध
अपनी एक्स पोस्ट में बिस्वाल ने कहा कि ओडिशा पुलिस कानून के अनुसार और व्यवस्थित तरीके से सत्यापन अभियान चला रही है। उन्होंने लिखा कि ओडिशा सरकार राज्य से अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को हटाने के लिए प्रतिबद्ध है। जहां भी संदिग्ध लोग पाए जाएंगे, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मोइत्रा को सलाह दी कि वे “झूठे आरोप” लगाने से बचें, जो ओडिशा और पश्चिम बंगाल के बीच सौहार्दपूर्ण संबंधों को प्रभावित कर सकते हैं।
इधर, नयागढ़ पुलिस ने भी मोइत्रा के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। नयागढ़ के अतिरिक्त एसपी सुभाष चंद्र पांडा ने स्पष्ट कहा कि बंगाली भाषी किसी भी भारतीय नागरिक को न हिरासत में लिया गया और न ही जिले से बाहर जाने का निर्देश दिया गया। उन्होंने इन आरोपों को “पूरी तरह झूठा” बताते हुए कहा कि पुलिस को ऐसी कोई घटना नहीं मिली है। महुआ मोइत्रा ने अपने एक्स हैंडल पर एक वीडियो साझा कर दावा किया था कि चार मजदूरों को वैध दस्तावेज दिखाने के बावजूद पुलिस ने 72 घंटे के भीतर जिला छोड़ने का आदेश दिया। उन्होंने इसे नागरिक अधिकारों का उल्लंघन बताते हुए कानूनी कार्रवाई करने की घोषणा की। बीजेपी विधायक संतोष खटुआ ने भी मोइत्रा के बयानों की आलोचना की और कहा कि उनके बयान सांसद के पद की गरिमा के अनुरूप नहीं हैं। उन्होंने प्रश्न किया कि पश्चिम बंगाल सरकार अपने राज्य में अवैध बस्तियों को रोकने में विफल क्यों रही। खटुआ ने कहा कि ओडिशा के सत्यापन अभियान की आलोचना करने वालों को पहले अपने राज्य की स्थिति पर नजर डालनी चाहिए।

















