भोपाल गैस पीड़ितों के बीच राजनीति: PM मोदी और BJP का विरोध, एंडरसन के पुतले के साथ संघ गणवेश में पुतला जलाने का प्रयास
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भोपाल गैस पीड़ितों के बीच राजनीति : PM मोदी और BJP का विरोध, एंडरसन के पुतले के साथ संघ गणवेश में पुतला जलाने का प्रयास

बदलते भारत की प्रगति से ईर्षित देश और दुनिया की राजनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमलों पर केंद्रित हो रही है। इसकी झलक भोपाल गैस कांड की 41वीं बरसी पर भी देखने को मिली।

Written byरमेश शर्मारमेश शर्मा
Dec 4, 2025, 08:25 pm IST
inभारत, विश्लेषण, मध्य प्रदेश

बदलते भारत की प्रगति से ईर्षित देश और दुनिया की राजनीति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमलों पर केंद्रित हो रही है। इसकी झलक भोपाल गैस कांड की 41वीं बरसी पर भी देखने को मिली। गैस पीड़ितों के बीच काम करने वाले संगठनों ने पर्याप्त मुआवजा न मिलने को लेकर मोदी जी पर आरोप लगाया और मुख्य आरोपी वारेन एंडरसन के साथ एक ऐसा पुतला भी बनाया जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गणवेश और ध्वज प्रणाम की मुद्रा में था। जबकि भोपाल गैस दुर्घटना में पीएम मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और भाजपा का दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं है।

इन दिनों प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर हमला करना मानो एक “फैशन” हो गया है। जैसे जैसे भारत विश्व में विकास की नई अंगड़ाई ले रहा है और भारत साँस्कृतिक मूल्यों की साख बढ़ रही है, वैसे वैसे संघ पर हमले भी तेज हो रहे हैं। बात कोई हो, विषय कोई भी हो लेकिन उसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को अवश्य घसीटा जाता है। इसी की झलक तीन दिसम्बर को भोपाल में गैस कांड की इक्तालीस वीं बरसी पर देखने को मिली। गैस कांड की बरसी पर वारेन एंडरसन के पुतले के साथ एक ऐसा पुतला भी बनाया गया जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक की तरह था। इस पुतले को वारेन एंडरसन के पुतले के साथ जलाने का प्रयास हुआ, लेकिन पुलिस के हस्तक्षेप से बात बढ़ने से रुक गई।

विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना

भोपाल गैस कांड विश्व की सबसे बड़ी औद्योगिक दुर्घटना थी। लगभग पन्द्रह हजार लोगों के प्राण गये और लगभग पांच लाख प्रभावित हुये थे। वह दो और तीन दिसम्बर 1984 की मध्यरात्रि थी। उस रात यूनियन कार्बाइड कारखाने से गैस का रिसाव हुआ था। यह अमेरिकी कंपनी यूनियन कार्बाइड भोपाल के इस कारखाने में कीटनाशक बनाती थी। उस रात कारखाने से अकस्मात “मिथाइल आइसो साइनाइड” गैस का रिसाव हो गया। इसने पूरे भोपाल नगर ही नहीं आसपास के गांवों को भी चपेट में ले लिया था। तेज ठंड और तापमान की गिरावट के कारण गैस का प्रभाव कई दिनों तक रहा। इससे हजारों लोग कुछ स्थायी बीमारियों का शिकार भी बने। तब से प्रतिवर्ष तीन दिसम्बर को भोपाल में गैस कांड की बरसी मनाई जाती है। मृतकों को श्रद्धांजलि देने के लिये सर्वधर्म सभा होती है। इसमें सभी राजनैतिक दलों के प्रतिनिधि भी उपस्थित होते हैं।

पीड़ितों के कार्यक्रम में राजनीतिक हरकत

इन 41 वर्षों के दौरान मध्यप्रदेश में कई सरकारें बदलीं। कांग्रेस भी सत्ता में रही और भाजपा भी। कई बार दोनों के मुख्यमंत्री इस सर्वधर्म सभा में देखे गये। लेकिन इस बार गैस पीड़ितों के बीच राजनीति का एक विशिष्ट रंग देखने को मिला। जिसमें प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर खुलकर निशाना लगाया गया। गैस पीड़ितों के बीच सक्रिय कुछ संगठनों ने दो दिन पहले मीडिया से बातचीत में गैस पीड़ितों को पर्याप्त मुआवजा न मिलने में प्रधानमंत्री श्रीनरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी के राजनैतिक निर्णयों को दोषी बताया। बात यहीं समाप्त नहीं हुई।

गैस कांड की बरसी के दिन 3 दिसम्बर को एक ऐसा पुतला जलाने का प्रयास किया जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गणवेश में ध्वज प्रणाम करते हुये जैसी मुद्रा में “डिजाइन” किया गया था। इन संगठनों ने इस पुतले को वारेन एंडरसन के पुतले के साथ जोड़कर खड़ा किया था। भोपाल गैस कांड के समय वारेन एंडरसन यूनियन कार्बाइड का मुखिया था। इस भीषण गैस रिसाव का दोषी एंडरसन को ही माना गया था। इसीलिए प्रतिवर्ष गैस कांड की बरसी पर वारेन एंडरसन का पुतला जलाया जाता है। इस बार वारेन एंडरसन के पुतले के साथ संघ के स्वयंसेवक जैसी पुतले की मुद्रा देखकर विरोध हुआ। विरोध बढ़ने पर आयोजकों ने यह तो कहा कि “यह पुतला संघ का नहीं है, यह तो कंपनी का प्रतीक है” लेकिन शरारत स्पष्ट दिख रही थी। इसलिए विरोध के बाद भी पुतला हटाने को तैयार नहीं हुए। अंत में पुलिस ने हस्तक्षेप किया और यह पुतला हटाकर केवल एंडरसन का पुतला जलाया गया।

आइने की तरह स्पष्ट हैं वास्तविक दोषियों के चेहरे

यदि यूनियन कार्बाइड का इतिहास को देखें तो वे चेहरे बहुत स्पष्ट होते हैं जिनकी लापरवाही से यह घटना घटी। वास्तविक दोषी उन्हें माना जाना चाहिए जिन्होंने भविष्य का आकलन किए बिना इस कारखाने को अनुमति, आशंकाएँ उठने पर बचाव किया और एंडरसन को ससम्मान सुरक्षित अमेरिका वापस भेजा। भोपाल में इस कारखाने की नींव 1969 में रखी गई थी तब केन्द्र और मध्य प्रदेश में दोनों जगह कांग्रेस की सरकार थी। केन्द्र में प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी और मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री श्यामाचरण शुक्ल थे। नियमों के अनुसार इस कारखाने को आबादी से दूर होना चाहिए था। लेकिन यह घनी आबादी के बीच स्थापित हो गया। विदेशी कंपनी को अनुमति देने में केन्द्र सरकार की और भूमि आवंटन में राज्य सरकार की भूमिका होती है। लेकिन इन संगठनों ने इस बिंदु पर कोई बात नहीं की। दूसरा विषय दुर्घटना होने का है। वह दुर्घटना अकस्मात नहीं घटी थी। वहां कार्यरत श्रमिकों को कारखाने की कार्यशैली से किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका हो गई थी। यूनियन कार्बाइड में कार्यरत भारतीय मजदूर संघ से संबंधित कार्यकर्ताओं ने कारखाने के प्रबंधन और पत्रकारों को अवगत करा दिया था, लेकिन कंपनी प्रबंधन सतर्क था। अधिकांश समाचार पत्रों में वह समाचार रुक गया था। फिर यह विषय मध्य प्रदेश विधानसभा में भी आया। लेकिन सरकार की ओर से आश्वस्त किया गया था कि सारी सावधानियां बरती जा रही हैं और किसी प्रकार की आशंका नहीं है। फिर इस विषय पर दिल्ली से प्रकाशित एक बड़े समाचार पत्र की विशेष रिपोर्ट में भी आया और कोई बड़ी दुर्घटना की आशंका व्यक्त की गई। लेकिन न मध्यप्रदेश सरकार सतर्क हुई और न कंपनी ने कोई अतिरिक्त सावधानी बरती और वह भीषण दुर्घटना घट गई। वह दो और तीन दिसम्बर 1984 की मध्य रात्रि थी। तब प्रधानमंत्री श्री राजीव गाँधी और मध्यप्रदेश में मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह थे। ये दोनों सरकारें भी कांग्रेस की थीं।

वारेन एंडरसन को वीआईपी की तरह सम्मान दिया गया

दुर्घटना के बाद कंपनी प्रमुख वारेन एंडरसन भोपाल आया। लेकिन उसे वीआईपी व्यवहार दिया गया। कलेक्टर और एसपी ने सुरक्षित विमानतल पहुंचाया और वह विशेष विमान से दिल्ली लौट गया। उसकी विशिष्ट सुरक्षा के साथ वापस भेजने का विवरण तत्कालीन कलेक्टर श्री मोती सिंह ने अपनी पुस्तक में लिखा है कि उन्होंने मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह के आदेश पर वारेन एंडरसन को सम्मान दिल्ली वापस भेजा था। इसके अतिरिक्त विभिन्न न्यायालयों में चले मुकदमों और राहत राशि के समझौतों में नरमी बरतने के विषय भी समय-समय पर उठते रहे लेकिन इस वर्ष गैस कांड की बरसी मनाने वालों ने इनमें से किसी विषय पर कोई चर्चा नहीं की। उनकी तख्तियों पर मोदीजी का उल्लेख था और एंडरसन के पुतले के साथ यह पुतला था। यह कोई शरारत नहीं थी अपितु योजना के अंतर्गत था। यह वही योजना है जो पूरे देश में देखी जा रही है। राष्ट्र और संस्कृति पर हमले की। पूरे देश में राष्ट्र और संस्कृति के रूपान्तरण का कुचक्र चल रहा है। जो इस कुचक्र में सहभागी है उनके निशाने पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी होता है। कोई विषय हो या न हो, वे संघ का नाम अवश्य घसीटते हैं। यही प्रयास भोपाल की गैस कांड बरसी पर इस वर्ष हुआ है।

Topics: पीएम मोदीआरएसएसभोपाल गैस त्रासदीभोपाल गैस पीड़ितसंघ पर झूठा आरोपवारेन एंडरसन
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